व्यापमं घोटाले के आरोपी जगदीश सगर की ED से ही 15 करोड़ की चालबाजी
INDORE. साल 2012-13 के दौरान हुए पीएमटी व्यापमं घोटाले के मुख्य आरोपी डॉ. जगदीश सगर ईडी में भी आरोपी है। उसके खिलाफ ईडी में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज है।
ईडी ने इस मामले में सगर की 2015-16 के दौरान संपत्ति अटैच की थी। इसकी तब कीमत तीन करोड़ 16 लाख आंकी गई थी।
इसमें जमीन, प्लॉट के साथ ही तीन किलो 100 ग्राम सोना भी था। इसे छुड़ाने के लिए सगर ने नई चालबाजी की, जो अब कोर्ट में जाकर फेल हो गई।
सगर ने यह दिखाई चालाकी
सगर ने ईडी से अपनी संपत्ति छुड़ाने के लिए हाईकोर्ट इंदौर में केस लगाया है। इसमें पुराने केस का उदाहरण देकर कहा कि ईडी ने जो संपत्ति अटैच की है, उसकी कीमत तीन करोड़ 16 लाख आंकी गई थी।
वह इस कीमत के बराबर एफडी देने के लिए तैयार है। यह एफडी रखकर उनकी संपत्ति को अटैचमेंट से मुक्त कर दिया जाए।
सोना पहले जो 88 लाख का वो अब 5 करोड़ का
चालाकी इसलिए क्योंकि जब ईडी ने सगर का तीन किलो 100 ग्राम सोना जब्त किया था तब वह मात्र 28.47 लाख रुपए प्रति किलो (28470 रुपये प्रति तोला) के भाव पर था।
इसकी उस समय कीमत 88 लाख रुपए करीब थी। आज सोना 1.68 करोड़ रुपए प्रति किलो (1 लाख 68 हजार प्रति तोला) है।
आज की कीमत से इस सोना करीब 5 करोड़ रुपए का होता है। यानी सगर 88 लाख की एफडी से 5 करोड़ का सोना मुक्त कराना चाहता था।
इसी तरह संपत्ति भी 15 करोड़ से ज्यादा कीमत की
सगर के नाम पर 18 संपत्तियां, सगर की पत्नी सुनीता के नाम पर दो और सगर व पत्नी के नाम पर पांच संपत्तियां हैं।
इसमें भिंड में कई हेक्टेयर जमीन होने के साथ ही स्कीम 94 सेक्टर ए इंदौर पॉश एरिया में करीब चार प्लॉट हैं।
इसकी कीमत ही आज 8 करोड़ से ज्यादा की है। वहीं अन्य संपत्तियों की कीमत मिलाकर कुल 15 करोड़ से ज्यादा की अचल संपत्ति होती है।
संपत्ति की लिस्ट
20 करोड़ की संपत्ति छुड़ाने की कवायद
इस तरह सगर (व्यापमं घोटाले का आरोपी जगदीश सगर) ने केवल तीन करोड़ 16 लाख की एफडी जमा कराने के नाम पर 20 करोड़ की संपत्ति ईडी से मुक्त कराने की चालबाजी की थी। इसमें 15 करोड़ की अचल संपत्ति और पांच करोड़ कीमत का सोना है। यह सभी ईडी के अटैचमेंट में हैं।
हाईकोर्ट में ऐसे खुल गई पोल
इस मामले में एमपी हाईकोर्ट (Indore News) में जब सगर और उनकी पत्नी की याचिका पर सुनवाई हुई तो ईडी ने पोल खोल दी। ईडी ने बता दिया कि इस मामले में हाईकोर्ट को अंधेरे में रखा गया है।
यह केस पहले ही ट्रिब्यूनल में चल रहा है, ऐसे में अन्य जगह याचिका नहीं हो सकती है। इस पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता सगर दंपत्ति को फटकार लगाई, जिसके बाद उन्होंने याचिका वापस ले ली।
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