रानी दुर्गावती स्मारक: जिस जमीन पर कब्जा, माेदी ने वहीं किया था भूमि पूजन, दो साल बीते पर कोई काम नहीं
Aman Vaishnav | Mar 16, 2026, 16:43 IST
rani durgawati smarak jabalpur delay update
जबलपुर में रानी दुर्गावती स्मारक का काम दो साल बाद भी शुरू नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसका भूमिपूजन किया था, लेकिन जमीन पर अब भी अतिक्रमण है। यहां करीब 655 परिवार बसे हैं, जिन्हें हटाने की तैयारी प्रशासन कर रहा है।
वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर बनने वाले स्मारक और उद्यान का भूमिपूजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अक्टूबर 2023 में विधानसभा चुनाव से पहले किया था। हैरानी की बात यह है कि सवा दो साल बीतने के बाद भी यह प्रोजेक्ट जमीन पर शुरू नहीं हो पाया है।
असल वजह भी चौंकाने वाली है। जिस जमीन पर प्रधानमंत्री से भूमिपूजन कराया गया था, वह पहले से ही अतिक्रमण की चपेट में थी। यही कारण है कि अब तक इस प्रोजेक्ट की करीब 21 से 24 एकड़ जमीन पर कब्जा बना हुआ है। जानकारी के अनुसार इस जमीन पर फिलहाल करीब 655 परिवार रह रहे हैं।
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पर्यटन और संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र लोधी का कहना है कि अतिक्रमण हटाने के लिए करीब 7–8 करोड़ रुपए मुआवजे के तौर पर दिए जा चुके हैं। फिर भी काम क्यों शुरू नहीं हुआ, इसकी जानकारी ली जाएगी। वहीं कलेक्टर राघवेंद्र सिंह का कहना है कि अतिक्रमण हटाने की पूरी तैयारी कर ली गई है। जैसे ही कब्जे हटेंगे उसके तुरंत बाद निर्माण का काम शुरू करा दिया जाएगा।
धर्मेंद्र लोधी उस कमेटी के सदस्य भी हैं, जो रानी दुर्गावती लोक के निर्माण के लिए बनाई गई है। इस कमेटी के अध्यक्ष मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हैं।
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अक्टूबर 2024 में पांच मंत्रियों की यह समिति बनाई गई थी। इसमें जनजातीय मंत्री विजय शाह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल, उस समय के वन मंत्री रामनिवास रावत और पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी शामिल थे। हालांकि अब तक यह भी सामने आया है कि इस कमेटी का ध्यान भी रानी दुर्गावती लोक के काम की तरफ खास नहीं गया। इसलिए परियोजना अभी तक आगे नहीं बढ़ पाई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जबलपुर में करीब 100 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले वीरांगना रानी दुर्गावती स्मारक और उद्यान का भूमिपूजन किया था। यह पूरा प्रोजेक्ट करीब 21 एकड़ जमीन पर बनाया जाना प्रस्तावित है।
योजना के मुताबिक यहां रानी दुर्गावती की 52 फुट ऊंची कांस्य (ब्रॉन्ज) की प्रतिमा भी लगाई जानी है। इसके साथ ही एक भव्य संग्रहालय बनाने का भी प्रस्ताव है। इसमें रानी दुर्गावती की वीरता की कहानियों के साथ गोंडवाना साम्राज्य के इतिहास को भी विस्तार से दिखाया जाएगा।
जबलपुर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीरांगना रानी दुर्गावती की याद में, एक भव्य रानी दुर्गावती लोक और स्मारक बनाने की घोषणा की थी। यह स्मारक मदन महल के पास नरई नाला इलाके में तैयार किया जाएगा।
इस प्रोजेक्ट में रानी दुर्गावती से जुड़ा म्यूजियम बनाया जाएगा। साथ ही जल संरक्षण पार्क भी विकसित किया जाएगा ताकि लोगों को इतिहास के साथ-साथ पानी बचाने का संदेश भी मिल सके। सरकार ने इस योजना की शुरुआत के लिए 10 करोड़ रुपए की शुरुआती राशि को मंजूरी दी है।
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जिला प्रशासन का कहना है कि पिछले महीने ही अतिक्रमण करने वालों को नोटिस दे दिया गया था। यह मामला कोर्ट की जानकारी में भी है। दरअसल जबलपुर पश्चिम विधानसभा के इस इलाके से अतिक्रमण हटाने की कोशिश पहले भी की गई थी। उस समय के विधायक ने इसका विरोध कर दिया था। इसके बाद मामला कोर्ट तक पहुंच गया और कोर्ट ने भी इस पर संज्ञान लिया था।
