जेल जाने के डर से सरपंच-सचिवों ने लौटाए 91 लाख, मचा हड़कंप, जानें मामला

Anjali Dwivedi | Jan 21, 2026, 13:52 IST
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रीवा में भ्रष्ट सरपंच सचिवों को लेकर जिला पंचायत प्रशासन सख्त हो गया है। दरअसल सरपंच सचिव सरकारी खजाने से करीब 91 लाख की राशि निगल रहे थे। इसे लेकर जिला पंचायत सीईओ ने इन सभी भ्र्ष्ट सरपंच-सचिवों के खिलाफ जेल वारंट जारी कर दिया है।

News In Short

  • 91 लाख की वसूली: रीवा प्रशासन ने सरपंचों, सचिवों और इंजीनियरों से 91.08 लाख रुपए सरकारी खजाने में वापस कराए हैं।
  • जेल की चेतावनी: जेल भेजने की धमकी और वारंट जारी होने के बाद कई वर्षों से लंबित राशि जमा हुई।
  • विशेष अभियान: मार्च 2025 से दिसंबर 2025 के बीच विशेष समीक्षा अभियान चलाकर कार्रवाई की गई।
  • वसूली का उपयोग: वसूली गई राशि का इस्तेमाल पंचायतों के अधूरे निर्माण कार्यों को पूरा करने में किया जाएगा।
  • सीईओ का संदेश: सीईओ ने कहा कि अब विकास कार्यों में देरी या लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

News In Detail

Rewa News: सरकारी पैसे का हिसाब न देना अब मध्य प्रदेश के रीवा जिले में भारी पड़ने लगा है। जिला पंचायत प्रशासन की जेल वारंट वाली सख्ती के बाद भ्रष्टाचार और लापरवाही करने वाले सरपंच-सचिवों में हड़कंप मच गया है।



बता दें सरकारी खजाने में अब तक कुल 91 लाख 8 हजार 865 रुपए जमा कराए जा चुके हैं। अगर ऐसी ही कार्रवाई हर जिले में हो तो शायद प्रदेश की तस्वीर ही बदल जाएगी। आइए जानें पूरा मामला क्या है....



क्या है मामला

रीवा में जिला पंचायत प्रशासन की सख्ती से भ्रष्ट सरपंच और सचिवों में हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने मार्च से दिसंबर 2025 तक एक जांच की, जिसका मकसद भ्रष्टाचार को उजागर करना था।



जांच में ये पता चला कि जिन पंचायतों ने विकास कार्यों के नाम पर पैसे निकाले थे, उनमें से बहुत कम काम हुआ था। करीब एक करोड़ की घपलेबाजी सामने आई।



इसके बाद प्रशासन ने जेल वारंट जारी किए, और कहा कि जिन्होंने पैसे निकाले हैं और काम पूरा नहीं किया, उन्हें जेल जाना पड़ेगा। ये सुनते ही सभी जिम्मेदारों ने 91.08 लाख रुपए सरकारी खजाने में लौटाए। अब इस वसूली से सालों से रुके हुए ग्रामीण विकास कार्य पूरे किए जाएंगे।



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मार्च से दिसंबर तक चला विशेष चेकिंग अभियान

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मेहताब सिंह गुर्जर ने जिले की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की हालत सुधारने के लिए एक खास अभियान चलाया।



मार्च 2025 से दिसंबर 2025 तक चली इस कड़ी समीक्षा में उन पंचायतों पर ध्यान दिया गया, जहां के निर्माण कार्य सालों से अधूरे पड़े थे। जब रिकॉर्ड चेक किए गए, तो पता चला कि पैसे तो निकाले गए थे, लेकिन काम जमीन पर कहीं नजर नहीं आ रहे थे।



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जब जारी हुए नोटिस और जेल वारंट

प्रशासन ने सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं की, बल्कि सीधे एक्शन मोड में काम किया। जिन सरपंचों और सचिवों ने समय पर राशि खर्च नहीं की थी, उन्हें पहले नोटिस देकर सुनवाई के लिए बुलाया गया। संतोषजनक जवाब न मिलने पर कई मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए जेल वारंट तक जारी कर दिए गए। इसी कड़ी कार्रवाई ने भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों की नींद उड़ा दी।



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वसूली के मामले में रायपुर और सिरमौर सबसे आगे

इस सख्ती का असर यह हुआ कि सरपंच, सचिव के साथ-साथ ग्राम रोजगार सहायक, उपयंत्री और सहायक यंत्री भी चुपचाप पैसा जमा करने पहुंचने लगे। जिले की जनपद पंचायतों से हुई वसूली के आंकड़े हैरान करने वाले हैं। रायपुर कर्चुलियान में सबसे ज्यादा 25.83 लाख और सिरमौर में 21.85 लाख रुपये की वसूली हुई है। अब इस वसूली गई राशि का इस्तेमाल उन अधूरे निर्माण कार्यों को पूरा करने में किया जा रहा है, जो सालों से अटके पड़े थे।



जनपद पंचायतवसूली गई राशि (रुपए में)
रायपुर कर्चुलियान25,83,974
सिरमौर21,85,412
जवा12,67,444
नईगढ़ी9,85,960
त्योंथर7,64,016
गंगेव5,79,839
हनुमना5,41,697
रीवा1,23,495
मऊगंज77,028

अब भ्रष्ट सरपंच सचिव सीधे होगी कार्रवाई

सीईओ मेहताब सिंह गुर्जर ने साफ कहा कि ग्रामीण विकास के लिए जो फंड अलॉट किए गए हैं, उनका सही वक्त पर इस्तेमाल करना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग विकास की राशि दबाकर बैठे हैं, उनके खिलाफ आगे भी ऐसी ही सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब प्रशासन का पूरा ध्यान गांवों में सड़कों, नालियों और सामुदायिक भवनों जैसे कामों को तय समय में पूरा करने पर है।



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