जयपुर में डिजिटल अरेस्ट कर रिटायर अधिकारी से दो करोड़ से ज्यादा की ठगी, अब तक सात आरोपी गिरफ्तार
Jageshwar prasad | Oct 17, 2026, 17:35 IST
जयपुर में डिजिटल अरेस्ट कर 2.12 करोड़ रुपए की साइबर ठगी
जयपुर में एक रिटायर्ड अधिकारी से साइबर ठगों ने 2.12 करोड़ की ठगी की। आरोपियों ने पुलिस अधिकारी का नाम लेकर अधिकारी को डराया और पैसों की मांग की। सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है। अतिरिक्त महानिदेशक विजय कुमार सिंह ने साइबर ठगी के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त की।
जयपुर में एक बड़े साइबर ठगी (Cyber Fraud) का मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने एक रिटायर अधिकारी को 'डिजिटल अरेस्ट' कर 2.12 करोड़ रुपए की ठगी की। यह मामला सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन तक पहुंचा। पुलिस ने जांच के बाद इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।
पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर साइबर अपराधों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत यह कार्रवाई हुई। पुलिस का कहना है कि अपराधियों को पकड़ने के लिए टीम लगातार काम कर रही है।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम विजय कुमार सिंह ने जानकारी दी। एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित के अनुसार 9 से 18 अगस्त 2026 के बीच कुछ अनजान लोगों ने उन्हें फोन किया।
आरोपियों ने मोबाइल फोन और व्हाट्सएप कॉल के जरिए खुद को पुलिस अधिकारी बताया। उन्होंने कहा कि परिवादी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज है। गिरफ्तारी वारंट भी जारी हो चुका है। इससे परिवादी डर गए।
आरोपियों ने उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर रहने का दबाव बनाया। उनसे कहा गया कि वह किसी से संपर्क न करें। लाइव लोकेशन चालू रखें। इसके बाद उनसे पैसों की मांग की गई।
परिवादी को डराया-धमकाया गया। उनसे अलग-अलग बैंक खातों में पैसे जमा करने को कहा गया। पीड़ित ने 13 अगस्त 2026 को आईसीआईसीआई बैंक के खाते में 2,02,00,000 रुपए जमा किए। यह रकम आरटीजीएस (RTGS) के जरिए भेजी गई।
इसके बाद 18 अगस्त 2026 को येस बैंक के खाते में 10,10,000 रुपए जमा कराए गए। इस तरह परिवादी से कुल 2,12,10,000 रुपए की ठगी हुई। यह रकम साइबर ठगों ने अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवाई।
सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन की टीम ने इस मामले की जांच शुरू की। जांच में पता चला कि आरोपियों ने बैंक खातों का इस्तेमाल किया। पुलिस ने बैंक खातों, केवाईसी, मोबाइल नंबर और सीडीआर (CDR) की जांच की। इससे आरोपी की पहचान हुई।
पुलिस ने महाराष्ट्र के ठाणे निवासी जिम ट्रेनर रविंद्र जितेंद्र प्रसाद सिंह उर्फ अक्षय सिंह उर्फ देवा को गिरफ्तार किया है। उसे ट्रांजिट वारंट पर जयपुर लाया गया है। पुलिस के मुताबिक अब तक 7 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। मामले की जांच जारी है।
पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी टेलीग्राम पर 'BRO PAY' चैनल से जुड़ा था। यहां उसकी मुलाकात साइबर अपराधियों से हुई। पैसों के लालच में उसने उनके लिए काम करना शुरू कर दिया।
आरोपी ने एक अन्य आरोपी रोहित रेवण कटकधोंड को उल्हासनगर के होटल में ठहराया। उसने होटल की लोकेशन साइबर अपराधियों को दी। साथ ही रोहित पर नजर भी रखी।
आरोपी ने अपनी असली पहचान छिपाई। उसने खुद को देवा बताया। उसने रोहित से बात करने के लिए अलग सिम कार्ड का इस्तेमाल किया। आरोपी ने होटल में रोहित से एक मोबाइल फोन और 20 हजार रुपए लिए।
इसके बाद आरोपी ने फोन में साइबर ठगों की ओर से भेजी गई एक एपीके (APK) फाइल 'DooFlix' इंस्टॉल की। उसने रोहित के बैंक खाते से जुड़ा सिम कार्ड, चेकबुक और अन्य दस्तावेज अपने पास रखे। यह सारी जानकारी उसने व्हाट्सएप के जरिए ठगों को भेजी।
साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) एक नया तरीका है। इसमें ठग खुद को पुलिस अधिकारी बताते हैं और लोगों को डराते हैं। यह मामला इस बात का उदाहरण है कि कैसे लोग ठगों के जाल में फंस जाते हैं।
