एमपी के रीवा में 5 साल से क्यों नहीं चल रहे सिक्के, जानें पूरी सच्चाई
Pawan Modiya | May 03, 2026, 21:06 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश के रीवा शहर में 5 साल से 1 और 2 रुपए के सिक्के नहीं चल रहे। दुकानदार खुलेआम लेने से मना कर देते हैं। आम जनता सबसे ज्यादा परेशान है। जबकि RBI के नियमों में यह अपराध है।
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश के रीवा में पांच साल से सिक्के बाजार में नहीं चल रहे।
- दुकानदारों ने मिलकर 1 और 2 रुपए के सिक्के न लेने का अघोषित फैसला किया।
- इससे गरीब और मध्यम वर्ग के लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं।
- आरबीआई के नियमों के तहत सिक्का लेने से मना करना सीधा अपराध है।
- डाकघर में सिक्के जमा कर नोट लिए जा सकते हैं, यह एकमात्र राहत है।
जेब में सिक्का है, पर काम का नहीं
यह समस्या अचानक नहीं आई। धीरे-धीरे व्यापारियों के बीच एक अघोषित सहमति बनती गई कि छोटे सिक्के नहीं लेंगे। और देखते ही देखते पूरे बाजार में यह चलन पक्का हो गया। अब हालत यह है कि शहर के आम नागरिक को 1 रुपए की माचिस या 2 रुपए की चॉकलेट के लिए भी 5 या 10 रुपए खर्च करने पड़ते हैं।
गरीब की जेब पर सबसे भारी मार
सबसे ज्यादा मुसीबत उन लोगों की है जो दिहाड़ी मजदूर हैं या छोटे काम से गुजारा करते हैं। उनके लिए यह 3 या 4 रुपए का फर्क रोज पड़ता है। महीने भर में यह नुकसान सैकड़ों रुपए तक पहुंच जाता है। जो परिवार पहले से तंगहाल हैं, उनके लिए यह बोझ और भारी है।
व्यापारियों के पास सिक्कों का अंबार
यानी दुकानदार खुद भी इस जाल में फंसे हैं। उनकी मजबूरी समझ में आती है, लेकिन कानून की नजर में यह सफाई पर्याप्त नहीं है। सिक्के न लेना चाहे मजबूरी में हो या जानबूझकर, दोनों ही स्थितियों में यह वैधानिक अपराध की श्रेणी में आता है।
क्या कहता है आरबीआई का कानून?
निजी बैंक के मैनेजर राजेश व्यास के अनुसार जो व्यक्ति आरबीआई द्वारा जारी किसी भी सिक्के को लेने से इनकार करता है, वह जाने-अनजाने में एक अपराध कर रहा है। ऐसे दुकानदार के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जा सकती है। भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 489A से 489E के तहत दोषी को आर्थिक जुर्माना, कारावास या दोनों सजाएं एक साथ भी मिल सकती हैं।
बैंक भी नहीं निभा रहे जिम्मेदारी
लेकिन कानून यहां भी स्पष्ट है। बैंक सिक्के जमा करने से मना नहीं कर सकते। अगर कोई बैंक ऐसा करे तो उसकी शिकायत सीधे आरबीआई को की जा सकती है। आरबीआई के पास बैंकों पर कार्रवाई का पूरा अधिकार है।
डाकघर है सबसे आसान रास्ता
हालांकि यह समाधान पूरी तरह व्यावहारिक नहीं है। हर रोज डाकघर जाना संभव नहीं है। और जिस शहर में यह समस्या पांच साल से चल रही है, वहां एक डाकघर पूरे बाजार की जरूरत कैसे पूरी करेगा?
सिर्फ रीवा नहीं, यहां भी बड़ी समस्या है
यह एक ऐसा चक्र है जो एक बार शुरू होने के बाद खुद ही आगे बढ़ता जाता है। और इसे तोड़ने के लिए प्रशासन, बैंकिंग तंत्र और जन-जागरूकता तीनों को एकसाथ काम करना होगा।
प्रशासन को जागना होगा
साथ ही जागरूकता अभियान भी जरूरी है। आम नागरिकों को पता होना चाहिए कि सिक्का न लेने वाले दुकानदार के खिलाफ वे शिकायत कर सकते हैं। जब तक जनता अपना अधिकार नहीं जानेगी, यह अवैध चलन यूं ही जारी रहेगा। पांच साल एक लंबा वक्त है। इतने समय में यह समस्या अपनी जड़ें जमा चुकी है। अब इसे उखाड़ने के लिए ठोस कार्रवाई ही एकमात्र रास्ता है।
यह खबर क्यों जरूरी है?
3 जरूरी FAQ
उत्तर: नहीं, सरकारी और कानूनी तौर पर ये सिक्के पूरी तरह वैध हैं और चलन में हैं। लेकिन रीवा के बाजार में व्यापारियों ने आपस में एक अघोषित समझौते के तहत इन्हें लेना बंद कर दिया है। यह व्यवस्था पिछले पांच साल से चल रही है। आरबीआई के नियमों के तहत यह पूरी तरह गैरकानूनी है। सिक्के वैध मुद्रा हैं और कोई भी इन्हें लेने से मना नहीं कर सकता।
प्रश्न 2: अगर दुकानदार सिक्के न ले तो आम नागरिक क्या करे?
उत्तर: अगर कोई दुकानदार आरबीआई द्वारा जारी सिक्का लेने से मना करे तो नागरिक सीधे स्थानीय पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा आरबीआई की शिकायत प्रणाली में ऑनलाइन या लिखित शिकायत भी दे सकते हैं। अगर किसी के पास सिक्के जमा हो गए हैं और कोई नहीं ले रहा तो नजदीकी डाकघर में जाकर सिक्के जमा कराए जा सकते हैं और उनके बदले नोट लिए जा सकते हैं।
प्रश्न 3: सिक्के न लेने पर दुकानदार को क्या सजा हो सकती है?
उत्तर: भारतीय दंड संहिता की धारा 489A से 489E और भारतीय मुद्रा अधिनियम के तहत सिक्के लेने से मना करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। दोषी पाए जाने पर न्यायालय आर्थिक जुर्माना, कारावास या दोनों एक साथ सजा दे सकता है। सिक्का अधिनियम 2011 की धारा 6(1) के अनुसार 1000 रुपए तक के लेनदेन में सिक्के पूरी तरह वैध हैं और इन्हें अस्वीकार करने का किसी को कोई अधिकार नहीं है।
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