प्रदेश मंत्रीमंडल में 8 साल 5 माह बाद विजयवर्गीय की वापसी, मेंदोला फिर चूके, उषा ठाकुर बाहर; सिंधिया कोटे से सिलावट शामिल
BP Shrivastava | Dec 25, 2023, 24:00 IST
प्रदेश मंत्रीमंडल में 8 साल 5 माह बाद विजयवर्गीय की वापसी, मेंदोला फिर चूके, उषा ठाकुर बाहर; सिंधिया कोटे से सिलावट शामिल
मप्र के मंत्रीमंडल का गठन सोमवार को हो गया। इसमें इंदौर जिले से बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और इंदौर एक से विधायक कैलाश विजवयर्गीय की आठ साल पांच माह बाद वापसी हुई है।
संजय गुप्ता, INDORE. मप्र के मंत्रीमंडल का गठन सोमवार को हो गया। इसमें इंदौर जिले से बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और इंदौर एक से विधायक कैलाश विजवयर्गीय की आठ साल पांच माह बाद वापसी हुई है। वह साल 2003 से जुलाई 2015 तक पहले उमा भारती सरकार, फिर बाबूलाल गौर की सरकार और बाद में शिवराज सिंह चौहान की सरकार में मंत्री पद पर रह चुके हैं। इस दौरान उन्होंने पीडब्ल्यूडी से लेकर उद्योग विभाग, आईटी, उद्यानिकी, नगरीय प्रशासन व आवास विभाग जैसे अहम विभागों को संभाला है। विजयवर्गीय इंदौर के पहल सीधे चुने गए महापौर भी रह चुके हैं। फिलहाल यह देखने की बात होगी कि उन्हें उनके कद के हिसाब से क्या विभाग दिया जाता है।
कैलाश आए तो रमेश चूक गए
वहीं इस मंत्रीमंडल के लिए इंदौर विधानसभा दो से चौथी बार विधायक बने और सभी चुनावी राज्यों में सबसे ज्यादा (1.07 लाख वोट) वोट से जीतने वाले रमेश मेंदोला फिर चूक गए हैं। हालांकि यह तय था कि यदि कैलाश विजयवर्गीय मंत्री बनते हैं तो फिर रमेश मेंदोला को नहीं लिया जाएगा और वही हुआ। इससे उनके समर्थकों में खासी निराशा है। उल्लेखनीय है कि उनकी कार्यशैली की पूर्व सीएम चौहान से लेकर नए सीएम डॉ. मोहन यादव ने भी तारीफ की है, डॉ. यादव तो सोमवार को इंदौर में हुए आयोजन में उनकी तारीफ करके गए थे।
तुलसी सिलावट मंत्री पद की शपथ लेने के बाद राज्यपाल मंगुभाई पटेल के साथ।
सिंधिया कोटे से सिलावट फिर मंत्री पद पर
मार्च 2020 में कांग्रेस की सरकार गिराने में ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ अहम भूमिका निभाने वाले तुलसीराम सिलावट फिर मंत्री बने हैं। सिंधिया कोटे से आए मंत्रियों में अहम भूमिका में रहेंगे। सिलावट मार्च 2020 में पहली बार बीजेपी सरकार में मंत्री बने थे, फिर नवंबर 2020 में उचुनाव जीते थे। सिलावट ने पहला चुनाव 1985 में कांग्रेस के टिकट पर सांवेर से ही लड़ा था। तभी से वह चुनाव लड़ रहे हैं।
इंदौर से उषा ठाकुर का पत्ता कट गया, मालिनी दौड़ में पिछड़ी
वहीं इंदौर से अभी शिवराज सिंह सरकार में सिलावट के साथ उषा ठाकुर (महू विधायक) मंत्री पद पर थे। लेकिन नए गठन में ठाकुर का पत्ता कट गया है। वह साल 2003 से इंदौर एक से विधायक रही, फिर 2008 में उनका टिकट कटा, 2013 में वह इंदौर तीन से विधायक बनी तो फिर 2018 व 2023 में महू से विधायक बनी। उधर पूर्व महापौर व इंदौर चार से विधायक मालिनी गौड़ भी एक बार फिर मंत्री बनने से चूक गई है, वह भी मेंदोला की तरह चौथी बार की विधायक है, जो लगातार भारी मतों से जीत रही है। इसी तरह लगातार पांचवी बार विधायक बने