/sootr/media/media_files/2026/01/29/united-spirits-2026-01-29-18-52-18.jpg)
News in Short
- मंत्री ने यूनाइटेड स्प्रिट्स को लीज पर मिली जमीन की खरीद-फरोख्त की जांच कराने की घोषणा की।
- मंत्री की घोषणा के एक महीने बाद भी जांच को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए ।
- यह जमीन एक नहीं, दो बार बिकी। दूसरी बार हर्ष पैकेजिंग से गुरुकृपा को सौदा हुआ।
- भोपाल के गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र में है यह जमीन, इसका एरिया लगभग 3.5 एकड़।
- आयुक्त बोले- मुझे मंत्री की घोषणा के बारे में जानकारी नहीं।
News in Detail
BHOPAL. आम तौर पर मंत्री घोषणाएं तो कर देते हैं, लेकिन अधिकतर मामलों में उन्हें धरातल पर नहीं उतारा जाता है। मध्य प्रदेश ऐसी ही कुछ स्थिति एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग) मंत्री चेतन कश्यप की दिखी है।
पिछले महीने कश्यप ने एक प्रेस कांफ्रेंस में गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र में 3.5 एकड़ जमीन की खरीद-फरोख्त की जांच का ऐलान किया था। यह जमीन देश से भगोड़ा घोषित विजय माल्या से जुड़ी शराब कंपनी शॉ वालेस को 2004 में लीज पर दी गई थी।
2007 में यह लीज निरस्त हुई, लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले लीज बहाली कर यह दो बार बेच दी गई। हैरत की बात है कि मंत्री चेतन कश्यप द्वारा मामले की जांच कराए जाने की घोषणा के महीनेभर बाद भी इस पर अमल नहीं हुआ।
एमपी में 27% OBC आरक्षण: सरकार की लापरवाही पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार
लीज अनुमति जितनी सक्रियता नहीं
सूत्रों के अनुसार, जिस तेजी से जमीन की लीज बहाली और उसके बाद विक्रय की अनुमति दी गई, उसी अनुपात में जांच के मामले में विभागीय मंत्री की सक्रियता नजर नहीं आई।
सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर हुई प्रेस कांफ्रेंस में 'द सूत्र' ने यह मामला उठाया था। उस दौरान मंत्री कश्यप से विजय माल्या से जुड़ी रही कंपनी को मिली रियायतों को लेकर सवाल किए गए थे। मंच से मंत्री ने जांच का भरोसा तो दिया, लेकिन घोषणा के एक माह से अधिक समय बाद भी उनके कार्यालय से कोई आदेश जारी नहीं हुआ।
रिटायर्ड अफसरों का पेंशन खर्च केंद्र से क्लेम करेगा एमपी, ग्रेज्युटी भी मिलेगी
मंत्री की सुस्ती से अफसर बेफिक्र
राज्य मंत्रिमंडल में विधायक चेतन कश्यप की छवि अपेक्षाकृत ईमानदार और संजीदा मंत्री की मानी जाती है। वे विधायक का वेतन तक नहीं लेते, लेकिन विभाग पर कमजोर पकड़ का फायदा अफसर उठा रहे हैं। इसलिए एमएसएमई विभाग में धांधलियों के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं।
पिछले विधानसभा सत्र में बालाघाट औद्योगिक क्षेत्र में भूखंड आवंटन में पक्षपात के आरोप लगे थे। भोपाल के गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र की बेशकीमती जमीन का यह मामला भी उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है, जिसे 'द सूत्र' ने उजागर कर मंत्री के संज्ञान में लाया था।
किसान कल्याण स्वाभिमान पर्व: एमपी में ट्रेक्टर, बुलेट और ई-स्कूटी जीतने का मौका
जमीन सौदेबाजी की टाइमलाइन
- वर्ष 2004 में एमपी सरकार ने गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र के आई-सेक्टर में शॉ वालेस ब्रेवरीज को 1 लाख 44 हजार 200 वर्गफीट जमीन लीज पर दी।
- उत्पादन बंद रहने और शुल्क बकाया होने पर 2007 में लीज निरस्त की गई।
- कंपनी ने अपील की, मामला राजस्व मंडल ग्वालियर पहुंचा।
- 2008 में राजस्व मंडल ने खारिज कर दी याचिका ।
- 2008 से 2022 के बीच 16 आयुक्त बदले, लेकिन किसी ने इस मामले में रुचि नहीं ली।
- विधानसभा चुनाव से ठीक एक माह पहले, 2023 में तत्कालीन आयुक्त पी. नरहरि ने लीज बहाल कर दी।
- 13 दिसंबर 2023 को प्रदेश में नई सरकार बनी।
- 4 जनवरी 2024 को जमीन विक्रय और हर्ष पैकेजिंग भोपाल के पक्ष में लीज हस्तांतरण का आवेदन दिया।
- आवेदन मिलते ही डीटीआईसी ने औपचारिकताएं पूरी करने का पत्र जारी कर दिया।
- यह जमीन एक नहीं, दो बार बिकी। दूसरी बार हर्ष पैकेजिंग से गुरुकृपा को सौदा हुआ।
- पूरी प्रक्रिया के दौरान न मंत्री को जानकारी दी गई, न अन्य जिम्मेदारों को।
- मामला सामने आने पर जांच की घोषणा हुई, लेकिन अमल अब तक नहीं।
लीज की जमीन विक्रय पर उठे सवाल
- लीज बहाली के महज तीन माह में करोड़ों रुपए मूल्य की जमीन के विक्रय ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
- नियमों के अनुसार, उद्योग स्थापित करने की लागत का कम से कम 50 प्रतिशत निवेश होने के बाद ही जमीन का हस्तांतरण संभव है, लेकिन यूनाइटेड स्प्रिटस के मामले में इस नियम की अनदेखी हुई।
- 16 साल से बंद ब्रेवरीज को सिर्फ बकाया राशि जमा कराने की शर्त पर लीज बहाल कर दी गई।
- उद्योग चालू रखने और शर्तों के उल्लंघन पर लीज निरस्तीकरण का उल्लेख बहाली आदेश में नहीं किया गया।
- तीन माह में ही विक्रय और लीज हस्तांतरण विभागीय सांठगांठ की ओर इशारा करता है।
- पैकेजिंग उद्योग के लिए इतनी बड़ी जमीन की आवश्यकता थी या नहीं, इस पहलू की भी अनदेखी की गई।
नजरअंदाज की गई विभागीय सिफारिश
शराब कंपनी को आवंटित भूमि में से करीब 60 हजार वर्गफीट जमीन ट्रीटमेंट प्लांट और पौधरोपण के लिए निर्धारित थी। कंपनी ने यह कार्य नहीं किए। विभागीय रिपोर्ट में उक्त भूखंड वापस लेने और उसे व्यवसायिक उपयोग में लाने की सिफारिश की गई थी, लेकिन लीज बहाली और बाद के हस्तांतरण के दौरान इन सिफारिशों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।
मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से, 18 को पेश होगा बजट
आयुक्त ने जताई अनभिज्ञता
मंत्री कश्यप की घोषणा और जांच संबंधी निर्देश को लेकर विभाग के आयुक्त दिलीप कुमार ने अनभिज्ञता जताई। उन्होंने कहा कि वह इस बारे में जानकारी लेंगे। दूसरी ओर, मंत्री कश्यप के एसडी दिलीप गुप्ता का कहना है कि इस मामले में मंत्री जी ने आयुक्त को मौखिक निर्देश दिए हैं।
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us