विधानसभा में गूंजा अजमेर का 'पट्टा घोटाला', विधायक रविंद्र सिंह भाटी के तेवरों के आगे झुकी सरकार, चार अधिकारी एपीओ

राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को उठे अजमेर पट्टा घोटाले में चार अधिकारियों को एपीओ कर दिया गया है। यह मामला निर्दलीय विधायक रविंद्रसिंह भाटी ने पूरी तैयारी के साथ उठाया।

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Mukesh Sharma
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ravinda vidhana

Photograph: (the sootr)

News In Short

  • राजस्थान विधानसभा में अजमेर के पट्टा घोटाले और राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर का मुद्दा उठाया।
  • शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए मुखरता से उठाया यह मुद्दा।
  • भाटी के तीखे सवालों और तथ्यों के बाद सरकार झुकी, चार अधिकारी किए एपीओ।
  • मंत्री खर्रा ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए जांच के दिए आदेश। 
  • मामला अजमेर के गांव थोक तेलियान के खसरा नंबर 2227 से जुड़ी अनियमितताओं का।

News In Detail

Jaipur: राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में होली के बाद गुरुवार को उस वक्त सियासी पारा चढ़ गया, जब शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने अजमेर नगर निगम में हुए पट्टा घोटाले और राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर का मुद्दा उठाया। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए भाटी के तीखे सवालों और तथ्यों के घेरे में आई सरकार ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए न केवल जांच के आदेश दिए, बल्कि संलिप्त चार अधिकारियों को तत्काल एपीओ करने की भी घोषणा की।

क्या है पूरा मामला

विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सदन का ध्यान अजमेर के ग्राम थोक तेलियान के खसरा नंबर 2227 से जुड़ी अनियमितताओं की ओर खींचा। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम अजमेर के अधिकारियों ने राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर और तथ्यों को छिपाकर गलत तरीके से पट्टे जारी किए। भाटी ने सदन में स्पष्ट किया कि कैसे भूमाफिया और सरकारी तंत्र की मिलीभगत से करोड़ों की सरकारी जमीन को खुर्द-बुर्द करने का प्रयास किया गया।

​मंत्री ने स्वीकार की 'सिस्टम की चूक'

​नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने सदन में कहा कि यह भूमि मूल रूप से 1971 में नगर सुधार न्यास (यूआईटी) द्वारा अधिग्रहित की गई थी। हालांकि, मुआवजे पर सहमति नहीं बनने के कारण यह भूमि राजस्व रिकॉर्ड में तकनीकी रूप से न्यास के नाम दर्ज नहीं हो सकी, लेकिन बाद में इसे नगर निगम को स्थानांतरित कर दिया गया।

​मंत्री ने स्वीकार किया कि इस जमीन पर फर्जी लीज जारी करने की कोशिशें पहले भी दो बार हो चुकी हैं। वर्तमान में यह मामला सिविल जज कोर्ट में विचाराधीन है, जहां तथ्य छिपाने के लिए एफआईआर की कार्रवाई की प्रक्रिया भी जारी है।

​होगी जांच, 4 कर्मचारी एपीओ

​विधायक भाटी की सक्रियता के बाद राज्य सरकार ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। मंत्री खर्रा ने कहा कि स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक इस पूरे घोटाले की विस्तृत जांच करेंगे। साथ ही, अजमेर कलेक्टर को निर्देश दिए गए हैं कि वे अतिरिक्त कलेक्टर (एडीएम) रैंक के अधिकारी से दो सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपें।

​मंत्री ने घोषणा की कि लीज जारी करने और अनियमितताओं में शामिल डिप्टी कमिश्नर (विकास), सीनियर ड्राफ्टर, जूनियर इंजीनियर (सिविल) और जूनियर असिस्टेंट को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। मंत्री ने आश्वस्त किया कि फर्जी लीज में शामिल चार कर्मचारियों को एपीओ के आदेश आज ही जारी कर दिए जाएंगे। ​सरकार ने आदेश दिया है कि पिछले 6 महीनों के भीतर अजमेर नगर निगम द्वारा जारी किए गए सभी पट्टों की गहन जांच की जाएगी।

​भाटी के तेवरों की चर्चा

शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने जिस तरह से दस्तावेजों के साथ अजमेर नगर निगम को घेरा, उसने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों का ध्यान खींचा। भाटी ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी जीरो टॉलरेंस की नीति है और वे जनता की गाढ़ी कमाई और सरकारी संपत्ति की लूट बर्दाश्त नहीं करेंगे। भाटी ने कहा, जब मामला कोर्ट में है और राजस्व रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं है, तो पट्टे जारी करने की जल्दबाजी क्यों की गई? यह सीधा-सीधा भ्रष्टाचार का मामला है।

​आगे क्या

अगले 15 दिन अजमेर नगर निगम के लिए बेहद अहम रह सकते हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद कई और बड़े नामों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। सरकार की इस त्वरित कार्रवाई ने संकेत दे दिए हैं कि निकाय चुनावों से पहले वह भ्रष्टाचार के मुद्दों पर किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।

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नगर निगम अजमेर सरकार विधानसभा रविंद्र सिंह भाटी
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