छिपकली के काटने से महिला की मौत, रीवा में परिजनों का दावा, एक्सपर्ट्स हैरान
Sanjay Dhiman | Jul 19, 2026, 22:24 IST
Photograph: (the sootr)
रीवा में एक महिला की मौत के बाद परिजनों ने छिपकली के काटने से जान जाने का दावा किया। एक्सपर्ट्स इससे असहमत हैं, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार जारी है।
रीवा जिले में एक महिला की मौत ने हड़कंप मचा दिया है। परिजनों का दावा है कि छिपकली के काटने से उसकी जान गई। महिला को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। इलाज के दौरान डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
मध्यप्रदेश के रीवा जिले से यह मामला सामने आया है। यहां एक महिला की संदिग्ध हालत में मौत हो गई। परिजन उसे गंभीर हालत में अस्पताल लेकर पहुंचे थे। डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया, लेकिन महिला को बचाया नहीं जा सका।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अस्पताल पहुंची। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मौत की सही वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही साफ होगी। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
यह घटना रीवा के जड़कुड़ गांव की है। यहां रहने वाली 34 साल की फूलकली की मौत हुई। परिजनों के मुताबिक, फूलकली रात का खाना खाकर सो रही थी।
परिजन का कहना है कि सोते समय एक छिपकली बिस्तर पर गिरी। करवट लेते ही फूलकली उसके नीचे आ गई। इसी दौरान छिपकली ने उसे काट लिया।
कुछ घंटों बाद फूलकली की तबीयत बिगड़ने लगी। परिजन उसे तुरंत सिविल अस्पताल ले गए। लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
परिजन भले ही छिपकली के काटने से मौत का दावा कर रहे हों। लेकिन एक्सपर्ट्स की राय इससे अलग है। सामान्य तौर पर घरों में मिलने वाली छिपकलियां जहरीली नहीं होती हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक इनके काटने से जान जाने के मामले बेहद दुर्लभ हैं। छिपकली के काटने से सूजन या दर्द हो सकता है। लेकिन इससे जान जाना लगभग नामुमकिन माना जाता है।
हालांकि अगर छिपकली खाने में गिर जाए तो खतरा बढ़ सकता है। उसका मल-मूत्र भोजन में मिलने से बैक्टीरिया फैल सकता है। इससे गंभीर फूड पॉइज़निंग हो सकती है।
दुनिया में सिर्फ दो तरह की छिपकलियां जहरीली मानी जाती हैं। एक है गिला मॉन्स्टर (Gila Monster – एक जहरीली छिपकली प्रजाति) और दूसरी मेक्सिकन बीडेड लिज़र्ड (Mexican Beaded Lizard – एक अन्य जहरीली प्रजाति)। ये दोनों प्रजातियां भारत में नहीं पाई जातीं।
भारत में पाई जाने वाली ज्यादातर छिपकलियां इंसानों के लिए खतरनाक नहीं होती। ये आमतौर पर कीड़े-मकोड़े खाकर घरों को साफ रखने में मदद करती हैं। इनके काटने की घटनाएं भी बहुत कम होती हैं।
फिर भी सावधानी बरतना जरूरी है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के मामले में। सोते समय मच्छरदानी या साफ-सफाई का ध्यान रखना फायदेमंद हो सकता है। इससे कीड़े-मकोड़ों से जुड़े खतरों को कम किया जा सकता है।
अगर छिपकली काट ले तो हल्का दर्द या सूजन हो सकती है। कभी-कभी एलर्जी जैसी प्रतिक्रिया भी हो सकती है। ऐसे में घाव को साफ पानी और साबुन से धोएं।
काटे हुए स्थान पर एंटीसेप्टिक जरूर लगाएं। अगर सूजन ज्यादा बढ़े या सांस लेने में परेशानी हो, तो सतर्क हो जाएं। चक्कर आना भी एक चेतावनी संकेत हो सकता है।
ऐसे किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें। बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें। सही समय पर इलाज मिलने से बड़ा खतरा टल सकता है।
ग्रामीण इलाकों में ऐसी घटनाएं अक्सर सामने आती हैं। जानकारी और जागरूकता की कमी की वजह से मौत के कारणों को लेकर गलत धारणाएं बन जाती हैं। कई बार सही जानकारी के अभाव में परिजन जल्दी किसी नतीजे पर पहुंच जाते हैं।
