तो रद्द होने वाला है वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट, जानें कहां हुई चूक
Sourabh Bhatnagar | Dec 30, 2024, 13:54 IST
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मंडीदीप से इंदौर-भोपाल हाईवे को जोड़ने के लिए बनाए जा रहे वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट को सरकार रद्द करने की तैयारी कर रही है। प्रोजेक्ट रद्द करने का कारण इंदौर-भोपाल सिक्स लेन एक्सप्रेसवे की मंजूरी और रसूखदारों की जमीनें बताई जा रही हैं।
मंडीदीप से इंदौर-भोपाल हाईवे को जोड़ने के लिए प्रस्तावित वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट (Western Bypass Project) को सरकार रद्द करने की तैयारी कर रही है। इस 3,000 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट को रद्द करने का कारण बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने इंदौर-भोपाल सिक्स लेन एक्सप्रेसवे (Indore-Bhopal Six-Lane Expressway) को मंजूरी दे दी है। इस एक्सप्रेसवे का अलाइनमेंट (Alignment) वेस्टर्न बायपास के हिस्से को प्रभावित करता है।
हालांकि, जानकारों का मानना है कि असली वजह नेताओं और अधिकारियों की जमीनों से जुड़ी है। पूर्व मंत्री दीपक जोशी ने इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को शिकायत दर्ज कराई थी। जोशी का आरोप है कि कंसल्टेंट फर्म एलएन मालवीय इंफ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड (LN Malviya Infra Project Pvt. Ltd.) ने इस प्रोजेक्ट को ऐसे डिजाइन किया जिससे रसूखदारों को आर्थिक लाभ हो।
प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर पीडब्ल्यूडी विभाग इस मामले की जांच कर रहा है। दिलचस्प बात यह है कि मप्र सड़क विकास निगम (MP Road Development Corporation) ने पहले ही डीपीआर (Detailed Project Report) बनाने के लिए टेंडर जारी कर दिया था। वहीं, भोपाल और रायसेन जिला प्रशासन ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी थी, जिसे अब रोक दिया गया है।
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शिवराज सरकार ने 31 अगस्त 2023 को कैबिनेट में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। इसमें 4 लेन रोड, 6 लेन स्ट्रक्चर, और दोनों तरफ 2 लेन सर्विस रोड का निर्माण प्रस्तावित था। इस प्रोजेक्ट को नवंबर 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य था।
मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि सरकार अब इस प्रोजेक्ट को कैंसिल करने जा रही है। अब प्रोजेक्ट के मामले में पीएमओ का सीधा दखल है। रायसेन जिला प्रशासन के एक अफसर के मुताबिक भू-अर्जन के प्रारंभिक प्रकाशन होने के बाद अधिग्रहण की प्रक्रिया को रोक दिया गया है।
भू-अर्जन की प्रक्रिया मार्च 2025 तक पूरी करना थी ऐसा न करने पर अधिग्रहण के लिए मिले 467 करोड़ रुपए लैप्स हो जाएंगे। दूसरी तरफ लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता संजय मस्के का कहना है कि हमारी जांच अभी चल रही है। इसकी चार बैठकें हो चुकी हैं। एक या दो बैठकें और होना बाकी है। इसके बाद पीडब्ल्यूडी विभाग सरकार को जांच रिपोर्ट सौंप देगा।
सरकार ने अब इस प्रोजेक्ट को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रायसेन जिला प्रशासन ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया रोक दी है। लोक निर्माण विभाग (PWD) की जांच जारी है, और जल्द ही रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी।
हालांकि, जानकारों का मानना है कि असली वजह नेताओं और अधिकारियों की जमीनों से जुड़ी है। पूर्व मंत्री दीपक जोशी ने इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को शिकायत दर्ज कराई थी। जोशी का आरोप है कि कंसल्टेंट फर्म एलएन मालवीय इंफ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड (LN Malviya Infra Project Pvt. Ltd.) ने इस प्रोजेक्ट को ऐसे डिजाइन किया जिससे रसूखदारों को आर्थिक लाभ हो।
प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर पीडब्ल्यूडी विभाग इस मामले की जांच कर रहा है। दिलचस्प बात यह है कि मप्र सड़क विकास निगम (MP Road Development Corporation) ने पहले ही डीपीआर (Detailed Project Report) बनाने के लिए टेंडर जारी कर दिया था। वहीं, भोपाल और रायसेन जिला प्रशासन ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी थी, जिसे अब रोक दिया गया है।
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प्रोजेक्ट से जुड़ी अहम जानकारी
किनकी जमीनें आ रही थीं दायरे में?
इस प्रोजेक्ट के तहत 3200 लोगों की 250 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण में आ रही थी। इसमें कई नेता, अधिकारी, और बिल्डर शामिल हैं:
- विजय लक्ष्मी साधौ, पूर्व मंत्री
- मनोज श्रीवास्तव, पूर्व आईएएस
- आयुष्मान डेवलपर्स (राजेश सर्राफ)
- धन विद्या रियलटर्स प्रा.लि. (नवीन कुमार जैन, अजय संतोष नागर)
- मोती बिल्डर्स (घनश्याम सर्राफ, हुकुमचंद सर्राफ, वीरेंद्र रघुवंशी)
- बिटारी डिस्टलरीज प्रा.लि. (रंजीत नारंग)।
- महाना वेंचर्स (श्रीकृष्ण राजौरिया)।
- विवेकानंद विचारधाम शिक्षा एवं समाज कल्याण समिति (राजेश कुमार साहू)।
- आकृति डेवलपर्स (राजीव व बीडी सोनी)
- सिटी इंफ्रावेंचर प्रा.लि. (प्रदीप अग्रवाल)।
- नीलेश मारन।
- सीए प्रमोद शर्मा।
- आशा वर्मा।
- विंग कमांडर एसी वाजपेयी।
- मेसर्स नयासा डेवलपर्स (अभितेष, प्रतीक जैन)
- मैक पैरामाउंट इंफ्रापेंचर प्रा.लि.।
प्रोजेक्ट कैंसिल करने की पूरी तैयारी
भू-अर्जन की प्रक्रिया मार्च 2025 तक पूरी करना थी ऐसा न करने पर अधिग्रहण के लिए मिले 467 करोड़ रुपए लैप्स हो जाएंगे। दूसरी तरफ लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता संजय मस्के का कहना है कि हमारी जांच अभी चल रही है। इसकी चार बैठकें हो चुकी हैं। एक या दो बैठकें और होना बाकी है। इसके बाद पीडब्ल्यूडी विभाग सरकार को जांच रिपोर्ट सौंप देगा।
वर्तमान स्थिति
FAQ
- वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट क्यों रद्द किया जा रहा है?
इसे इंदौर-भोपाल सिक्स लेन एक्सप्रेसवे के अलाइनमेंट में आने के कारण रद्द किया जा रहा है। - इस प्रोजेक्ट की लागत कितनी थी?
इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 3,000 करोड़ रुपए थी। - जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया किस चरण में है?
जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया फिलहाल रोक दी गई है। - इस प्रोजेक्ट में कौन-कौन सी प्रमुख फर्म शामिल थीं?
एलएन मालवीय इंफ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड और कई अन्य बिल्डर्स एवं डेवलपर्स इस प्रोजेक्ट से जुड़े थे। - इस प्रोजेक्ट को कब तक पूरा किया जाना था?
इसे नवंबर 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।
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