एसएमएस में रिटायर्ड डॉक्टरों को फिर मिली कुर्सी, नियमित डॉक्टरों को मौका क्यों नहीं? नियुक्ति से लेकर वेतन-पेंशन तक उठे सवाल
Raghvendra Singh Rathore | Oct 12, 2026, 18:36 IST
SMS अस्पताल में रिटायर्ड डॉक्टरों को फिर कुर्सी, नियमित डॉक्टरों को मौका क्यों नहीं?
जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में रिटायर्ड डॉक्टरों को दोबारा नियुक्त करने के बाद यूनिट हेड और उपाधीक्षक जैसी जिम्मेदारियां देने पर सवाल उठ रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने विधानसभा में नियमों की जानकारी मांगी है। वहीं, मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने भी प्रशासनिक पदों पर बार-बार एक्सटेंशन देने का विरोध किया है।
राजस्थान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एसएमएस में रिटायरमेंट के बाद भी कुछ डॉक्टर बड़ी जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। इनमें किसी को यूनिट हेड बनाया गया है तो किसी के पास अस्पताल के उपाधीक्षक की जिम्मेदारी है। मामला अब विधानसभा तक पहुंच चुका है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार से पूछा है कि पे माइनस पेंशन पर दोबारा नियुक्त डॉक्टरों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां किस नियम के तहत दी गई हैं।
इस विवाद में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है। राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन भी प्रशासनिक पदों पर बार-बार कार्यकाल बढ़ाने का विरोध कर चुकी है। ऐसे में सवाल केवल रिटायर्ड डॉक्टरों की नियुक्ति का नहीं, बल्कि नियमित डॉक्टरों के अवसर, नियुक्ति की मंजूरी और सरकारी खर्च का भी है।
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, कार्डियोलॉजी विभाग में डॉ. एस.एम. शर्मा और नेफ्रोलॉजी विभाग में डॉ. धनंजय अग्रवाल को यूनिट हेड बनाया गया है। राजस्थान मेडिकल काउंसिल के चेयरमैन डॉ. जगदीश मोदी के पास एसएमएस अस्पताल में उपाधीक्षक की जिम्मेदारी होने की जानकारी भी सामने आई है।
इसके अलावा डर्मेटोलॉजी के डॉ. दीपक माथुर और एनेस्थीसिया के डॉ. राजेश शर्मा भी पुनर्नियुक्त डॉक्टरों में शामिल बताए गए हैं। इन दोनों को अलग प्रशासनिक जिम्मेदारी मिलने को लेकर रिपोर्टों में अलग-अलग जानकारी है।
इन डॉक्टरों के मूल पुनर्नियुक्ति आदेश और अतिरिक्त कार्यभार के आदेश सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि किसे कौन-सी जिम्मेदारी, कब और किस अधिकारी की मंजूरी से दी गई।
इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यूनिट हेड के वित्तीय अधिकारों का है। अगस्त 2026 में राजस्थान मेडिकेयर रिलीफ सोसायटी की कार्यकारिणी समिति की बैठक में एसएमएस अस्पताल के यूनिट हेड को सीमित वित्तीय अधिकार देने का निर्णय हुआ था।
इसके तहत अस्पताल की जरूरी व्यवस्थाओं के लिए एक बार में 10 हजार रुपए और साल में अधिकतम 50 हजार रुपए तक खर्च करने की व्यवस्था तय की गई। यूनिट हेड की जिम्मेदारी केवल मरीजों के इलाज तक सीमित नहीं है। इसमें यूनिट का संचालन और कुछ वित्तीय फैसले भी शामिल हैं।
राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन ने अक्टूबर की शुरुआत में चिकित्सा शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रशासनिक पदों पर बार-बार कार्यकाल बढ़ाने का विरोध किया था।
एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. धीरज जेफ ने कहा था कि लगातार एक्सटेंशन देने से पात्र वरिष्ठ फैकल्टी को अवसर नहीं मिल पाता। एसोसिएशन ने कार्यकाल पूरा होने पर वरिष्ठता और योग्यता के आधार पर नए लोगों को जिम्मेदारी देने की मांग की थी।
पत्र में बताया गया कि एसएमएस मेडिकल कॉलेज में पांच अतिरिक्त प्रधानाचार्य कार्यरत हैं। इनमें से दो का कार्यकाल पूरा हो चुका था, जबकि एक को पहले भी एक्सटेंशन दिया गया था।
सरकारी मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, मरीजों के इलाज और मेडिकल छात्रों की पढ़ाई के लिए अनुभवी डॉक्टरों को रिटायरमेंट के बाद दोबारा नियुक्त किया जा सकता है। लेकिन एसएमएस के संबंधित विभागों में विशेषज्ञों की वास्तविक कमी कितनी है, इसका विभागवार रिकॉर्ड अभी उपलब्ध नहीं है।
ऐसे में यह जांच जरूरी है कि जिन विभागों में रिटायर्ड डॉक्टरों को यूनिट हेड बनाया गया, वहां कितने नियमित प्रोफेसर और वरिष्ठ डॉक्टर कार्यरत हैं। क्या वे इस जिम्मेदारी के लिए पात्र थे और उनका चयन क्यों नहीं हुआ?
