250 रुपए का चंदन का पौधा बना सकता है लाखों का पेड़, जानें खेती का पूरा तरीका
Ashish Bhardwaj | Sept 15, 2026, 17:47 IST
चंदन का पौधा
सफेद चंदन की खेती कैसे करें, पौधा कब और कैसे लगाएं और कितनी कमाई हो सकती है? राजस्थान के दो किसानों के अनुभव से समझें चंदन की खेती का पूरा तरीका।
खेती में ऐसी फसल की तलाश कर रहे, जिसमें रोज देखभाल का झंझट कम हो और लंबे समय में बड़ी रकम मिलने की संभावना हो तो सफेद चंदन एक विकल्प हो सकता। हालांकि, यह जल्दी पैसा देने वाली खेती नहीं। चंदन के पेड़ को तैयार होने में कई साल लगते। इसके लिए सही पौधा, मेजबान पौधे, मिट्टी, पानी और सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी। अच्छी गुणवत्ता का चंदन तैयार होने पर इसकी लकड़ी की कीमत काफी अधिक हो सकती। भरतपुर के किसान रूप सिंह वैष्णव का प्रयोग बताता है कि सही तरीके से कोशिश की जाए तो दक्षिण भारत के बाहर भी सफेद चंदन उगाया जा सकता।
पहले समझें सफेद
सफेद चंदन यानी सैंटलम एल्बम (Santalum album) की लकड़ी और इससे निकलने वाले तेल की बाजार में मांग रहती। इसका इस्तेमाल इत्र, कॉस्मेटिक उत्पाद, धार्मिक कार्यों और कई पारंपरिक उत्पादों में होता है।
किसान को यहां एक बात समझनी चाहिए। सामान्य फसलों की तरह चंदन लगाकर अगले सीजन में आमदनी नहीं होती। यह लंबी अवधि का निवेश है। अच्छी हार्टवुड विकसित होने में आम तौर पर कई वर्ष लगते हैं। इसलिए किसान इसे अपनी पूरी जमीन पर लगाने के बजाय शुरुआत में सीमित क्षेत्र में दीर्घकालीन निवेश के तौर पर भी आजमा सकते।
कब लगाएं सफेद
चंदन लगाने के लिए बारिश का मौसम बेहतर माना जाता। जुलाई से अगस्त के बीच पौधरोपण करने पर पौधे को शुरुआती दौर में पर्याप्त नमी मिल सकती। मानसून अच्छा रहने पर सितंबर तक भी पौधे लगाए जा सकते। पौधरोपण के समय खेत में पर्याप्त नमी होना जरूरी है। इससे नए पौधे की जड़ें मिट्टी में स्थापित होने में मदद मिलती है। बहुत ज्यादा पानी जमा रहने वाली जमीन से बचना चाहिए। खेत में जल निकासी की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए।
चंदन लगाने से पहले खेत की योजना बनाना जरूरी। पौधे के लिए करीब 2×2 फीट आकार का गड्ढा तैयार किया जा सकता। गड्ढे से निकली मिट्टी में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या दूसरी जैविक खाद मिलाएं। इसके बाद मिश्रण को वापस गड्ढे में भरें और पौधा लगाएं। पौधे के आसपास मिट्टी को हल्के हाथ से दबाएं, जिससे जड़ों के आसपास खाली जगह न रहे। शुरुआती समय में पौधे को जरूरत के अनुसार पानी दें। खेत में पानी भरने नहीं दें।
चंदन की खेती की सबसे महत्वपूर्ण बात इसके मेजबान पौधे हैं। सफेद चंदन अर्ध-परजीवी यानी सेमी-पैरासिटिक पौधा है। यह अपनी जड़ों के माध्यम से आसपास मौजूद दूसरे पौधों से कुछ पोषक तत्व और पानी हासिल करता है। इसलिए चंदन के साथ उपयुक्त होस्ट प्लांट लगाना जरूरी होता। किसान चंदन लगाने से पहले अपने क्षेत्र की जलवायु के हिसाब से उपयुक्त मेजबान पौधों की जानकारी कृषि या वानिकी विशेषज्ञ से जरूर लें। यही छोटी सी तकनीकी जानकारी चंदन के पौधों की जीवित रहने की दर और आगे उनकी ग्रोथ में बड़ा अंतर पैदा कर सकती है।