डॉक्टर और वैज्ञानिक जांच के बिना किसी नतीजे पर पहुंचना सही नहीं है। हर मौत के पीछे कई मेडिकल कारण हो सकते हैं। इसलिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी है।
फिलहाल मामले की जांच पुलिस के हाथ में है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह पता चलेगी। तब तक इस दावे को पूरी तरह सच मानना जल्दबाजी होगी।
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि छोटी सी लगने वाली बात भी जानलेवा हो सकती है। लेकिन हर दावे को वैज्ञानिक तरीके से जांचना जरूरी है। तभी सही तस्वीर सामने आ पाएगी।
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क्या है पूरा मामला
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अस्पताल पहुंची। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मौत की सही वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही साफ होगी। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
छिपकली के काटने से मौत का दावा
परिजन का कहना है कि सोते समय एक छिपकली बिस्तर पर गिरी। करवट लेते ही फूलकली उसके नीचे आ गई। इसी दौरान छिपकली ने उसे काट लिया।
कुछ घंटों बाद फूलकली की तबीयत बिगड़ने लगी। परिजन उसे तुरंत सिविल अस्पताल ले गए। लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
एक्सपर्ट्स की राय
विशेषज्ञों के मुताबिक इनके काटने से जान जाने के मामले बेहद दुर्लभ हैं। छिपकली के काटने से सूजन या दर्द हो सकता है। लेकिन इससे जान जाना लगभग नामुमकिन माना जाता है।
हालांकि अगर छिपकली खाने में गिर जाए तो खतरा बढ़ सकता है। उसका मल-मूत्र भोजन में मिलने से बैक्टीरिया फैल सकता है। इससे गंभीर फूड पॉइज़निंग हो सकती है।
दुनिया में सिर्फ दो तरह की छिपकलियां जहरीली मानी जाती हैं। एक है गिला मॉन्स्टर (Gila Monster – एक जहरीली छिपकली प्रजाति) और दूसरी मेक्सिकन बीडेड लिज़र्ड (Mexican Beaded Lizard – एक अन्य जहरीली प्रजाति)। ये दोनों प्रजातियां भारत में नहीं पाई जातीं।
भारत में छिपकलियों का खतरा
फिर भी सावधानी बरतना जरूरी है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के मामले में। सोते समय मच्छरदानी या साफ-सफाई का ध्यान रखना फायदेमंद हो सकता है। इससे कीड़े-मकोड़ों से जुड़े खतरों को कम किया जा सकता है।
छिपकली काटे तो क्या करें
काटे हुए स्थान पर एंटीसेप्टिक जरूर लगाएं। अगर सूजन ज्यादा बढ़े या सांस लेने में परेशानी हो, तो सतर्क हो जाएं। चक्कर आना भी एक चेतावनी संकेत हो सकता है।
ऐसे किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें। बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें। सही समय पर इलाज मिलने से बड़ा खतरा टल सकता है।
ऐसी अफवाहें क्यों फैलती हैं
डॉक्टर और वैज्ञानिक जांच के बिना किसी नतीजे पर पहुंचना सही नहीं है। हर मौत के पीछे कई मेडिकल कारण हो सकते हैं। इसलिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी है।
आगे क्या होगा
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि छोटी सी लगने वाली बात भी जानलेवा हो सकती है। लेकिन हर दावे को वैज्ञानिक तरीके से जांचना जरूरी है। तभी सही तस्वीर सामने आ पाएगी।
यह खबरें भी पढ़ें...
5 अगस्त से एमपी को नई ट्रेन की सौगात, आसान होगा प्रयागराज-बेंगलुरु तक का सफर
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आरजीपीवी के छात्रों का आरोप- कैंटीन में स्टूडेंट को परोस दी छिपकली, कर्मचारी बोला- शिमला मिर्च
कोरबा में सो रहे बच्चे के मुंह में घुसी छिपकली, मासूम की मौत, मंजर देख चीख पड़ी मां, हृदय विदारक घटना से पसरा मातम
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