राजस्थान सिविल सेवा पेंशन नियम, 1996 के नियम 152 में पुनर्नियुक्त पेंशनरों के वेतन निर्धारण की व्यवस्था है। इसके तहत लागू शर्तों के अनुसार अंतिम वेतन और पेंशन को ध्यान में रखकर पुनर्नियुक्ति का भुगतान तय किया जाता है।
उदाहरण के लिए, किसी डॉक्टर का निर्धारित वेतन एक लाख रुपए और समायोजन योग्य पेंशन 40 हजार रुपए हो, तो सामान्य गणना में पुनर्नियुक्ति वेतन 60 हजार रुपए होगा। वास्तविक राशि संबंधित नियुक्ति आदेश और लागू नियमों से तय होती है।
नियम 163 के अनुसार वेतन निर्धारण के लिए सेवानिवृत्ति के समय का वेतन और पेंशन संबंधी विवरण लिया जाता है। नियम 164 में सक्षम अधिकारी द्वारा वेतन निर्धारण की व्यवस्था है।
इस मामले में कार्मिक विभाग के जनवरी 2019 के एक आदेश का भी हवाला दिया जा रहा है। दावा है कि पे माइनस पेंशन पर नियुक्त कर्मचारी को निर्धारित पद के अलावा दूसरा कार्यभार देने की व्यवस्था नहीं है।
यूनिट हेड, विभागाध्यक्ष और अस्पताल उपाधीक्षक के पदों की जिम्मेदारियां भी अलग हैं। ऐसे में प्रत्येक पद के लिए लागू नियम और मंजूरी की प्रक्रिया की अलग जांच जरूरी है।
डॉ. धनंजय अग्रवाल के मामले में एक और पहलू सामने आया है। जून 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, रिटायरमेंट के बाद उन्हें अजमेर मेडिकल कॉलेज में पुनर्नियुक्ति दी गई थी।
अब एसएमएस में उनके यूनिट हेड की जिम्मेदारी संभालने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में अजमेर से एसएमएस तक उनकी नियुक्ति और पोस्टिंग के बीच जारी आदेशों की जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने विधानसभा में सवाल लगाकर पूछा है कि एसएमएस में कितने डॉक्टर पे माइनस पेंशन पर पुनर्नियुक्त हैं, उनमें से कितनों को यूनिट हेड बनाया गया है और इसके लिए कौन-से नियम लागू किए गए।
इस मामले में पांचों डॉक्टरों के मूल नियुक्ति आदेश, अतिरिक्त कार्यभार की स्वीकृति, नियमित वरिष्ठ डॉक्टरों की स्थिति और वेतन निर्धारण का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण है। एसएमएस प्रशासन, चिकित्सा शिक्षा विभाग और संबंधित डॉक्टरों का ताजा आधिकारिक पक्ष भी नही सका उनका कहना है अधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही इस पर टिप्पणी की जा सकती है।
इस विवाद में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है। राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन भी प्रशासनिक पदों पर बार-बार कार्यकाल बढ़ाने का विरोध कर चुकी है। ऐसे में सवाल केवल रिटायर्ड डॉक्टरों की नियुक्ति का नहीं, बल्कि नियमित डॉक्टरों के अवसर, नियुक्ति की मंजूरी और सरकारी खर्च का भी है।
तीन डॉक्टरों को बड़ी जिम्मेदारी, दो अन्य की भी पुनर्नियुक्ति
इसके अलावा डर्मेटोलॉजी के डॉ. दीपक माथुर और एनेस्थीसिया के डॉ. राजेश शर्मा भी पुनर्नियुक्त डॉक्टरों में शामिल बताए गए हैं। इन दोनों को अलग प्रशासनिक जिम्मेदारी मिलने को लेकर रिपोर्टों में अलग-अलग जानकारी है।
