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Photograph: (the sootr)
News in Short
- अलवर की कोर्ट ने गैंगरेप में दो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
- गैंगरेप का यह मामला 6 नवंबर 2024 को खेरली पुलिस थाने में दर्ज हुई थी।
- पीड़िता की मां ने मोहित और अंकित के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई थी।
- पुलिस ने लड़की के बयान पर मोहित और अंकित को गिरफ्तार किया था।
- पोक्सो कोर्ट ने दोनों आरोपियों को 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
News in Detail
राजस्थान में अलवर की पोक्सो कार्ट ने 14 साल की नाबालिग बालिका के साथ गैंगरेप पर दो दोषियों को मोहित और अंकित को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला 6 नवंबर 2024 को खेरली पुलिस थाने में दर्ज हुआ था। पोक्सो कोर्ट ने इस मामले में दोषियों को मरते दम तक कारावास की कड़ी सजा सुनाई है।
घटना का विवरण और पीड़िता का बयान
अलवर में नाबालिग का अपहरण कर गैंगरेप का यह मामला 6 नवंबर 2024 का है। पीड़िता की मां ने खेरली थाने में दर्ज करवाया था। पीड़िता की मां ने बताया कि वह और उनकी बेटी रात को अलग-अलग कमरे में सो रहे थे। सुबह 4 बजे जब वह अपनी बेटी को चाय देने के लिए कमरे में गईं, तो वह वहां नहीं थी। इसके बाद उन्होंने काफी तलाश की और संदेह हुआ कि उनकी बेटी के साथ मोहित नामक लड़का बातचीत करता था। पुलिस ने जब नाबालिग लड़की को दस्तेयाब किया तो उसके बाद गैंगरेप का खुलासा हुआ था।
पुलिस की जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी
पीड़िता की मां ने बताया कि घटना की रात को उसने मोहित के घर जाकर पूछताछ की, तो पता चला कि मोहित भी रात से गायब था। बाइक लेकर कहीं गया था। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। सबसे पहले पुलिस ने लड़की को बरामद किया। लड़की ने बताया कि मोहित उसे बाइक पर बैठाकर दूसरे गांव में अपने दोस्त अंकित के घर ले गया था। वहां दोनों आरोपियों ने बारी-बारी से उसका बलात्कार किया। इस घटना में 22 गवाहों और 26 दस्तावेजों को साक्ष्य के रूप में पेश किया गया।
पोक्सो कोर्ट का फैसला
पोक्सो कोर्ट के विशिष्ट न्यायाधीश जागेंद्र अग्रवाल ने इस मामले में मोहित और अंकित को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और उन्हें 10-10 हजार रुपये का अर्थ दंड भी लगाया। यह फैसला इस प्रकार के अपराधों के खिलाफ कड़ी सजा देने के उद्देश्य से लिया गया, ताकि समाज में बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके।
अदालत का महत्वपूर्ण कदम
इस फैसले ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि पोक्सो कोर्ट बच्चों के खिलाफ अपराधों को गंभीरता से लेकर सख्त कार्रवाई करती है। यह कदम बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को बचाने की दिशा में एक अहम मील का पत्थर साबित हो सकता है।
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