115 मौतों के बाद भी अधूरा रतनगढ़:  सियासत, एजेंसियां और सिस्टम सबने रोका शक्तिपीठ का विकास

मध्यप्रदेश की रतनगढ़ शक्तिपीठ में 2013 की भगदड़ के बाद भी विकास के काम अधूरे पड़े हैं। 2021 में स्वीकृत 5 करोड़ रुपए के काम तीन एजेंसियों में बंट गए।

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Ravi Awasthi
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News In Short

  • 2013 की भगदड़ में दतिया के रतनगढ़ शक्तिपीठ में 115 श्रद्धालुओं की मौत हुई।
  • 2021 में 5 करोड़ के कामों की स्वीकृति, पर अधिकतर काम अधूरे।
  • तीन अलग-अलग एजेंसियों में बंटा काम बना बड़ी बाधा।
  • शेड, कॉरिडोर और विश्राम गृह आज भी पूरे नहीं।
  • जिम्मेदार अफसरों के बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खाते।

News In Detail

मध्यप्रदेश में दतिया की रतनगढ़ शक्तिपीठ में 2013 की हुई भयावह भगदड़ को एक दशक से ज्यादा समय बीत चुका है। लेकिन 115 जिंदगी खोने के बाद भी व्यवस्थाओं में ठोस सुधार नहीं दिखता। मंदिर का विकास आपसी खींचतान की भेंट चढ़ता चला गया। मंजूर काम सियासत और सिस्टम में उलझकर रह गए। 

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हादसे के बाद भी नहीं टूटी नींद

दतिया जिले के रतनगढ़ देवी मंदिर में 12 साल पहले मची भगदड़ ने देशभर का ध्यान खींचा था। अफसोस यह है कि  हादसे की भयावहता भी प्रशासनिक उदासीनता को नहीं तोड़ सकी। मंदिर परिसर में सुरक्षा, आवागमन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़े अधिकांश काम शुरू नहीं हो पाए या अधूरे पड़े हैं।

तीन महीने पहले दतिया के मां पीतांबरा मंदिर में हादसा हुआ। निर्माण के दौरान 8 खंभे गिर गए थे। जिला प्रशासन ने त्वरित निगरानी समिति बनाई। यह समिति मंदिर ट्रस्ट के सामानांतर काम करेगी।

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115 लोगों ने गंवाई थी जान

2013 में कार्तिक मेले के दौरान हुई भगदड़ में 115 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी। चुनावी माहौल के दौरान हुए इस हादसे ने तत्कालीन सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। कलेक्टर-एसपी समेत 4 अधिकारियों के निलंबन और न्यायिक जांच के बाद भी रिपोर्ट की सिफारिशें जमीन पर नहीं उतर सकीं।

5 करोड़ की रकम मंजूर, काम अधूरे

चौथी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने रतनगढ़ परिसर के विकास के लिए 5 करोड़ रुपए मंजूर किए। यह राशि सिंगरौली जिला खनिज मद से दिलाई गई। मंदिर परिसर में बड़ा शेड, चौड़ी सीढ़ियां, कॉरिडोर, विश्राम गृह, पुलिस चौकी समेत अन्य काम प्रस्तावित थे।

निर्माण एजेंसी तय करने को लेकर रस्साकशी

निर्माण कार्यों के प्रोजेक्ट हासिल करने को लेकर प्रदेश की निर्माण एजेंसियों के बीच कड़ी स्पर्धा नई बात नहीं है। रतनगढ़ मंदिर के मामले में भी यही हुआ। शुरुआती दौर में यह काम संस्कृति विभाग को सौंपा गया। इसका निर्माण कार्यों से दूर-दूर तक नाता नहीं रहा। पिछले सत्र में स्थानीय विधायक ने इस मामले पर चिंता जताई। तब बताया गया कि यह काम अब पीडब्ल्यूडी को सौंपा गया है, लेकिन एक अन्य निर्माण एजेंसी मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड की इसमें एंट्री हुई। 

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तीन एजेंसियों में बंटा मंदिर का काम

आलम यह ​है कि मंदिर में सिर्फ 5 करोड़ का काम तीन एजेंसियों के बीच बांटा गया है। मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड वहां विश्राम गृह तैयार करा रहा है। इसका 40 फीसदी से अधिक काम अभी बाकी है।

डेढ़ करोड़ लागत से बनाए जाने वाले शेड्स के लिए लोक निर्माण विभाग ने हाल ही में निविदाएं मांगी हैं। वहीं, कॉरिडोर निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग के ही पाइकू प्रोजेक्ट को बजट आवंटन की दरकार है। इसके बाद ही वह टेंडर मांगेगा। 

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जिम्मेदारों के अलग-अलग बयान

  • इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के बयान अलग-अलग हैं। एसडीएम अशोक अवस्थी कहते हैं, काम शुरू हो गया है।अलग-अलग एजेंसियों के पास काम है। सभी अपने-अपने स्तर से इसे पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं। 
  • वहीं, लोक निर्माण विभाग दतिया के एसडीओ कहते हैं, हमारा काम शेड बनाने का है। वह चल रहा है। कॉरिडोर निर्माण के बारे में वह कुछ नहीं कह सकते। 
  • इसी तरह लोक निर्माण विभाग के पाइकू प्रोजेक्ट के क्षेत्र प्रमुख राजेंद्र त्रिपाठी का कहना है, अभी बजट आया है। जल्द निविदा बुलाएंगे। 
  • मंदिर के प्रमुख महंत राजेश कटारे इस मामले में कुछ भी बोलने से बचे। महंत ने कहा, अफसरों से ही पूछो,वो ही ज्यादा बता सकेंगे। मेरा बोलना ठीक नहीं। 

TheSootr Knowledge

रतनगढ़ देवी मंदिर मध्य प्रदेश की प्रमुख सिद्ध ​शक्तिपीठों में एक है। मंदिर दतिया जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर दूर सिंध नदी किनारे घने जंगल के बीच है। यहां, कार्तिक मास में लगने वाले मेले में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। साल 2013 में ऐसे ही एक मेले में भगदड़ मची। इसमें 115 लोग कुचले जाने से मारे गए। कई घायल हुए है।

शिवराज सिंह चौहान दतिया मां पीतांबरा मंदिर लोक निर्माण विभाग मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड
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