आदिवासी वर्ग को साधने विहिप के 15 हजार सामाजिक समरसता कार्यक्रम में मनाएंगे राम जन्मोत्सव

Amresh Kushwaha | Mar 16, 2026, 11:57 IST
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मध्यप्रदेश में 22 फीसदी आदिवासी आबादी को रिझाने के लिए विहिप ने राम जन्मोत्सव के बहाने 15 हजार जगह सामाजिक समरसता कार्यक्रम रखे हैं। इसमें शबरी माता, निषाद राज और केवट प्रसंग खास तौर पर शामिल होंगे।

News In Short

  • मध्यप्रदेश में करीब 22 फीसदी आबादी आदिवासी समाज की है।
  • विश्व हिंदू परिषद ने राम जन्मोत्सव पर 15 हजार जगह कार्यक्रम रखे हैं।
  • इन कार्यक्रमों में शबरी माता, निषाद राज और केवट के प्रसंग खास होंगे।
  • एमपी में 80 से ज्यादा सीटों पर ट्राइबल वोटर जीत-हार तय करते हैं।
  • भाजपा और RSS इस वर्ग को अपने पाले में रखने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं।

News In Detail

आदिवासी वोट है असली मकसद

मध्यप्रदेश में जो जनजाति समाज को साध ले, सत्ता उसी की होती है। यह बात भाजपा और RSS दोनों जानते हैं। प्रदेश में करीब 22 फीसदी आबादी आदिवासी समाज की है।



इस वर्ग का झुकाव जिस तरफ हो, सरकार उसी की बनती है। इसीलिए अब राम जन्मोत्सव को एक बड़े अवसर की तरह देखा जा रहा है। धर्म और राजनीति एक साथ आगे बढ़ रहे हैं। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद यह विहिप का सबसे बड़ा आउटरीच अभियान माना जा रहा है।



विहिप का 15 हजार जगह प्लान

विश्व हिंदू परिषद ने इस बार राम नवमी को खास बनाने की पूरी तैयारी की है। प्रदेश में करीब 15 हजार जगहों पर कार्यक्रम होंगे। 19 मार्च से 2 अप्रैल तक ये कार्यक्रम चलते रहेंगे।



महाकौशल, मालवा और मध्यभारत प्रांत में 15 हजार समितियां इसे आयोजित करेंगी। इन सभी कार्यक्रमों में आदिवासी समाज के लोगों की मौजूदगी सुनिश्चित करने पर खास जोर है।



शबरी, निषाद राज और केवट की होगी बात

इन कार्यक्रमों में भगवान राम और जनजाति समाज के रिश्ते को खास तरीके से दिखाया जाएगा। शबरी माता, निषाद राज और केवट के प्रसंगों का जिक्र इसलिए किया जाएगा। ये तीनों जनजाति और वंचित वर्ग के प्रतीक माने जाते हैं।



इन प्रसंगों के जरिए यह संदेश देने की कोशिश होगी। संदेश यह है कि भगवान राम सभी वर्गों के हैं।



80 सीटों पर आदिवासी निर्णायक

एमपी विधानसभा में 47 सीटें आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। लेकिन असली ताकत इससे कहीं ज्यादा है। कुल 80 से ज्यादा सीटें ऐसी हैं जहां ट्राइबल वोटर जीत-हार तय करते हैं। यानी आधे से ज्यादा विधानसभा सीटों पर इनका असर है।



2023 के चुनाव में भाजपा को इस वर्ग की 31 सीटों पर जीत मिली थी। यही कारण है कि इस वर्ग को साधना भाजपा की सबसे बड़ी जरूरत है।



जनजाति बहुल इलाकों में खास फोकस

जनजाति बहुल बस्तियों में भगवान राम से जुड़े प्रसंगों का गुणगान किया जाएगा। इसमें शबरी माता, निषाद राज और केवट को खास जगह मिलेगी।



समरसता कार्यक्रमों में आदिवासी समाज के लोगों को मंच पर बुलाने की योजना है। उन्हें सम्मानित करके जोड़ने की कोशिश होगी।



अयोध्या के बाद बदली रणनीति

अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण के बाद विहिप ने राम नवमी को बड़े पैमाने पर मनाने का सिलसिला शुरू किया है। पहले राम नवमी एक धार्मिक पर्व थी। अब इसे एक सामाजिक जुड़ाव के मौके के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। इस बार का फोकस साफ है। आदिवासी समाज तक राम कथा की पहुंच बनाना और उन्हें भावनात्मक रूप से जोड़ना।



BJP की नजर 2028 पर

मध्यप्रदेश में 2028 में विधानसभा चुनाव होंगे। उससे पहले आदिवासी समाज में पैठ बनाना जरूरी है। कांग्रेस लंबे समय से आदिवासी वर्ग का पारंपरिक आधार रही है। भाजपा इस आधार को तोड़ने की कोशिश में है।



श्रीराम जन्मोत्सव के जरिए धर्म और संस्कृति की भाषा में आदिवासियों से जुड़ने की कोशिश हो रही है। यह रणनीति कितनी कामयाब होती है, यह आने वाला वक्त बताएगा।



FAQ

  1. विहिप ने मध्यप्रदेश में राम जन्मोत्सव पर कितने कार्यक्रम रखे हैं?
    विश्व हिंदू परिषद ने मध्यप्रदेश में 19 मार्च से 2 अप्रैल 2026 के बीच करीब 15 हजार जगहों पर सामाजिक समरसता कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है। ये कार्यक्रम महाकौशल, मालवा और मध्यभारत प्रांत की 15 हजार समितियों के जरिए होंगे। इनमें खास तौर पर आदिवासी समाज की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। कार्यक्रमों में शबरी माता, निषाद राज और केवट के प्रसंगों का जिक्र होगा। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद यह विहिप का सबसे बड़ा आउटरीच अभियान माना जा रहा है।
  2. मध्यप्रदेश में आदिवासी वोटर कितनी सीटों पर असर डालते हैं?
    मध्यप्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं। इनमें से 47 सीटें अनुसूचित जनजाति यानी आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। लेकिन कुल 80 से ज्यादा सीटें ऐसी हैं जहां ट्राइबल वोटर जीत-हार तय करने की स्थिति में होते हैं। प्रदेश में करीब 22 फीसदी आबादी आदिवासी समाज की है। 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को आदिवासी आरक्षित 47 में से 31 सीटों पर जीत मिली थी। यही कारण है कि भाजपा और उससे जुड़े संगठन इस वर्ग को लगातार अपने पाले में रखने की कोशिश करते रहते हैं।
  3. राम जन्मोत्सव कार्यक्रमों में शबरी माता का जिक्र क्यों होगा?
    शबरी माता, निषाद राज और केवट रामायण के ऐसे पात्र हैं जो जनजाति और वंचित वर्ग से ताल्लुक रखते हैं। शबरी एक वनवासी महिला थीं जिन्होंने भगवान राम को जूठे बेर खिलाए और राम ने उन्हें सम्मान दिया। निषाद राज ने राम को गंगा पार करवाया और केवट ने उनकी नाव चलाई। विहिप इन प्रसंगों के जरिए यह संदेश देना चाहती है कि राम का जनजाति समाज से गहरा रिश्ता है। इससे आदिवासी समाज में भावनात्मक जुड़ाव बनाना आसान होता है। यह रणनीति राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों नजरिए से काम करती है।

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