राजस्थान के भरतपुर जिले के सलेमपुर कला गांव के किसान रूप सिंह वैष्णव का प्रयोग चंदन की खेती की लंबी अवधि को समझने का अच्छा उदाहरण है। रूप सिंह के मुताबिक उन्होंने एक साधु हरभजन सिंह की सलाह पर कर्नाटक से करीब 500 सफेद चंदन के पौधे मंगाए थे। पौधों पर करीब 65 हजार रुपए खर्च हुए। इन्हें लगभग दो हेक्टेयर जमीन में लगाने की कोशिश की गई। इनमें करीब 200 पेड़ सफलतापूर्वक विकसित हुए। करीब 14 साल बाद ये पेड़ अब उस अवस्था में पहुंच रहे, जहां किसान उनसे व्यावसायिक आमदनी की उम्मीद कर रहे।
रूप सिंह का अनुमान है कि तैयार पेड़ों की कीमत लाखों रुपए प्रति पेड़ तक हो सकती। इस आधार पर वे अपने पेड़ों की संभावित कीमत करोड़ों रुपए में आंक रहे। हालांकि, किसान को किसी एक पेड़ की अनुमानित कीमत को अपनी सुनिश्चित कमाई नहीं मानना चाहिए। वास्तविक कीमत चंदन की हार्टवुड की मात्रा, लकड़ी की गुणवत्ता, तेल की मात्रा, पेड़ के आकार और उस समय के बाजार भाव पर निर्भर करेगी।
यही सवाल चंदन की खेती में किसानों को सबसे ज्यादा आकर्षित करता है। एक विकसित चंदन के पेड़ की कीमत लाखों रुपए तक बताई जाती है। लेकिन हर पेड़ से एक जैसी रकम मिले, यह जरूरी नहीं है।
चंदन में असली कीमत उसके तने के अंदर विकसित होने वाली हार्टवुड की होती है। पेड़ जितना परिपक्व होगा और उसमें अच्छी गुणवत्ता की हार्टवुड तथा तेल होगा, कीमत उतनी बेहतर मिलने की संभावना रहती है। इसलिए किसान को 200 पेड़ × 5 लाख रुपए जैसे सीधे गुणा को निश्चित मुनाफा नहीं मानना चाहिए। पौधों की मृत्यु, पेड़ों की गुणवत्ता, हार्टवुड की मात्रा, कटाई और बिक्री के समय बाजार भाव जैसे कई कारक अंतिम आमदनी तय करेंगे।
चंदन महंगी लकड़ी है, इसलिए इसकी खेती में चोरी बड़ा जोखिम हो सकती। भरतपुर के किसान रूप सिंह के मुताबिक उनके खेत से कुछ पेड़ों को चोरी से काटने की घटना भी हो चुकी। जैसे-जैसे पेड़ बड़े और मूल्यवान होते जाएं, उनकी निगरानी बढ़ाना जरूरी हो जाता। बड़े स्तर पर चंदन लगाने से पहले खेत की फेंसिंग, निगरानी और सुरक्षा पर आने वाला खर्च भी खेती की लागत में जोड़कर चलना चाहिए।
चंदन की खेती शुरू करने से पहले अपने राज्य में इसकी कटाई, परिवहन और बिक्री से जुड़े मौजूदा नियम जरूर पता करें। निजी जमीन पर चंदन उगाने, काटने और बेचने के नियम राज्य के अनुसार अलग हो सकते हैं। पौधे खरीदते समय भी विश्वसनीय नर्सरी का चुनाव करें। केवल इस दावे पर पौधे न खरीदें कि हर पौधा कुछ वर्षों में लाखों रुपए देगा।
सफेद चंदन उन किसानों के लिए ज्यादा उपयोगी विकल्प हो सकता, जो अपनी जमीन के एक हिस्से को लंबे समय के निवेश में लगाना चाहते हैं। इसमें धैर्य सबसे बड़ी जरूरत है। पौधा लगाने के बाद व्यावसायिक स्तर की लकड़ी तैयार होने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
