राजस्थान के छोटे से गांव की सुलोचना मीणा बनीं IAS, 22 साल की उम्र में UPSC पास कर रचा इतिहास

Jyoti Mahender Bhardwaj | Sept 24, 2026, 17:06 IST
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राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के आदलवाड़ा गांव की सुलोचना मीणा ने 22 साल की उम्र में UPSC सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की। दिल्ली विश्वविद्यालय से बॉटनी में स्नातक करने के बाद उन्होंने UPSC की तैयारी की। उनकी लगन और परिश्रम ने उन्हें झारखंड में SDO के पद पर पहुंचा दिया। उनकी यात्रा छोटे गांवों के युवाओं के लिए प्रेरणादायक है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • राजस्थान के छोटे गांव की बेटी बनी IAS
  • 22 साल की उम्र में पास की UPSC
  • गांव से दिल्ली और फिर IAS तक सफर
  • 8-9 घंटे पढ़ाई कर हासिल किया मुकाम
  • सुलोचना मीणा की UPSC सफलता की कहानी
सवाई माधोपुर: राजस्थान के छोटे से गांव से निकलकर UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। सवाई माधोपुर जिले के आदलवाड़ा गांव की सुलोचना मीणा ने महज 22 साल की उम्र में UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास कर अपने परिवार और पूरे इलाके का नाम रोशन किया। आज वह झारखंड में SDO के पद पर तैनात हैं।

सुलोचना की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने कम उम्र में ही अपना लक्ष्य तय कर लिया था। गांव में रहते हुए उन्होंने लोगों की परेशानियों को करीब से देखा और तभी मन बना लिया था कि उन्हें प्रशासनिक सेवा में जाना है। इसके बाद पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने UPSC की तैयारी पर पूरा फोकस रखा।

गांव से शुरू हुआ बड़ा सपना

सुलोचना मीणा की परवरिश सवाई माधोपुर जिले के आदलवाड़ा गांव में हुई। छोटे शहर और गांव के माहौल में रहते हुए भी उन्होंने बड़ा सपना देखा।

उनका लक्ष्य बचपन से ही साफ था। वह प्रशासनिक सेवा में जाना चाहती थीं। गांव में लोगों की समस्याओं और सरकारी व्यवस्था को करीब से देखने का अनुभव उनके इस सपने की बड़ी वजह बना।

जहां कई युवा कॉलेज के बाद अपने करियर को लेकर फैसला करते हैं, वहीं सुलोचना ने काफी पहले ही अपनी दिशा तय कर ली थी।

दिल्ली पहुंचकर शुरू की UPSC की तैयारी

स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद सुलोचना आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली पहुंचीं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से बॉटनी में ग्रेजुएशन किया।

कॉलेज के दौरान ही उन्होंने UPSC की तैयारी को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया। दिल्ली में उन्हें पढ़ाई का बेहतर माहौल मिला। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे दूसरे छात्रों से जुड़ने और उपलब्ध स्टडी मटेरियल का फायदा भी उन्हें मिला।

उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई और UPSC की तैयारी को साथ-साथ आगे बढ़ाया।

किताबों से बनाया मजबूत बेस

सुलोचना ने UPSC की तैयारी के लिए सबसे पहले अपनी बेसिक तैयारी मजबूत की। उन्होंने NCERT की किताबों को आधार बनाया।

भारतीय राजव्यवस्था के लिए एम. लक्ष्मीकांत और इतिहास के लिए स्पेक्ट्रम जैसी किताबों से तैयारी की। उनका फोकस सिर्फ किताबें खत्म करने पर नहीं था, बल्कि किसी भी टॉपिक को समझने पर था।

वह किसी चीज को रटने के बजाय उसके पीछे की वजह और पूरी अवधारणा समझने की कोशिश करती थीं। इससे धीरे-धीरे उनका बेस मजबूत होता गया।

YouTube और टॉपर्स के इंटरव्यू से भी ली मदद

सुलोचना ने अपनी तैयारी में डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल किया। YouTube पर मौजूद एजुकेशनल वीडियो और UPSC पास कर चुके अभ्यर्थियों के इंटरव्यू से उन्हें काफी मदद मिली।

टॉपर्स की तैयारी की रणनीति और उनके अनुभवों को समझकर उन्होंने अपनी पढ़ाई का तरीका बेहतर किया। इससे उन्हें यह समझने में मदद मिली कि UPSC की तैयारी सिर्फ ज्यादा घंटे पढ़ने का नाम नहीं है, बल्कि सही तरीके से पढ़ना भी जरूरी है।

रोजाना 8 से 9 घंटे पढ़ाई

UPSC की तैयारी में सुलोचना ने नियमित पढ़ाई को सबसे ज्यादा महत्व दिया। वह रोजाना करीब 8 से 9 घंटे पढ़ाई करती थीं।

उनकी दिनचर्या में पढ़ाई के साथ-साथ रिवीजन और आंसर राइटिंग भी शामिल थी। वह लगातार यह कोशिश करती थीं कि जो पढ़ा है, उसे परीक्षा में सही तरीके से लिख भी सकें।

मुख्य परीक्षा में सिर्फ जानकारी होना काफी नहीं होता। सवाल का जवाब कम शब्दों में और सही तरीके से लिखना भी जरूरी होता है। इसी वजह से सुलोचना ने आंसर राइटिंग की लगातार प्रैक्टिस की।

अखबार पढ़ने की डाली आदत

UPSC की तैयारी में करंट अफेयर्स का बड़ा रोल होता है। सुलोचना ने इसे समझते हुए रोजाना अखबार पढ़ने की आदत बनाई।

वह सिर्फ खबरें पढ़कर आगे नहीं बढ़ती थीं, बल्कि महत्वपूर्ण मुद्दों को समझने की कोशिश करती थीं। किसी मुद्दे का देश, समाज और प्रशासन पर क्या असर पड़ता है, इस पर भी ध्यान देती थीं।

इससे उनकी समझ और विश्लेषण करने की क्षमता बेहतर हुई, जो परीक्षा के अलग-अलग चरणों में काम आई।

मेहनत का मिला नतीजा

लगातार तैयारी के बाद जब UPSC का रिजल्ट आया तो सुलोचना मीणा ने परीक्षा पास कर ली। महज 22 साल की उम्र में मिली इस सफलता के बाद उनके गांव और परिवार में खुशी का माहौल बन गया।

गांव के लोगों ने भी उनकी सफलता को अपनी उपलब्धि माना। एक छोटे से गांव की बेटी का IAS बनना आसपास के दूसरे युवाओं के लिए भी बड़ी प्रेरणा बना।

छोटे गांव से IAS बनने तक का सफर

सुलोचना की कहानी उन युवाओं के लिए खास है जो छोटे शहरों और गांवों से आते हैं और बड़े प्रतियोगी एग्जाम की तैयारी करना चाहते हैं।

उनकी सफलता बताती है कि तैयारी के लिए सिर्फ बड़े शहर में रहना या महंगे संसाधन होना ही जरूरी नहीं है। सही दिशा, लगातार मेहनत और पढ़ाई की अच्छी रणनीति के साथ लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ा जा सकता है।

आज सुलोचना मीणा झारखंड में SDO के पद पर काम कर रही हैं। उनकी यह यात्रा दिखाती है कि अगर लक्ष्य पहले से तय हो और उसके लिए लगातार मेहनत की जाए तो छोटे से गांव से निकलकर भी बड़ी जिम्मेदारी तक पहुंचा जा सकता है।
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