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे सतर्क रहें। किसी भी अनजान कॉल पर अपनी बैंक जानकारी न दें। अगर कोई खुद को पुलिस अधिकारी बताए तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें।
सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस ने आम लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। कोई भी पुलिस या सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी को डिजिटल रूप से गिरफ्तार नहीं करती। अगर कोई गिरफ्तारी वारंट या मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाए तो न डरें।
अपने ओटीपी, एटीएम पिन, पासवर्ड और बैंक दस्तावेज किसी से साझा न करें। किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई एपीके (APK) फाइल डाउनलोड न करें। कमीशन या पैसों के लालच में अपना बैंक खाता, सिम कार्ड या एटीएम कार्ड किसी को न दें।
ऐसी किसी भी घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दें। साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी संपर्क कर सकते हैं।
पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर साइबर अपराधों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत यह कार्रवाई हुई। पुलिस का कहना है कि अपराधियों को पकड़ने के लिए टीम लगातार काम कर रही है।
क्या थी शिकायत?
आरोपियों ने मोबाइल फोन और व्हाट्सएप कॉल के जरिए खुद को पुलिस अधिकारी बताया। उन्होंने कहा कि परिवादी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज है। गिरफ्तारी वारंट भी जारी हो चुका है। इससे परिवादी डर गए।
आरोपियों ने उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर रहने का दबाव बनाया। उनसे कहा गया कि वह किसी से संपर्क न करें। लाइव लोकेशन चालू रखें। इसके बाद उनसे पैसों की मांग की गई।
कैसे हुई पूरी ठगी?
इसके बाद 18 अगस्त 2026 को येस बैंक के खाते में 10,10,000 रुपए जमा कराए गए। इस तरह परिवादी से कुल 2,12,10,000 रुपए की ठगी हुई। यह रकम साइबर ठगों ने अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवाई।
कौन हुआ गिरफ्तार?
पुलिस ने महाराष्ट्र के ठाणे निवासी जिम ट्रेनर रविंद्र जितेंद्र प्रसाद सिंह उर्फ अक्षय सिंह उर्फ देवा को गिरफ्तार किया है। उसे ट्रांजिट वारंट पर जयपुर लाया गया है। पुलिस के मुताबिक अब तक 7 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। मामले की जांच जारी है।
आरोपी ने क्या किया?
आरोपी ने एक अन्य आरोपी रोहित रेवण कटकधोंड को उल्हासनगर के होटल में ठहराया। उसने होटल की लोकेशन साइबर अपराधियों को दी। साथ ही रोहित पर नजर भी रखी।
आरोपी ने अपनी असली पहचान छिपाई। उसने खुद को देवा बताया। उसने रोहित से बात करने के लिए अलग सिम कार्ड का इस्तेमाल किया। आरोपी ने होटल में रोहित से एक मोबाइल फोन और 20 हजार रुपए लिए।
इसके बाद आरोपी ने फोन में साइबर ठगों की ओर से भेजी गई एक एपीके (APK) फाइल 'DooFlix' इंस्टॉल की। उसने रोहित के बैंक खाते से जुड़ा सिम कार्ड, चेकबुक और अन्य दस्तावेज अपने पास रखे। यह सारी जानकारी उसने व्हाट्सएप के जरिए ठगों को भेजी।
साइबर ठगी के बढ़ रहे हैं मामले
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे सतर्क रहें। किसी भी अनजान कॉल पर अपनी बैंक जानकारी न दें। अगर कोई खुद को पुलिस अधिकारी बताए तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें।
पुलिस की सतर्क रहने की सलाह
अपने ओटीपी, एटीएम पिन, पासवर्ड और बैंक दस्तावेज किसी से साझा न करें। किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई एपीके (APK) फाइल डाउनलोड न करें। कमीशन या पैसों के लालच में अपना बैंक खाता, सिम कार्ड या एटीएम कार्ड किसी को न दें।
ऐसी किसी भी घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दें। साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी संपर्क कर सकते हैं।
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