फर्जी ऑनलाइन गोल्ड ट्रेडिंग वेबसाइट से 12 करोड़ की ठगी, असम निवासी आरोपी विशाखापट्टनम से गिरफ्तार
Jageshwar prasad | Oct 21, 2026, 16:39 IST
ऑनलाइन गोल्ड ट्रेडिंग स्कैम: 12 करोड़ की ठगी, 6 आरोपी गिरफ्तार
जयपुर के सेंट्रल साइबर पुलिस स्टेशन ने ऑनलाइन गोल्ड ट्रेडिंग के नाम पर 12 करोड़ से अधिक की साइबर ठगी का पर्दाफाश किया है। इस मामले में असम निवासी बेशराज थापा उर्फ राहुल को विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बताया कि इस प्रकरण में अब तक कुल 6 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
राजस्थान की साइबर क्राइम पुलिस ने फर्जी गोल्ड ट्रेडिंग वेबसाइट से करोड़ों की ठगी के मामले में बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने छठे आरोपी बेशराज थापा उर्फ राहुल को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी असम का रहने वाला है। उसे विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश से पकड़ा गया।
प्रेस नोट के मुताबिक, यह कार्रवाई महानिरीक्षक पुलिस (साइबर क्राइम) श्री शान्तनु कुमार सिंह के निर्देशन में की गई। स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, जयपुर की टीम ने इसे अंजाम दिया। आरोपी को पांच दिन के ट्रांजिट वारंट पर जयपुर लाया गया है।
पुलिस ने बताया कि परिवादी को 25 सितंबर 2025 को व्हाट्सएप पर एक मैसेज मिला था। उसमें एक वेबसाइट का लिंक भेजा गया था। वेबसाइट पर ऑनलाइन गोल्ड ट्रेडिंग (Online Gold Trading) और आकर्षक रिटर्न का दावा किया गया। परिवादी ने वेबसाइट पर अकाउंट बनाया और निवेश शुरू कर दिया।
परिवादी ने 7 अक्टूबर से 4 नवंबर 2025 तक अलग-अलग बैंक खातों में करीब 6 करोड़ रुपए जमा किए। वेबसाइट के वॉलेट में उसके निवेश के सामने लगभग 42 करोड़ का लाभ दिखाया गया। जब परिवादी ने पैसे निकालने की कोशिश की तो आरोपियों ने अलग-अलग शुल्क की मांग शुरू कर दी।
परिवादी से इनकम टैक्स, प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क के नाम पर करीब 12 करोड़ 65 लाख रुपए और जमा कराए गए। इतनी बड़ी रकम जमा कराने के बाद भी आरोपियों ने न तो मूल रकम लौटाई और न ही पैसे निकालने की अनुमति दी।
पुलिस की जांच में सामने आया कि बेशराज थापा का नाम पहले गिरफ्तार किए गए आरोपी इकबाल अहमद की पूछताछ में आया था। इसके बाद पुलिस टीम विशाखापट्टनम पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसने बैंक खाताधारक प्रकाश कुमार के बैंक खाते और उससे लिंक मोबाइल सिम कार्ड की जानकारी इस्लाम तक पहुंचाने में मदद की थी। इसके बदले उसे 50,000 रुपए मिले थे। जांच में सामने आया है कि प्रकाश कुमार के खाते में परिवादी से ठगी गई राशि में से 33,75,328 रुपए प्राप्त हुए हैं।
आरोपी ने यह भी बताया कि वह हर्षा ऊर्फ गौरव और इस्लाम के संपर्क में रहकर काम करता था। वह बैंक खाताधारकों को लेकर आता था और हर्षा ऊर्फ गौरव के पास भेजता था। आरोपी ने खाताधारकों के साथ होटल या कमरे में रहकर उनकी गतिविधियों की निगरानी की। उसने उनकी लाइव फोटो और वीडियो हर्षा ऊर्फ गौरव को भेजे।
आरोपी ने पुलिस को बताया कि जनवरी 2026 में हर्षा उर्फ गौरव ने उसे मोबाइल बंद कर कहीं और चले जाने को कहा था। जब इकबाल अहमद की गिरफ्तारी की खबर मिली तो वह विशाखापट्टनम चला गया। वहां जाकर उसने अपना मोबाइल फोन तोड़कर नष्ट कर दिया, जिसका इस्तेमाल ठगी में हुआ था।
पुलिस अब इस मामले में अन्य आरोपियों हर्षा साइकिया उर्फ गौरव और इस्लाम की तलाश कर रही है। पुलिस ठगी की रकम के असली लाभार्थियों का भी पता लगा रही है। साथ ही बरामदगी को लेकर भी जांच जारी है।
पुलिस टीम व्हाट्सएप और टेलीग्राम के रिकॉर्ड की जांच कर रही है। इसके अलावा कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), कस्टमर एप्लीकेशन फॉर्म (CAF), इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड (IPDR) भी खंगाले जा रहे हैं। बैंकिंग ट्रांजेक्शन की मनी ट्रेल भी की जा रही है।
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी की रकम किन-किन खातों में भेजी गई। इसके अलावा इस साइबर गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हैं, इस पर भी विस्तृत जांच चल रही है। टीम का नेतृत्व उप अधीक्षक पुलिस श्री गजेन्द्र शर्मा कर रहे हैं।
पुलिस ने आम लोगों के लिए भी कुछ जरूरी सलाह जारी की हैं। अधिक मुनाफे के लालच में न आने की बात कही गई है। कम समय में पैसा दोगुना करने या बड़े रिटर्न के दावों पर भरोसा न करें। अनजान व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप से दूर रहें।
फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइटों से बचें। वेबसाइट का आकर्षक डिजाइन या बड़ा नाम उसकी सच्चाई का सबूत नहीं है। किसी भी निवेश से पहले संबंधित ब्रोकर का रजिस्ट्रेशन भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI – Securities and Exchange Board of India) की वेबसाइट पर जांच लें।
स्क्रीन पर दिख रहे मुनाफे को असली न समझें। जब तक पैसा आपके असली बैंक खाते में न आए, उसे कमाई न मानें। ठग शुरू में छोटी रकम निकालने देते हैं, जिससे लोगों का भरोसा जीत सकें। इसके बाद वे बड़ी रकम निवेश करवाकर फरार हो जाते हैं।
अपना बैंक खाता, सिम कार्ड या बैंकिंग लॉगिन किसी अन्य व्यक्ति को किराए पर न दें। ठगी की शिकायत तुरंत साइबर पोर्टल https://cybercrime.gov.in पर करें। इसके अलावा साइबर हेल्प लाइन नंबर 1930 पर भी कॉल कर सकते हैं।
प्रेस नोट के मुताबिक, यह कार्रवाई महानिरीक्षक पुलिस (साइबर क्राइम) श्री शान्तनु कुमार सिंह के निर्देशन में की गई। स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, जयपुर की टीम ने इसे अंजाम दिया। आरोपी को पांच दिन के ट्रांजिट वारंट पर जयपुर लाया गया है।
12 करोड़ से अधिक की ठगी
परिवादी ने 7 अक्टूबर से 4 नवंबर 2025 तक अलग-अलग बैंक खातों में करीब 6 करोड़ रुपए जमा किए। वेबसाइट के वॉलेट में उसके निवेश के सामने लगभग 42 करोड़ का लाभ दिखाया गया। जब परिवादी ने पैसे निकालने की कोशिश की तो आरोपियों ने अलग-अलग शुल्क की मांग शुरू कर दी।
परिवादी से इनकम टैक्स, प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क के नाम पर करीब 12 करोड़ 65 लाख रुपए और जमा कराए गए। इतनी बड़ी रकम जमा कराने के बाद भी आरोपियों ने न तो मूल रकम लौटाई और न ही पैसे निकालने की अनुमति दी।
आरोपी की क्या थी भूमिका?
आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसने बैंक खाताधारक प्रकाश कुमार के बैंक खाते और उससे लिंक मोबाइल सिम कार्ड की जानकारी इस्लाम तक पहुंचाने में मदद की थी। इसके बदले उसे 50,000 रुपए मिले थे। जांच में सामने आया है कि प्रकाश कुमार के खाते में परिवादी से ठगी गई राशि में से 33,75,328 रुपए प्राप्त हुए हैं।
आरोपी ने यह भी बताया कि वह हर्षा ऊर्फ गौरव और इस्लाम के संपर्क में रहकर काम करता था। वह बैंक खाताधारकों को लेकर आता था और हर्षा ऊर्फ गौरव के पास भेजता था। आरोपी ने खाताधारकों के साथ होटल या कमरे में रहकर उनकी गतिविधियों की निगरानी की। उसने उनकी लाइव फोटो और वीडियो हर्षा ऊर्फ गौरव को भेजे।
फोन तोड़कर किया था नष्ट
पुलिस अब इस मामले में अन्य आरोपियों हर्षा साइकिया उर्फ गौरव और इस्लाम की तलाश कर रही है। पुलिस ठगी की रकम के असली लाभार्थियों का भी पता लगा रही है। साथ ही बरामदगी को लेकर भी जांच जारी है।
तकनीकी विश्लेषण जारी
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी की रकम किन-किन खातों में भेजी गई। इसके अलावा इस साइबर गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हैं, इस पर भी विस्तृत जांच चल रही है। टीम का नेतृत्व उप अधीक्षक पुलिस श्री गजेन्द्र शर्मा कर रहे हैं।
आमजन के लिए पुलिस की सलाह
फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइटों से बचें। वेबसाइट का आकर्षक डिजाइन या बड़ा नाम उसकी सच्चाई का सबूत नहीं है। किसी भी निवेश से पहले संबंधित ब्रोकर का रजिस्ट्रेशन भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI – Securities and Exchange Board of India) की वेबसाइट पर जांच लें।
स्क्रीन पर दिख रहे मुनाफे को असली न समझें। जब तक पैसा आपके असली बैंक खाते में न आए, उसे कमाई न मानें। ठग शुरू में छोटी रकम निकालने देते हैं, जिससे लोगों का भरोसा जीत सकें। इसके बाद वे बड़ी रकम निवेश करवाकर फरार हो जाते हैं।
अपना बैंक खाता, सिम कार्ड या बैंकिंग लॉगिन किसी अन्य व्यक्ति को किराए पर न दें। ठगी की शिकायत तुरंत साइबर पोर्टल https://cybercrime.gov.in पर करें। इसके अलावा साइबर हेल्प लाइन नंबर 1930 पर भी कॉल कर सकते हैं।
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