इंदौर विधानसभा पांच के विधायक महेंद्र हार्डिया को भी मौका नहीं मिला है। वह एक बार राज्यमंत्री रह चुके हैं। वहीं पहली बार विधायक बने राउ विधायक मधु वर्मा, इंदौर तीन विधायक गोलू शुक्ला को भी मौका नहीं मिला है, वहीं शिवराज के एक और करीबी देपालपुर विधायक मनोज पटेल को भी मौका नहीं मिला है। मनोज पटेल तीसरी बार विधायक बने हैं, वह 2003 से चुनाव लड़ रहे हैं, साल 2003, 2013 और 2023 मे चुनाव जीते और 2008 व 2018 में चुनाव हार गए थे।, मेंदोला फिर चूके, ठाकुर बाहर, सिंधिया कोटे से सिलावट शामिल
कैलाश आए तो रमेश चूक गए
वहीं इस मंत्रीमंडल के लिए इंदौर विधानसभा दो से चौथी बार विधायक बने और सभी चुनावी राज्यों में सबसे ज्यादा (1.07 लाख वोट) वोट से जीतने वाले रमेश मेंदोला फिर चूक गए हैं। हालांकि यह तय था कि यदि कैलाश विजयवर्गीय मंत्री बनते हैं तो फिर रमेश मेंदोला को नहीं लिया जाएगा और वही हुआ। इससे उनके समर्थकों में खासी निराशा है। उल्लेखनीय है कि उनकी कार्यशैली की पूर्व सीएम चौहान से लेकर नए सीएम डॉ. मोहन यादव ने भी तारीफ की है, डॉ. यादव तो सोमवार को इंदौर में हुए आयोजन में उनकी तारीफ करके गए थे।
तुलसी सिलावट मंत्री पद की शपथ लेने के बाद राज्यपाल मंगुभाई पटेल के साथ।
सिंधिया कोटे से सिलावट फिर मंत्री पद पर
मार्च 2020 में कांग्रेस की सरकार गिराने में ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ अहम भूमिका निभाने वाले तुलसीराम सिलावट फिर मंत्री बने हैं। सिंधिया कोटे से आए मंत्रियों में अहम भूमिका में रहेंगे। सिलावट मार्च 2020 में पहली बार बीजेपी सरकार में मंत्री बने थे, फिर नवंबर 2020 में उचुनाव जीते थे। सिलावट ने पहला चुनाव 1985 में कांग्रेस के टिकट पर सांवेर से ही लड़ा था। तभी से वह चुनाव लड़ रहे हैं।
इंदौर से उषा ठाकुर का पत्ता कट गया, मालिनी दौड़ में पिछड़ी
वहीं इंदौर से अभी शिवराज सिंह सरकार में सिलावट के साथ उषा ठाकुर (महू विधायक) मंत्री पद पर थे। लेकिन नए गठन में ठाकुर का पत्ता कट गया है। वह साल 2003 से इंदौर एक से विधायक रही, फिर 2008 में उनका टिकट कटा, 2013 में वह इंदौर तीन से विधायक बनी तो फिर 2018 व 2023 में महू से विधायक बनी। उधर पूर्व महापौर व इंदौर चार से विधायक मालिनी गौड़ भी एक बार फिर मंत्री बनने से चूक गई है, वह भी मेंदोला की तरह चौथी बार की विधायक है, जो लगातार भारी मतों से जीत रही है। इसी तरह लगातार पांचवी बार विधायक बने इंदौर विधानसभा पांच के विधायक महेंद्र हार्डिया को भी मौका नहीं मिला है। वह एक बार राज्यमंत्री रह चुके हैं। वहीं पहली बार विधायक बने राउ विधायक मधु वर्मा, इंदौर तीन विधायक गोलू शुक्ला को भी मौका नहीं मिला है, वहीं शिवराज के एक और करीबी देपालपुर विधायक मनोज पटेल को भी मौका नहीं मिला है। मनोज पटेल तीसरी बार विधायक बने हैं, वह 2003 से चुनाव लड़ रहे हैं, साल 2003, 2013 और 2023 मे चुनाव जीते और 2008 व 2018 में चुनाव हार गए थे।, मेंदोला फिर चूके, ठाकुर बाहर, सिंधिया कोटे से सिलावट शामिल
नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता
By Sanjay Gupta, Sandeep Kumar
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari