यूका कचरा : कैलाश ने मांगी सुरक्षा की गारंटी, शाह बोले- कोर्ट का आदेश
Sandeep Kumar | Jan 01, 2025, 15:38 IST
union carbide toxic pithampur
मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और विजय शाह के बीच यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे को पीथमपुर में नष्ट करने को लेकर मतभेद है। विजयवर्गीय कचरे को लाने से पहले सुरक्षा की गारंटी चाहते हैं, जबकि विजय शाह इसे उच्च न्यायालय के आदेश पर कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश के दो मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और विजय शाह के बीच यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के निस्तारण को लेकर मतभेद सामने आए हैं। एक तरफ जहां विजयवर्गीय ने कचरे को पीथमपुर न लाने का आग्रह किया है, वहीं मंत्री विजय शाह का कहना है कि यह प्रक्रिया उच्च न्यायालय के आदेश के बाद की जा रही है। दोनों पक्षों के बीच चल रही इस विवाद में न्यायालय के आदेश का पालन करने की बात कही जा रही है।
कैलाश विजयवर्गीय ने यह स्पष्ट किया कि वे इंदौर और पीथमपुर के नागरिकों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं होने देंगे। उनका कहना था कि जब तक वे पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हो जाते कि कचरे से कोई खतरा नहीं है, तब तक इस कचरे को इन क्षेत्रों में नहीं लाया जाएगा।
वहीं, मंत्री विजय शाह ने इस प्रक्रिया के बारे में कहा कि यह उच्च न्यायालय के आदेश के तहत हो रही है। वे इसे पूरी तरह से न्यायिक प्रक्रिया मानते हैं और उनका कहना था कि जो भी पक्ष इस पर आपत्ति उठाना चाहता है, वह न्यायालय में जा सकता है।
मंत्री विजय शाह ने यह स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश के पालन में कचरा पीथमपुर भेजा जा रहा है। अगर किसी को इस पर आपत्ति है, तो वे उच्च न्यायालय में अपनी बात रख सकते हैं। यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए की जा रही है।
यूनियन कार्बाइड कारखाना परिसर में 40 वर्षों से दफन जहरीले कचरे का अंतिम निपटान शुरू हुआ है। गैस राहत एवं पुनर्वास विभाग के संचालक स्वतंत्र कुमार सिंह के अनुसार, यह कचरा मिथाइल आइसोसाइनेट गैस रिसाव के बाद का रासायनिक कचरा है, जिसे पीथमपुर में जलाया जाना है। उनका कहना था कि यूका का 40 वर्ष पुराना जहरीला कचरा समाप्त किया जाना मतलब एक काला अध्याय का खत्म होना है। प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश...
प्रश्न : यूनियन कार्बाइड कारखाना परिसर में किस तरह का कचरा था ?
उत्तर : दो-तीन दिसंबर 1984 की रात में हुई मिथाइल आइसोसाइनेट गैस रिसाव के बाद का यह रासायनिक कचरा है। कोर्ट के आदेश तीन दिसंबर 2024 के परिपालन में यह रासायनिक कचरा पीथमपुर में जलाया जाना है।
प्रश्न : कचरा हटने के बाद क्या यह फैक्ट्री जहरीले कचरे से मुक्त हो गई है?
उत्तर : जी हां यह हम मान सकते हैं कि रासायनिक कचरे से कारखाना पूरी तरह मुक्त हो जाएगा। दरअसल 40 वर्ष पुरानी त्रासदी का मामला 20 साल से न्यायालय में चल रहा है। यहां कुल 347 टन कचरा था, जिसमें से 10 टन पहले जलाया जा चुका है और अब बाकी का भी जल्द से जल्द जला दिया जाएगा।
प्रश्न : मिट्टी और भूमिगत जल में जहर और भारी धातुओं का जो असर है, उसे दूर करने की कोई कार्ययोजना बनी है या नहीं?
उत्तर : वर्तमान में उच्च न्यायालय के आदेश कचरे का निष्पादन करने के हैं। नईदुनिया ने जो बिंदु बताए हैं, यदि इस पर न्यायालय कोई आदेश देता है तो भविष्य में कार्रवाई करेंगे। हालांकि विज्ञानियों द्वारा मिट्टी व जल के पूर्व में नमूने लेकर जांच की गई है।
प्रश्न : कचरा जलाने की रिपोर्ट सकारात्मक होने के बाद भी लोग विरोध कर रहे हैं ?
उत्तर : कहीं कोई विरोध नहीं किया जा रहा है। अभी धार, भोपाल के कलेक्टर ने प्रतिवेदन दे दिए हैं। 2015 में जो कचरा जलाया गया था, उसकी रिपोर्ट उपलब्ध है। किसी भी तरह का कोई पर्यावरण नुकसान इससे नहीं हुआ है। स्थानीय नागरिक, किसानों से बातचीत की गई है। हम भरोसा दिला रहे हैं कि कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं होगा।
कचरे के निस्तारण पर मतभेद
यूनियन कार्बाइड के 337 टन जहरीले कचरे के निस्तारण की प्रक्रिया को लेकर मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और विजय शाह के बीच गहरी असहमतियां सामने आईं हैं। विजयवर्गीय का कहना है कि कचरे का निस्तारण तभी किया जाए जब उसे पूरी तरह से सुरक्षित माना जाए। वहीं विजय शाह का कहना है कि कचरा शिफ्टिंग न्यायालय के आदेश के तहत ही की जा रही है।
विजयवर्गीय की स्वास्थ्य संबंधी चिंता
मंत्री विजय शाह का पक्ष
उच्च न्यायालय का आदेश और कचरा शिफ्टिंग
इधर... स्वतंत्र कुमार सिंह का कहना है...
प्रश्न : यूनियन कार्बाइड कारखाना परिसर में किस तरह का कचरा था ?
उत्तर : दो-तीन दिसंबर 1984 की रात में हुई मिथाइल आइसोसाइनेट गैस रिसाव के बाद का यह रासायनिक कचरा है। कोर्ट के आदेश तीन दिसंबर 2024 के परिपालन में यह रासायनिक कचरा पीथमपुर में जलाया जाना है।
प्रश्न : कचरा हटने के बाद क्या यह फैक्ट्री जहरीले कचरे से मुक्त हो गई है?
उत्तर : जी हां यह हम मान सकते हैं कि रासायनिक कचरे से कारखाना पूरी तरह मुक्त हो जाएगा। दरअसल 40 वर्ष पुरानी त्रासदी का मामला 20 साल से न्यायालय में चल रहा है। यहां कुल 347 टन कचरा था, जिसमें से 10 टन पहले जलाया जा चुका है और अब बाकी का भी जल्द से जल्द जला दिया जाएगा।
प्रश्न : मिट्टी और भूमिगत जल में जहर और भारी धातुओं का जो असर है, उसे दूर करने की कोई कार्ययोजना बनी है या नहीं?
उत्तर : वर्तमान में उच्च न्यायालय के आदेश कचरे का निष्पादन करने के हैं। नईदुनिया ने जो बिंदु बताए हैं, यदि इस पर न्यायालय कोई आदेश देता है तो भविष्य में कार्रवाई करेंगे। हालांकि विज्ञानियों द्वारा मिट्टी व जल के पूर्व में नमूने लेकर जांच की गई है।
प्रश्न : कचरा जलाने की रिपोर्ट सकारात्मक होने के बाद भी लोग विरोध कर रहे हैं ?
उत्तर : कहीं कोई विरोध नहीं किया जा रहा है। अभी धार, भोपाल के कलेक्टर ने प्रतिवेदन दे दिए हैं। 2015 में जो कचरा जलाया गया था, उसकी रिपोर्ट उपलब्ध है। किसी भी तरह का कोई पर्यावरण नुकसान इससे नहीं हुआ है। स्थानीय नागरिक, किसानों से बातचीत की गई है। हम भरोसा दिला रहे हैं कि कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं होगा।
thesootr links
- मध्य प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- रोचक वेब स्टोरीज देखने के लिए करें क्लिक
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari