वीआईटी भोपाल विवाद में NHRC सख्त, राज्य सरकार से 4 सप्ताह में मांगी रिपोर्ट, नाम और परिसर की लोकेशन पर हो रहा विवाद
Manya Jain | Sootr Creatives | Oct 23, 2026, 14:45 IST
वीआईटी भोपाल की लोकेशन को लेकर NSUI की शिकायत, आयोग ने मांगी रिपोर्ट
वीआईटी भोपाल के नाम को लेकर नया विवाद खड़ा हुआ है। विश्वविद्यालय का नाम भोपाल से जुड़ा है। इसका परिसर सीहोर जिले के कोठरी कलां में स्थित है। एनएसयूआई ने इसी अंतर को लेकर शिकायत की है। संगठन का कहना है कि नाम से छात्रों को भ्रम हो सकता है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने शिकायत पर संज्ञान लिया है। आयोग ने 22 अक्टूबर को राज्य सरकार को निर्देश दिए। सरकार से चार सप्ताह में अतिरिक्त रिपोर्ट मांगी गई है। फिलहाल आयोग ने किसी आरोप पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। रिपोर्ट आने के बाद मामले की स्थिति और स्पष्ट होगी।
एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने विश्वविद्यालय के नाम और वास्तविक लोकेशन पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि नाम से भ्रम पैदा हो सकता है।
विद्यार्थी इसे भोपाल में स्थित विश्वविद्यालय समझ सकते हैं। अभिभावकों को भी इसकी लोकेशन को लेकर गलतफहमी हो सकती है। विश्वविद्यालय का परिसर भोपाल-इंदौर मार्ग पर बना है। यह जगह सीहोर जिले के कोठरी कलां में आती है।
आयोग ने शिकायत के आधार पर सरकार से जवाब मांगा है। अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी भी मांगी गई है।
राज्य सरकार ने आयोग को पहले एक रिपोर्ट भेजी थी। आयोग ने 22 अक्टूबर को इस रिपोर्ट की जांच की। रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के नाम से जुड़े दस्तावेज भी शामिल थे।
सरकार के मुताबिक विश्वविद्यालय का नाम कानून के तहत तय है। इसलिए नाम को कानूनी रूप से मान्यता मिली हुई है। आयोग का सवाल नाम से ज्यादा लोकेशन की जानकारी पर है।
शिकायत में भोपाल से परिसर की दूरी करीब 100 किलोमीटर बताई है। सरकारी जवाब में इस सवाल पर साफ जानकारी नहीं मिली है।
आयोग ने विश्वविद्यालय के प्रचार माध्यमों पर भी सवाल पूछे हैं। इनमें वेबसाइट और विज्ञापन शामिल हैं। प्रवेश से जुड़ा प्रॉस्पेक्टस भी जांच के दायरे में है।
आयोग ने पूछा कि परिसर की सही लोकेशन कैसे बताई जाती है। क्या वेबसाइट पर पूरा पता साफ दिखाई देता है? क्या विज्ञापनों में सीहोर जिले का जिक्र होता है? प्रॉस्पेक्टस में विद्यार्थियों को क्या जानकारी दी जाती है?
आयोग ने केवल कानूनी नाम बताना पर्याप्त नहीं माना। विद्यार्थियों को वास्तविक लोकेशन की स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। अभिभावकों को भी परिसर का सही पता मालूम होना जरूरी है।
आयोग ने उच्च शिक्षा विभाग की रिपोर्ट को अधूरा माना है। यूजीसी की रिपोर्ट में भी कुछ आरोपों की जानकारी नहीं मिली है। शिकायत में दो अन्य मुद्दे भी उठाए गए थे।
पहला आरोप परिसर में कथित अनधिकृत क्लिनिक से जुड़ा है। दूसरा मुद्दा परिसर में पहले हुई अशांति से संबंधित है। आयोग को इन आरोपों की जांच का पूरा ब्योरा नहीं मिला है।
अब आयोग ने सरकार से इन विषयों पर जवाब मांगा है। इन आरोपों की सच्चाई अभी साबित नहीं हुई है।
वीआईटी भोपाल (VIT Bhopal) का परिसर पहले भी अलग-अलग घटनाओं को लेकर चर्चा में रहा है।
जुलाई 2022: हनुमान चालीसा पर जुर्माना
जुलाई 2022 में सात विद्यार्थियों पर पांच-पांच हजार रुपए का जुर्माना लगाने की खबर सामने आई थी। इन छात्रों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, छात्रों ने हॉस्टल की सुविधाओं के विरोध में पाठ किया था। विश्वविद्यालय ने अपने बयान में कहा था कि छात्रों ने शांति के समय तेज आवाज में शोर किया था। इस मामले में राज्य सरकार ने जांच के आदेश दिए थे।
नवंबर 2025: पीलिया के आरोप और प्रदर्शन
नवंबर 2025 में विद्यार्थियों ने परिसर में प्रदर्शन किया था। यह प्रदर्शन 25 और 26 नवंबर को हुआ था। इसमें करीब तीन से चार हजार विद्यार्थी शामिल बताए गए।
विद्यार्थियों ने खाने और पानी की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। परिसर में पीलिया फैलने का आरोप भी लगाया गया। प्रदर्शन के दौरान कुछ वाहनों में आग लगने की खबर आई।
विश्वविद्यालय ने 30 नवंबर तक छुट्टी घोषित कर दी थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कृष्णा गौर को परिसर भेजा। तत्कालीन रजिस्ट्रार केके नायर ने तीन मौतों के दावे खारिज किए थे।
मार्च 2026 में भी नाम को लेकर शिकायत सामने आई थी। द हितवाद ने 29 मार्च को इसकी रिपोर्ट प्रकाशित की थी। रिपोर्ट के मुताबिक आयोग ने शिकायत पर मामला दर्ज किया था।
शिकायत में नाम और वास्तविक लोकेशन का अंतर उठाया गया था। परिसर को भोपाल से करीब 100 किलोमीटर दूर बताया गया। यानी मामला अक्टूबर की कार्रवाई से पहले आयोग तक पहुंच चुका था।
राज्य सरकार को आयोग के सामने अतिरिक्त रिपोर्ट देनी होगी। इसमें नाम और लोकेशन का अंतर स्पष्ट करना होगा। वेबसाइट और विज्ञापनों की जानकारी भी बतानी होगी।
कथित अनधिकृत क्लिनिक पर हुई जांच का ब्योरा देना होगा। पहले हुई घटनाओं पर कार्रवाई भी स्पष्ट करनी होगी। रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तारीख 29 नवंबर बताई गई है।
सरकार के जवाब के बाद आयोग आगे की कार्रवाई तय करेगा। फिलहाल किसी आरोप को साबित मानना उचित नहीं होगा।
एनएसयूआई की शिकायत में क्या आरोप हैं?
विद्यार्थी इसे भोपाल में स्थित विश्वविद्यालय समझ सकते हैं। अभिभावकों को भी इसकी लोकेशन को लेकर गलतफहमी हो सकती है। विश्वविद्यालय का परिसर भोपाल-इंदौर मार्ग पर बना है। यह जगह सीहोर जिले के कोठरी कलां में आती है।
आयोग ने शिकायत के आधार पर सरकार से जवाब मांगा है। अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी भी मांगी गई है।
नाम कानून से तय, लेकिन लोकेशन पर सवाल
सरकार के मुताबिक विश्वविद्यालय का नाम कानून के तहत तय है। इसलिए नाम को कानूनी रूप से मान्यता मिली हुई है। आयोग का सवाल नाम से ज्यादा लोकेशन की जानकारी पर है।
शिकायत में भोपाल से परिसर की दूरी करीब 100 किलोमीटर बताई है। सरकारी जवाब में इस सवाल पर साफ जानकारी नहीं मिली है।
वेबसाइट और विज्ञापनों में लोकेशन कैसे बताई जाती है?
आयोग ने पूछा कि परिसर की सही लोकेशन कैसे बताई जाती है। क्या वेबसाइट पर पूरा पता साफ दिखाई देता है? क्या विज्ञापनों में सीहोर जिले का जिक्र होता है? प्रॉस्पेक्टस में विद्यार्थियों को क्या जानकारी दी जाती है?