अब प्रशासन ने फिर से नोटिस जारी किया है। अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों को यहां से हटाया जाएगा, उन्हें दूसरी जगह बसाया जाएगा। जहां उन्हें शिफ्ट करना है वहां पहले जरूरी सुविधाएं तैयार की जाएंगी। जैसे ही वहां मूलभूत सुविधाएं बन जाएंगी लोगों को वहां शिफ्ट कर दिया जाएगा।
प्रशासन के मुताबिक पहले यहां करीब दो हजार परिवार रहते थे। अब यह संख्या घटकर 655 परिवार रह गई है। अधिकारियों का यह भी कहना है कि यह पूरा इलाका ग्रीन बेल्ट में आता है।
सरकार इस मामले को साल 2018 से लगातार टालती आ रही है। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद अब जाकर नगर निगम प्रशासन जागा है। यहां ऊपर की तरफ एक उद्यान बनाने की योजना तैयार की जा रही है। हालांकि मामला सिर्फ 655 कब्जों का नहीं है। सच यह भी है कि इस इलाके में सरकार ने खुद भी कई जगहों पर कब्जा कर रखा है।
मदन महल की पहाड़ियों में ग्रीन बेल्ट की सीमा कम करके ही बिजली विभाग का शक्ति भवन बनाया गया था। इसके अलावा आईटी पार्क और नयागांव कॉलोनी भी मदन महल की पहाड़ी काटकर ही बसाई गई है। अब प्रशासन छोटे-छोटे कब्जाधारियों को हटाने की कार्रवाई तो कर रहा है, लेकिन बड़े कब्जों या सरकारी कब्जों को लेकर अब तक कोई ठोस प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।
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असल वजह भी चौंकाने वाली है। जिस जमीन पर प्रधानमंत्री से भूमिपूजन कराया गया था, वह पहले से ही अतिक्रमण की चपेट में थी। यही कारण है कि अब तक इस प्रोजेक्ट की करीब 21 से 24 एकड़ जमीन पर कब्जा बना हुआ है। जानकारी के अनुसार इस जमीन पर फिलहाल करीब 655 परिवार रह रहे हैं।
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अतिक्रमण हटाने की पूरी तैयारी हो चुकी- कलेक्टर राघवेंद्र सिंह
धर्मेंद्र लोधी उस कमेटी के सदस्य भी हैं, जो रानी दुर्गावती लोक के निर्माण के लिए बनाई गई है। इस कमेटी के अध्यक्ष मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हैं।
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रानी दुर्गावती लोक की तरफ खास ध्यान नहीं
रानी दुर्गावती की 52 फुट ऊंची प्रतिमा
योजना के मुताबिक यहां रानी दुर्गावती की 52 फुट ऊंची कांस्य (ब्रॉन्ज) की प्रतिमा भी लगाई जानी है। इसके साथ ही एक भव्य संग्रहालय बनाने का भी प्रस्ताव है। इसमें रानी दुर्गावती की वीरता की कहानियों के साथ गोंडवाना साम्राज्य के इतिहास को भी विस्तार से दिखाया जाएगा।
जबलपुर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीरांगना रानी दुर्गावती की याद में, एक भव्य रानी दुर्गावती लोक और स्मारक बनाने की घोषणा की थी। यह स्मारक मदन महल के पास नरई नाला इलाके में तैयार किया जाएगा।
इस प्रोजेक्ट में रानी दुर्गावती से जुड़ा म्यूजियम बनाया जाएगा। साथ ही जल संरक्षण पार्क भी विकसित किया जाएगा ताकि लोगों को इतिहास के साथ-साथ पानी बचाने का संदेश भी मिल सके। सरकार ने इस योजना की शुरुआत के लिए 10 करोड़ रुपए की शुरुआती राशि को मंजूरी दी है।
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पिछले माह भी दिया था नोटिस
अब प्रशासन ने फिर से नोटिस जारी किया है। अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों को यहां से हटाया जाएगा, उन्हें दूसरी जगह बसाया जाएगा। जहां उन्हें शिफ्ट करना है वहां पहले जरूरी सुविधाएं तैयार की जाएंगी। जैसे ही वहां मूलभूत सुविधाएं बन जाएंगी लोगों को वहां शिफ्ट कर दिया जाएगा।
प्रशासन के मुताबिक पहले यहां करीब दो हजार परिवार रहते थे। अब यह संख्या घटकर 655 परिवार रह गई है। अधिकारियों का यह भी कहना है कि यह पूरा इलाका ग्रीन बेल्ट में आता है।
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मदन महल की पहाड़ियों में ग्रीन बेल्ट की सीमा कम करके ही बिजली विभाग का शक्ति भवन बनाया गया था। इसके अलावा आईटी पार्क और नयागांव कॉलोनी भी मदन महल की पहाड़ी काटकर ही बसाई गई है। अब प्रशासन छोटे-छोटे कब्जाधारियों को हटाने की कार्रवाई तो कर रहा है, लेकिन बड़े कब्जों या सरकारी कब्जों को लेकर अब तक कोई ठोस प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।
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