इन डॉक्टरों के मूल पुनर्नियुक्ति आदेश और अतिरिक्त कार्यभार के आदेश सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि किसे कौन-सी जिम्मेदारी, कब और किस अधिकारी की मंजूरी से दी गई।
यूनिट हेड के पास खर्च करने के भी अधिकार
इसके तहत अस्पताल की जरूरी व्यवस्थाओं के लिए एक बार में 10 हजार रुपए और साल में अधिकतम 50 हजार रुपए तक खर्च करने की व्यवस्था तय की गई। यूनिट हेड की जिम्मेदारी केवल मरीजों के इलाज तक सीमित नहीं है। इसमें यूनिट का संचालन और कुछ वित्तीय फैसले भी शामिल हैं।
मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने भी उठाए सवाल
एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. धीरज जेफ ने कहा था कि लगातार एक्सटेंशन देने से पात्र वरिष्ठ फैकल्टी को अवसर नहीं मिल पाता। एसोसिएशन ने कार्यकाल पूरा होने पर वरिष्ठता और योग्यता के आधार पर नए लोगों को जिम्मेदारी देने की मांग की थी।
पत्र में बताया गया कि एसएमएस मेडिकल कॉलेज में पांच अतिरिक्त प्रधानाचार्य कार्यरत हैं। इनमें से दो का कार्यकाल पूरा हो चुका था, जबकि एक को पहले भी एक्सटेंशन दिया गया था।
रिटायर्ड डॉक्टरों की जरूरत क्यों पड़ती है?
ऐसे में यह जांच जरूरी है कि जिन विभागों में रिटायर्ड डॉक्टरों को यूनिट हेड बनाया गया, वहां कितने नियमित प्रोफेसर और वरिष्ठ डॉक्टर कार्यरत हैं। क्या वे इस जिम्मेदारी के लिए पात्र थे और उनका चयन क्यों नहीं हुआ?
पे माइनस पेंशन में कैसे तय होता है भुगतान?
उदाहरण के लिए, किसी डॉक्टर का निर्धारित वेतन एक लाख रुपए और समायोजन योग्य पेंशन 40 हजार रुपए हो, तो सामान्य गणना में पुनर्नियुक्ति वेतन 60 हजार रुपए होगा। वास्तविक राशि संबंधित नियुक्ति आदेश और लागू नियमों से तय होती है।
नियम 163 के अनुसार वेतन निर्धारण के लिए सेवानिवृत्ति के समय का वेतन और पेंशन संबंधी विवरण लिया जाता है। नियम 164 में सक्षम अधिकारी द्वारा वेतन निर्धारण की व्यवस्था है।
जनवरी 2019 के आदेश की भी जांच जरूरी
यूनिट हेड, विभागाध्यक्ष और अस्पताल उपाधीक्षक के पदों की जिम्मेदारियां भी अलग हैं। ऐसे में प्रत्येक पद के लिए लागू नियम और मंजूरी की प्रक्रिया की अलग जांच जरूरी है।
डॉ. धनंजय अग्रवाल की पोस्टिंग पर भी सवाल
अब एसएमएस में उनके यूनिट हेड की जिम्मेदारी संभालने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में अजमेर से एसएमएस तक उनकी नियुक्ति और पोस्टिंग के बीच जारी आदेशों की जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
विधानसभा में सरकार को देना होगा जवाब
इस मामले में पांचों डॉक्टरों के मूल नियुक्ति आदेश, अतिरिक्त कार्यभार की स्वीकृति, नियमित वरिष्ठ डॉक्टरों की स्थिति और वेतन निर्धारण का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण है। एसएमएस प्रशासन, चिकित्सा शिक्षा विभाग और संबंधित डॉक्टरों का ताजा आधिकारिक पक्ष भी नही सका उनका कहना है अधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही इस पर टिप्पणी की जा सकती है।
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