जयपुर में 90 साल के पूर्व जज से 2.5 करोड़ की ठगी, CBI-RBI अधिकारी बनकर किया डिजिटल अरेस्ट
Ashish Bhardwaj | Oct 12, 2026, 12:43 IST
पूर्व जज डिजिटल अरेस्ट
जयपुर में ठगों ने एक 90 वर्षीय पूर्व जिला जज को CBI और RBI अधिकारी बनकर ठगा। पीड़ित को मुंबई में 50 करोड़ रुपए के हवाला ट्रांजेक्शन में शामिल होने की धमकी दी गई। इसी डर के चलते उन्होंने कई बार पैसे अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किए। पुलिस ने असम से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और 42 लाख रुपए होल्ड करवाए हैं।
राजस्थान की राजधानी जयपुर में साइबर ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ठगों ने 90 वर्षीय पूर्व जिला जज गणपत सिंह भंडारी को CBI और RBI अधिकारी बनकर डराया। मुंबई में 50 करोड़ रुपए के हवाला ट्रांजेक्शन में नाम आने की बात कही और गिरफ्तारी का डर दिखाया। इसके बाद बुजुर्ग से अलग-अलग बैंक खातों में करीब 2.5 करोड़ रुपए ट्रांसफर करवा लिए। मामले की जांच कर रही ज्योति नगर थाना पुलिस ने असम से राहुल हुसैन नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने ठगी से जुड़े कुछ बैंक खातों में जमा 42 लाख रुपए भी होल्ड करवाए हैं।
जयपुर दक्षिण के डीसीपी राजर्षि राज के मुताबिक, पीड़ित के भांजे रविंद्र सिंह मोहनोत ने 12 अगस्त 2026 को ज्योति नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, 28 जुलाई को गणपत सिंह भंडारी के पास अनजान नंबर से वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाला पुलिस की वर्दी में था और खुद को CBI अधिकारी बता रहा था।
उसने बुजुर्ग से कहा कि मुंबई में 50 करोड़ रुपए के हवाला ट्रांजेक्शन में उनका नाम सामने आया है। इस बात से बुजुर्ग घबरा गए। कुछ समय बाद दूसरे नंबर से कॉल आया। इस बार कॉल करने वाले ने खुद को RBI अधिकारी बताया और पीड़ित के म्यूचुअल फंड से जुड़ी जानकारी जुटाई।
ठगों ने बुजुर्ग पर लगातार दबाव बनाया। उन्हें मुंबई ले जाकर पूछताछ करने और कार्रवाई करने की धमकी दी गई। साथ ही परिवार के सदस्यों को इस पूरे मामले की जानकारी देने से मना किया गया। इस तरह पीड़ित को डर और दबाव में रखा गया।
खुद को कानूनी कार्रवाई से बचाने की कोशिश में बुजुर्ग ने कई बार में करीब 2.5 करोड़ रुपए अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। बाद में ठगी का पता चलने पर मामला पुलिस तक पहुंचा। इस तरह के अपराध को आम तौर पर डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है। इसमें ठग वीडियो कॉल और फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर पीड़ित को यह विश्वास दिलाते हैं कि वह किसी जांच एजेंसी की निगरानी में है।
पुलिस जांच में पता चला कि ठगी की रकम कई स्तरों पर सैकड़ों बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी। बैंक स्टेटमेंट की जांच के दौरान राहुल हुसैन के खाते में करीब 28 लाख रुपए आने की जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने चेक के जरिए रकम निकाली थी।
जांच के बाद पुलिस टीम असम के मनकाचार पहुंची और राहुल हुसैन को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उसे ट्रांजिट रिमांड पर जयपुर लाया गया। पुलिस अब उससे पूछताछ कर रही है। जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि ठगी की रकम किन-किन खातों में गई और इस नेटवर्क में दूसरे कौन-कौन लोग शामिल हैं।
पुलिस ने ठगी से जुड़े कुछ बैंक खातों में जमा 42 लाख रुपए होल्ड करवाए हैं। हालांकि, खातों में रकम होल्ड होना और पीड़ित को पैसे वापस मिलना अलग-अलग बातें हैं। रकम की वापसी की स्थिति जांच और संबंधित प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
