तीन दिन, फिर वही दावे: भोपाल में कांग्रेस का मंथन या आपसी कलह का नया अध्याय?

मध्य प्रदेश कांग्रेस फिर से तीन दिन के मंथन के लिए भोपाल में जुट रही है। सवाल यह है कि क्या ये बैठकें पार्टी को मजबूत करेंगी या फिर पुराने विवाद और गुटबाजी के सिवा कुछ नहीं मिलेगा?

author-image
Ramanand Tiwari
New Update
MP congress meeting

BHOPAL. मध्यप्रदेश कांग्रेस एक बार फिर तीन दिन के मंथन के नाम पर भोपाल में जुटने जा रही है। सात से नौ फरवरी तक होने वाली ये बैठकें ऐसे वक्त में रखी गई हैं। जब पार्टी आपसी गुटबाजी, संगठनात्मक भ्रम और फैसलों की बार-बार पलटी से जूझ रही है। सवाल है, क्या ये बैठकें संगठन को मजबूत करेंगी? या फिर पहले की तरह फाइलों, फरमानों और फोटो सेशन तक सीमित रह जाएंगी?

क्यों उठ रहे हैं सवाल? 

इससे पहले कई बैठकें हो चुकी हैं। नतीजे मैदान में नजर नहीं आए। AICC ने जिला कार्यकारिणी को लेकर सख्त फरमान दिया। पहले समितियां रद्द की गईं, फिर बहाल कर दी गईं। प्रवक्ताओं को हटाया गया, फिर चुप्पी रही। गुटबाजी और खींचतान जस की तस बनी रही।

कांग्रेस के पूर्व पार्षद अनवर कादरी उर्फ डकैत की जमानत होते ही मंदिर में उसके नाम से धमकी

छोटी कार्यकारिणी, बड़ा विवाद

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने निर्देश दिया था कि जिला कार्यकारिणी कम लोगों की होगी। ताकि जवाबदेही तय की जा सके। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कहीं पुरानी टीम भंग नहीं हुई। कहीं नई टीम केवल कागजों में बनी। कई जिलों में एक ही पद के कई दावेदार खड़े हो गए। इस फरमान ने संगठन सुधारने के बजाय नए विवादों को जन्म दिया।

समिति पहले कैंसिल, फिर बहाल

हाल के महीनों में कांग्रेस संगठन का सबसे बड़ा सवाल यही रहा-पहले समितियां रद्द कर दी गईं। कई प्रवक्ताओं को हटा दिया गया फिर अचानक वही समितियां दोबारा बना दी गईं। इस उठापटक ने कार्यकर्ताओं में साफ संदेश दिया। फैसले स्थायी नहीं हैं, सब कुछ अस्थायी है।

नूरा कुश्ती के बाद कांग्रेस को आई अक्ल! टैलेंट हंट को ऑक्सीजन देने बनी 11 सदस्यीय कमेटी

अब फिर भोपाल में मंथन

इन बैठकों की जिम्मेदारी प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी के पास है। तीन दिन में संगठन, चुनावी रणनीति और सरकार को घेरने की बात जरूर होगी। लेकिन पार्टी के भीतर ही यह चर्चा है कि क्या इस बार सिर्फ बातें होंगी या फैसले भी जमीन पर उतरेंगे?

पहला दिन: मतदाता सूची या सियासी बहाना?

सात फरवरी को SIR प्रक्रिया पर मंथन होगा। कांग्रेस स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर चर्चा करेगी। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची में गड़बड़ी हो रही है। नाम जोड़ने-हटाने में पक्षपात किया जा रहा है। सवाल है, क्या कांग्रेस पहले भी इस मुद्दे पर आवाज नहीं उठा चुकी है? क्या इसका कोई ठोस नतीजा निकला?

फर्जी दस्तावेजों से चलता है भोपाल में असलम का बूचड़खाना, कांग्रेस का आरोप

दूसरा दिन: जिला-ब्लॉक अध्यक्षों की परीक्षा,8 फरवरी को संगठन की असली तस्वीर

8 फरवरी को भोपाल संभाग के जिला और ब्लॉक अध्यक्षों की बैठक होगी। मुद्दे वही पुराने होंगे - संगठन की हालत, बूथ स्तर की निष्क्रियता और जिम्मेदारी तय करना। कार्यकर्ताओं का सवाल है, क्या सिर्फ समीक्षा होगी या कार्रवाई भी की जाएगी? यह बैठक संगठन की असली तस्वीर सामने लाएगी।

तीसरा दिन: सरकार घेरने पर बनेगी रणनीति

उज्जैन संभाग की बैठक में किसान, युवा, बेरोजगारी और जनआक्रोश जैसे मुद्दों पर आंदोलन की बात होगी। साथ ही संगठन में फेरबदल और नई टीम पर भी चर्चा हो सकती है। हालांकि, ऐसे ऐलान पहले भी कई बार हो चुके हैं। 9 फरवरी को सरकार घेरने की रणनीति बनाई जाएगी।

एमपी बजट सत्र में तीन मंत्रियों को घेरेगी कांग्रेस, विधायक दल ने दिया स्थगन प्रस्ताव

चौधरी के कार्यक्रम से क्या बदलेगा समीकरण? 

क्या प्रभारी हरीश चौधरी इस तीन दिन के मंथन में गुटबाजी पर सख्त फैसला लेंगे? AICC के फरमान को जमीन पर उतारेंगे? या फिर बैठकें सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाएंगी?

मंथन बहुत, भरोसा कम

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्या निर्णय लेने की नहीं, बल्कि निर्णय निभाने की है। तीन दिन की बैठकें कांग्रेस के लिए मौका भी हैं और परीक्षा भी। अब देखना यह है कि भोपाल से सिर्फ घोषणाएं निकलती हैं या फिर संगठन की दिशा वाकई बदलती है।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी AICC हरीश चौधरी मध्यप्रदेश कांग्रेस भोपाल
Advertisment