दतिया में मिला रानी लक्ष्मीबाई का 175 साल पुराना चित्र, जानें ये क्यों है खास

Aman Vaishnav | Jul 26, 2026, 11:10 IST
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रानी लक्ष्मीबाई का 175 साल पुराना चित्र
रानी लक्ष्मीबाई का 175 साल पुराना चित्र

दतिया के संग्रहालय में रानी लक्ष्मीबाई की जीवित अवस्था का पहला रंगीन चित्र मिला है। 1849-50 के आसपास की इस पेंटिंग में रानी घोड़े पर सवार दिख रही हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • दतिया संग्रहालय में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का एक दुर्लभ चित्र मिला है।
  • विशेषज्ञ इसे रानी की जीवित अवस्था का पहला चित्र मान रहे हैं।
  • यह चित्र ज्ञान भारतम मिशन के तहत पांडुलिपियों के संरक्षण के दौरान मिला है।
  • चित्र को वर्ष 1849-50 के आसपास का माना जा रहा है।
  • पुरातत्व विभाग अब इस दुर्लभ पेंटिंग को संरक्षित करेगा।

रानी लक्ष्मीबाई का दुर्लभ चित्र

मध्य प्रदेश के दतिया संग्रहालय में एक ऐसी पेंटिंग मिली है, जिसने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से जुड़े इतिहास को फिर से चर्चा में ला दिया है।

करीब दो फीट लंबे और पौने दो फीट चौड़े इस चित्र को विशेषज्ञ रानी लक्ष्मीबाई की जीवित अवस्था का पहला चित्र मान रहे हैं। इसमें रानी घोड़े पर सवार दिखाई दे रही हैं।

बता दें कि यह चित्र ज्ञान भारतम मिशन के तहत पांडुलिपियों के संग्रहण और संरक्षण के दौरान सामने आया है।

क्यों खास माना जा रहा है यह चित्र

इतिहासकारों के मुताबिक यह चित्र वर्ष 1849-50 के आसपास का हो सकता है। यह समय रानी लक्ष्मीबाई के पति महाराजा गंगाधर राव के वर्ष 1853 में निधन से पहले का था।

माना जा रहा है कि इस पेंटिंग में रानी कुलदेवी की पूजा के लिए जाते समय घोड़े पर सवार दिखाई गई हैं।

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इतिहासकार ने क्या बताया?

मध्य प्रदेश राज्य पुरातत्व संग्रहालय एवं अभिलेखागार के इतिहासकार डॉ. मो. वसीम खान के अनुसार, रानी लक्ष्मीबाई बहुत सीमित लोगों से ही मिलती थीं। इसी वजह से उनके चित्र बहुत कम मिलते हैं।

वसीम खान ने बताया कि उस समय झांसी राजघराने में चित्रकारों को अच्छा संरक्षण मिला हुआ था। राजपरिवार के मुख्य चित्रकार सुखलाल थे।

सुखलाल ने राजपरिवार और आम जीवन से जुड़े कई चित्र बनाए थे। इस आधार पर संभावना जताई जा रही है कि यह चित्र भी सुखलाल ने ही बनाया होगा।

चित्र में सोने के कणों का इस्तेमाल

बता दें कि इस रंगीन पेंटिंग में सोने के कणों का भी इस्तेमाल किया गया था। हालांकि समय के साथ इसका कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। इसके बावजूद चित्र की ऐतिहासिक अहमियत कम नहीं मानी जा रही है।

दतिया कैसे पहुंचा यह चित्र?

18 जून 1858 को अंग्रेजों से लड़ते हुए रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुई थीं। इसके बाद पास की दतिया रियासत के कर्मचारियों ने उनके महल से यह चित्र लाकर सुरक्षित रखा था।

बाद में रियासतों के विलय के बाद यह पेंटिंग पुरातत्व विभाग के संग्रहालय में रख दी गई थी, जहां वर्षों तक यह संग्रहालय के एक कोने में रखी रही।

पहले केवल एक ही चित्र उपलब्ध था

डॉ. वसीम खान के अनुसार अब तक रानी लक्ष्मीबाई का केवल एक ब्लैक एंड व्हाइट चित्र ही पुस्तकों और इंटरनेट पर मिलता था। वह चित्र रानी के वीरगति प्राप्त करने के बाद उनके दत्तक पुत्र दामोदर राव ने बनवाया था।

नई मिली पेंटिंग और उस पुराने चित्र में कई समानताएं दिखाई देती हैं। इसी वजह से विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह चित्र भी रानी के बेहद करीबी व्यक्ति ने बनाया होगा।

क्या करेगा पुरातत्व विभाग ?

पुरातत्व विभाग के आयुक्त मदन कुमार नागरगोजे ने बताया कि, ज्ञान भारतम मिशन के तहत दतिया संग्रहालय से यह दुर्लभ चित्र मिला है।

अब इसे सुरक्षित रखने और संरक्षित करने का काम किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पांडुलिपियों के संग्रहण के मामले में मध्य प्रदेश देश में सबसे आगे है।

एक नजर में पूरी जानकारी

जानकारीविवरण
चित्र कहां मिला?दतिया संग्रहालय, मध्य प्रदेश
चित्र किसका है?झांसी की रानी लक्ष्मीबाई
अनुमानित समयवर्ष 1849-50
चित्र में क्या दिखता है?रानी घोड़े पर सवार हैं
चित्र कैसे मिला?ज्ञान भारतम मिशन के तहत संरक्षण कार्य के दौरान
अब क्या होगा?पुरातत्व विभाग चित्र का संरक्षण करेगा

इस खोज का महत्व

  • वीरांगना रानी लक्ष्मीबाईके जीवन से जुड़ी नई ऐतिहासिक जानकारी सामने आई है।
  • विशेषज्ञ इसे रानी की जीवित अवस्था का पहला चित्र मान रहे हैं।
  • इससे झांसी और दतिया रियासत के ऐतिहासिक संबंधों को समझने में मदद मिल सकती है।
  • यह खोज मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर को और मजबूत बनाती है।

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