सुप्रीम कोर्ट में पेश I4C की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी 1,23,672 शिकायतें वर्ष 2024 में दर्ज हुई थीं। वर्ष 2025 में यह संख्या घटकर 58,239 रही। 30 जून 2026 तक 16,377 शिकायतें दर्ज की गई थीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, CBI ने डिजिटल अरेस्ट से जुड़े 10 मामले दर्ज किए। इनमें से एक जांच में 238 पीड़ितों, 67 बैंक खातों और करीब 80 करोड़ रुपए के लेनदेन की जानकारी सामने आई। इस जांच के सिलसिले में 16 राज्यों में 93 जगहों पर तलाशी ली गई।
वहीं, साइबर ठगी की रकम वापस दिलाने की व्यापक व्यवस्था के तहत 36,290 मामलों में कुल 18.05 करोड़ रुपए की वापसी पूरी होने की जानकारी दी गई है। यह आंकड़ा केवल डिजिटल अरेस्ट के मामलों का नहीं, बल्कि व्यापक रकम-वापसी व्यवस्था का है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि कोई भी व्यक्ति खुद को पुलिस, CBI या RBI अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी दे, तो घबराकर पैसे ट्रांसफर न करें। जांच एजेंसियों के नाम पर डराकर पैसे मांगना साइबर ठगी का तरीका हो सकता है।
ऐसी स्थिति में कॉल करने वाले की बातों में आने के बजाय परिवार के भरोसेमंद सदस्य को जानकारी दें और संबंधित पुलिस या आधिकारिक एजेंसी से संपर्क करें। साइबर ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें। शुरुआती समय में शिकायत करने से ठगी की रकम को रोकने की संभावना बढ़ सकती है।
वीडियो कॉल पर CBI अधिकारी बनकर डराया
उसने बुजुर्ग से कहा कि मुंबई में 50 करोड़ रुपए के हवाला ट्रांजेक्शन में उनका नाम सामने आया है। इस बात से बुजुर्ग घबरा गए। कुछ समय बाद दूसरे नंबर से कॉल आया। इस बार कॉल करने वाले ने खुद को RBI अधिकारी बताया और पीड़ित के म्यूचुअल फंड से जुड़ी जानकारी जुटाई।
परिवार को बताने से रोका, गिरफ्तारी की धमकी दी
खुद को कानूनी कार्रवाई से बचाने की कोशिश में बुजुर्ग ने कई बार में करीब 2.5 करोड़ रुपए अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। बाद में ठगी का पता चलने पर मामला पुलिस तक पहुंचा। इस तरह के अपराध को आम तौर पर डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है। इसमें ठग वीडियो कॉल और फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर पीड़ित को यह विश्वास दिलाते हैं कि वह किसी जांच एजेंसी की निगरानी में है।
2 हजार किलोमीटर दूर तक पहुंची पुलिस
जांच के बाद पुलिस टीम असम के मनकाचार पहुंची और राहुल हुसैन को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उसे ट्रांजिट रिमांड पर जयपुर लाया गया। पुलिस अब उससे पूछताछ कर रही है। जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि ठगी की रकम किन-किन खातों में गई और इस नेटवर्क में दूसरे कौन-कौन लोग शामिल हैं।
पुलिस ने ठगी से जुड़े कुछ बैंक खातों में जमा 42 लाख रुपए होल्ड करवाए हैं। हालांकि, खातों में रकम होल्ड होना और पीड़ित को पैसे वापस मिलना अलग-अलग बातें हैं। रकम की वापसी की स्थिति जांच और संबंधित प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
डिजिटल अरेस्ट की शिकायतों पर क्या कहते हैं आंकड़े?
रिपोर्ट के मुताबिक, CBI ने डिजिटल अरेस्ट से जुड़े 10 मामले दर्ज किए। इनमें से एक जांच में 238 पीड़ितों, 67 बैंक खातों और करीब 80 करोड़ रुपए के लेनदेन की जानकारी सामने आई। इस जांच के सिलसिले में 16 राज्यों में 93 जगहों पर तलाशी ली गई।
वहीं, साइबर ठगी की रकम वापस दिलाने की व्यापक व्यवस्था के तहत 36,290 मामलों में कुल 18.05 करोड़ रुपए की वापसी पूरी होने की जानकारी दी गई है। यह आंकड़ा केवल डिजिटल अरेस्ट के मामलों का नहीं, बल्कि व्यापक रकम-वापसी व्यवस्था का है।
पुलिस की अपील: डरें नहीं, पैसे ट्रांसफर न करें
ऐसी स्थिति में कॉल करने वाले की बातों में आने के बजाय परिवार के भरोसेमंद सदस्य को जानकारी दें और संबंधित पुलिस या आधिकारिक एजेंसी से संपर्क करें। साइबर ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें। शुरुआती समय में शिकायत करने से ठगी की रकम को रोकने की संभावना बढ़ सकती है।
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