आयोग ने केवल कानूनी नाम बताना पर्याप्त नहीं माना। विद्यार्थियों को वास्तविक लोकेशन की स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। अभिभावकों को भी परिसर का सही पता मालूम होना जरूरी है।
उच्च शिक्षा विभाग की रिपोर्ट में क्या कमी?
पहला आरोप परिसर में कथित अनधिकृत क्लिनिक से जुड़ा है। दूसरा मुद्दा परिसर में पहले हुई अशांति से संबंधित है। आयोग को इन आरोपों की जांच का पूरा ब्योरा नहीं मिला है।
अब आयोग ने सरकार से इन विषयों पर जवाब मांगा है। इन आरोपों की सच्चाई अभी साबित नहीं हुई है।
पहले भी विवादों में रहा कैंपस
जुलाई 2022: हनुमान चालीसा पर जुर्माना
जुलाई 2022 में सात विद्यार्थियों पर पांच-पांच हजार रुपए का जुर्माना लगाने की खबर सामने आई थी। इन छात्रों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, छात्रों ने हॉस्टल की सुविधाओं के विरोध में पाठ किया था। विश्वविद्यालय ने अपने बयान में कहा था कि छात्रों ने शांति के समय तेज आवाज में शोर किया था। इस मामले में राज्य सरकार ने जांच के आदेश दिए थे।
नवंबर 2025: पीलिया के आरोप और प्रदर्शन
नवंबर 2025 में विद्यार्थियों ने परिसर में प्रदर्शन किया था। यह प्रदर्शन 25 और 26 नवंबर को हुआ था। इसमें करीब तीन से चार हजार विद्यार्थी शामिल बताए गए।
विद्यार्थियों ने खाने और पानी की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। परिसर में पीलिया फैलने का आरोप भी लगाया गया। प्रदर्शन के दौरान कुछ वाहनों में आग लगने की खबर आई।
विश्वविद्यालय ने 30 नवंबर तक छुट्टी घोषित कर दी थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कृष्णा गौर को परिसर भेजा। तत्कालीन रजिस्ट्रार केके नायर ने तीन मौतों के दावे खारिज किए थे।
मार्च 2026: नाम को लेकर पहले भी शिकायत
शिकायत में नाम और वास्तविक लोकेशन का अंतर उठाया गया था। परिसर को भोपाल से करीब 100 किलोमीटर दूर बताया गया। यानी मामला अक्टूबर की कार्रवाई से पहले आयोग तक पहुंच चुका था।
अब आगे क्या होगा?
कथित अनधिकृत क्लिनिक पर हुई जांच का ब्योरा देना होगा। पहले हुई घटनाओं पर कार्रवाई भी स्पष्ट करनी होगी। रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तारीख 29 नवंबर बताई गई है।
सरकार के जवाब के बाद आयोग आगे की कार्रवाई तय करेगा। फिलहाल किसी आरोप को साबित मानना उचित नहीं होगा।
FAQ
- वीआईटी भोपाल मामले में
एनएचआरसी ने क्या निर्देश दिए हैं?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने राज्य सरकार से चार सप्ताह में अतिरिक्त रिपोर्ट मांगी है, जिसकी अंतिम तारीख 29 नवंबर है। आयोग ने अभी किसी आरोप पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। - एनएसयूआई की शिकायत में विश्वविद्यालय के नाम को लेकर क्या आपत्ति है?
एनएसयूआई नेता रवि परमार का आरोप है कि विश्वविद्यालय के नाम में 'भोपाल' होने से विद्यार्थियों को परिसर की लोकेशन को लेकर भ्रम हो सकता है, जबकि उसका परिसर सीहोर जिले के कोठरी कलां में स्थित है। - राज्य सरकार ने वीआईटी भोपाल का नाम कानूनी रूप से कैसे तय किया है?
राज्य सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय का नाम संबंधित कानून के तहत निर्धारित किया गया है, लेकिन आयोग ने नाम और परिसर की वास्तविक लोकेशन के बीच संभावित भ्रम पर स्पष्ट जानकारी मांगी है।
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