IAS Preeti Maithil: आज महिला दिवस पर चाची, काकी, मामी, मौसी, दादी, बुआ को सलाम पहुंचे!
महिला दिवस न केवल आर्थिक रूप से सक्षम अपने पैरों पर खड़ी महिलाओं का दिन है, बल्कि उन स्त्रियों का भी है, जिन्होंने अपने बच्चों, अपने परिवार ही नहीं... अपने गांव, अपने मोहल्लों, अपने मायकों और अपनी ससुरालों को अपने प्रेम और जिजीविषा से अपने हाथों में संभाला है। यह दिन उन सब चाचियों का है, जो शादी-ब्याह के मौके पर घर-आंगन में इकट्ठा हो जाती हैं।
हर महिला को महिला दिवस की बधाई
उन बड़ी बहुओं का भी है, जो 20-25 लोगों का भोजन ऐसे ही मुस्कराकर बना देती हैं। उन बुआओं का, जो आगे बढ़कर भाई के कंधे पर हाथ रख देती हैं, जब उनके पिताजी नहीं रहे। वो काकी-ताई, जो नई भाभियों को पूजा-पाठ सिखाकर अपने कुटुंब में मिलाती हैं...और बेटियां जो द्वार पर रंगोली और दीवार पर संझा बनाती हैं। दादी-नानी, जो नाती-पोतों को देखकर लहलहाती हैं और माएं जो सब कुछ अपने मन अपनी आंखों में समेट लेती हैं।
हर महिला डिजर्व करती हैं क्रेडिट
वो औरतें जिनकी पूरी जिंदगी बच्चों को पालने में निकल गई। कभी खुद के, कभी अपनी देवरानियों के और कभी पड़ोसियों तक के। वो बहुएं जिनकी आधी उम्र अपने सास-ससुर की तीमारदारी में कटी। वो पत्नियां, जिनके बिना पति अपनी दवाएं तक समय पर नहीं खा पाते...जो अस्पताल में सिर की तरफ बैठकर हाथ से माथा सहला देती हैं।
और वो सब भी जो महीने-महीने भर के व्रत करती हैं, नजर उतारती हैं और काजल के टीके लगा देती हैं। जो शाम को आंगन बुहारती हैं और मंदिर में दीपक रखती हैं। निर्माण केवल सड़कों, पुलों और अट्टालिकाओं का ही नहीं होता, निर्माण समाज का भी होता है...और समाज की निर्माता, एक स्त्री है।
आज महिला दिवस पर उन सब चाची, काकी, मामी, मौसी, दादी, बुआ को सलाम पहुंचे। आप को उतना क्रेडिट दिया नहीं जाता, जितना आप लोग deserve करती हो। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस
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