अलवर में अधिकारी की करतूत आई सामने, परिवार के लोगों को ही मजदूर बना कर दिए 95 हजार रुपए ट्रांसफर
Ashish Bhardwaj | Oct 13, 2026, 12:58 IST
अलवर वीडीओ भुगतान मामला
राजस्थान में अलवर की कठूमर पंचायत समिति की ग्राम पंचायत सोंखर में पदस्थ ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) हितेश शर्मा पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। उन्होंने अपनी पत्नी, तीन बेटों और एक रिश्तेदार को फर्जी तरीके से विकास कार्यों में मजदूर दिखाकर 95,202 रुपए की मजदूरी का भुगतान कर दिया।
अलवर में कठूमर पंचायत समिति के ग्राम पंचायत सोंखर के वीडीओ हितेश शर्मा भुगतान के मामले में जांच के घेरे में है। शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने अपने ही परिवार वालों को मजदूर दिखाकर भुगतान कर दिया। इस भुगतान में पत्नी, तीन बेटे और एक रिश्तेदार शामिल हैं। ऑनलाइन मस्टररोल के मुताबिक, इन पांच खातों में कुल 95,202 रुपए जमा हुए है।
ग्राम विकास अधिकारी हितेश शर्मा पर ये आरोप लगे हैं। वीडीओ (VDO – Village Development Officer) पंचायत में विकास कार्यों की देखरेख करता है। आरोपों के मुताबिक, 2020-21 से 2025 के बीच नौ विकास कार्य स्वीकृत हुए। इनमें से पांच के रिकॉर्ड में इन लोगों के नाम दर्ज हैं।
यहां सबसे बड़ा सवाल मजदूरी की रेट पर है। दूसरे मजदूरों की मजदूरी 200 रुपए प्रतिदिन दी गई है। वहीं, वीडीओ की पत्नी और बेटों के लिए 600 रुपए रोज मजदूरी दर्ज हुई। यानी बाकी मजदूरों से तीन गुना।
रिकॉर्ड के अनुसार, मोहित के खाते में 20,018 रुपए जमा हुए। रोहित के खाते में 20,819 रुपए और सोहित के खाते में 9,724 रुपए गए। सुमन के खाते में 21,750 रुपए भेजे गए। यशवंत तिवारी के खाते में 22,891 रुपए पहुंचे। इन सभी रकम का जोड़ 95,202 रुपए होता है।
मस्टररोल ( मस्टररोल में मजदूरों की हाजिरी और भुगतान का रिकॉर्ड रखा जाता है) में कई बातें दर्ज हैं। मोहित, रोहित और सोहित के पिता का नाम हितेश लिखा है। सुमन के पति का नाम भी हितेश दर्ज है। उपलब्ध जानकारी में इन्हें वीडीओ के बेटे और पत्नी बताया गया है।
यशवंत तिवारी को वीडीओ का रिश्तेदार बताया जा रहा है। ग्रामीणों का अनुसार वीडीओ का एक बेटा सरकारी नौकरी कर रहा है। और रिश्तेदार बैंक में कार्यरत है।
इस भुगतान में नालियों पर जाली लगाने के काम के बदले दिया गया है। इसके लिए 14वें वित्त आयोग से 1.29 लाख रुपए मंजूर हुए थे। रिकॉर्ड के मुताबिक, इसमें मोहित और रोहित को 7,200-7,200 रुपए दिए गए। सुमन के नाम 2,640 रुपए का भुगतान दर्ज है।
इस के साथ सार्वजनिक बोरिंग पर टंकी निर्माण में भी परिजनों के नाम सामने आए हैं। ग्रेवल सड़क पर मोरम डालने का काम भी इसमें शामिल है। इस काम में यशवंत तिवारी को 2,873 रुपए दिए जाने की बात है।
ग्राम विकास अधिकारी हितेश शर्मा ने आरोपों पर अपना पक्ष रखा। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं के काम करवाना जरूरी होता है। उनके मुताबिक, मजदूर आसानी से नहीं मिलते। ऐसे में किसी को भी काम पर लगाया जा सकता है।
शिकायत के बाद ग्रामीणों ने अफसरों को एक मेजरनामा ( सामूहिक लिखित बयान) सौंपा है। इस बयान में वीडीओ और एलडीसी पर कार्रवाई न करने की बात कही गई है।
"कोई भी अधिकारी अपने परिजन के खाते में सरकारी योजना की राशि नहीं डाल सकता। प्रकरण की गंभीरता से जांच कराकर कार्रवाई करेंगे।"
– यक्ष चौधरी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO – Chief Executive Officer), जिला परिषद
नौ में से पांच काम परिजनों के नाम
परिवार को दिए 600 रुपए मजदूरी
किसके खाते में कितनी रकम?
ऑनलाइन मस्टररोल में पिता और पति का नाम हितेश
यशवंत तिवारी को वीडीओ का रिश्तेदार बताया जा रहा है। ग्रामीणों का अनुसार वीडीओ का एक बेटा सरकारी नौकरी कर रहा है। और रिश्तेदार बैंक में कार्यरत है।
नालियों पर जाली के काम में भी भुगतान
टंकी से सड़क तक के कामों में नाम
वीडीओ बोले, रकम लौटा दी
ग्रामीणों का मेजरनामा भी पहुंचा
जिला परिषद सीईओ यक्ष चौधरी ने कहा, होगी जांच
– यक्ष चौधरी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO – Chief Executive Officer), जिला परिषद
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