भरतपुर के रूप सिंह का प्रयोग इसका उदाहरण है। मामूली शुरुआती निवेश से लगाए गए उनके पेड़ वर्षों की देखभाल के बाद अब मूल्यवान संपत्ति में बदल रहे हैं। लेकिन चंदन की खेती में केवल 'एक पेड़ से लाखों की कमाई' देखकर उतरना ठीक नहीं है। सही पौधा, उपयुक्त होस्ट प्लांट, मिट्टी और जल निकासी, शुरुआती देखभाल, सुरक्षा और बिक्री के नियम समझना उतना ही जरूरी है। इन सभी बातों को ध्यान में रखकर खेती की जाए तो सफेद चंदन किसान के लिए सामान्य मौसमी फसल से अलग एक लंबी अवधि की संपत्ति तैयार करने का जरिया बन सकता है।
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पहले समझें सफेद चंदन की खेती का गणित
किसान को यहां एक बात समझनी चाहिए। सामान्य फसलों की तरह चंदन लगाकर अगले सीजन में आमदनी नहीं होती। यह लंबी अवधि का निवेश है। अच्छी हार्टवुड विकसित होने में आम तौर पर कई वर्ष लगते हैं। इसलिए किसान इसे अपनी पूरी जमीन पर लगाने के बजाय शुरुआत में सीमित क्षेत्र में दीर्घकालीन निवेश के तौर पर भी आजमा सकते।
कब लगाएं सफेद चंदन का पौधा ?
पौधा लगाने से पहले ऐसे तैयार करें खेत
अकेले चंदन लगाना नहीं है काफी
भरतपुर के किसान ने 65 हजार से की शुरुआत
रूप सिंह का अनुमान है कि तैयार पेड़ों की कीमत लाखों रुपए प्रति पेड़ तक हो सकती। इस आधार पर वे अपने पेड़ों की संभावित कीमत करोड़ों रुपए में आंक रहे। हालांकि, किसान को किसी एक पेड़ की अनुमानित कीमत को अपनी सुनिश्चित कमाई नहीं मानना चाहिए। वास्तविक कीमत चंदन की हार्टवुड की मात्रा, लकड़ी की गुणवत्ता, तेल की मात्रा, पेड़ के आकार और उस समय के बाजार भाव पर निर्भर करेगी।
चंदन से कितनी हो सकती है कमाई?
चंदन में असली कीमत उसके तने के अंदर विकसित होने वाली हार्टवुड की होती है। पेड़ जितना परिपक्व होगा और उसमें अच्छी गुणवत्ता की हार्टवुड तथा तेल होगा, कीमत उतनी बेहतर मिलने की संभावना रहती है। इसलिए किसान को 200 पेड़ × 5 लाख रुपए जैसे सीधे गुणा को निश्चित मुनाफा नहीं मानना चाहिए। पौधों की मृत्यु, पेड़ों की गुणवत्ता, हार्टवुड की मात्रा, कटाई और बिक्री के समय बाजार भाव जैसे कई कारक अंतिम आमदनी तय करेंगे।
सुरक्षा पर करना होगा खास इंतजाम
चंदन लगाने से पहले नियम भी जान लें
चंदन को समझें लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट
भरतपुर के रूप सिंह का प्रयोग इसका उदाहरण है। मामूली शुरुआती निवेश से लगाए गए उनके पेड़ वर्षों की देखभाल के बाद अब मूल्यवान संपत्ति में बदल रहे हैं। लेकिन चंदन की खेती में केवल 'एक पेड़ से लाखों की कमाई' देखकर उतरना ठीक नहीं है। सही पौधा, उपयुक्त होस्ट प्लांट, मिट्टी और जल निकासी, शुरुआती देखभाल, सुरक्षा और बिक्री के नियम समझना उतना ही जरूरी है। इन सभी बातों को ध्यान में रखकर खेती की जाए तो सफेद चंदन किसान के लिए सामान्य मौसमी फसल से अलग एक लंबी अवधि की संपत्ति तैयार करने का जरिया बन सकता है।
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