राजस्थान में MBBS की 61% सीटें खाली, NEET UG काउंसलिंग के राउंड-3 में निजी कॉलेजों की स्थिति ने चौंकाया
Jyoti Mahender Bhardwaj | Oct 06, 2026, 11:26 IST
निजी मेडिकल कॉलेजों में बड़ी संख्या में MBBS सीटें खाली बताई जा रही हैं।
NEET UG 2026 काउंसलिंग के तीसरे राउंड के बाद राजस्थान में कई निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की सीटें खाली रह गई हैं। सरकारी कॉलेजों की सीमित सीटों के कारण, निजी कॉलेज विद्यार्थियों के लिए एक आकर्षक विकल्प बने हैं। हालांकि, अधिक शुल्क की वजह से विद्यार्थी इन कॉलेजों को प्राथमिकता नहीं दे रहे हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान में NEET UG 2026 काउंसलिंग का तीसरा राउंड पूरा हुआ।
- निजी मेडिकल कॉलेजों में बड़ी संख्या में MBBS सीटें खाली बताई जा रही हैं।
- निजी कॉलेजों की फीस सरकारी कॉलेजों की तुलना में ज्यादा है।
- राजस्थान की काउंसलिंग में 3,866 MBBS सीटें शामिल थीं।
- आगे की काउंसलिंग में खाली सीटों की स्थिति बदल सकती है।
यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हर साल हजारों विद्यार्थी NEET UG के जरिए MBBS में दाखिले के लिए काउंसलिंग में शामिल होते हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीमित सीटों के कारण निजी कॉलेजों की सीटें भी विद्यार्थियों के लिए एक बड़ा विकल्प रहती हैं। इसके बावजूद निजी कॉलेजों में बड़ी संख्या में सीटें खाली रहना मेडिकल एडमिशन की मौजूदा स्थिति पर सवाल खड़े करता है।
राउंड-3 तक भी नहीं भर पाईं बड़ी संख्या में सीटें
यानी राज्य की MBBS सीटों में निजी मेडिकल कॉलेजों की हिस्सेदारी काफी बड़ी है। ऐसे में इन सीटों का बड़ी संख्या में खाली रहना मेडिकल एडमिशन के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
आखिर निजी कॉलेजों की सीटें क्यों रह गईं खाली?
काउंसलिंग के अलग-अलग राउंड में विद्यार्थियों को कॉलेज और कोर्स चुनने का मौका मिलता है। ऐसे में कई उम्मीदवार पहले राउंड में मिली सीट को अपग्रेड करने की कोशिश करते हैं और अगले राउंड में बेहतर विकल्प का इंतजार करते हैं।
यही वजह है कि तीसरे राउंड तक सीटों की स्थिति अंतिम तस्वीर नहीं मानी जाती। आगे की काउंसलिंग और बची हुई सीटों के लिए होने वाली प्रक्रिया से स्थिति में बदलाव हो सकता है।
निजी कॉलेजों में MBBS की सीटें काफी ज्यादा
ऐसे में अगर इन कॉलेजों में सीटें खाली रह जाती हैं तो इसका असर केवल विद्यार्थियों की काउंसलिंग पर ही नहीं, बल्कि निजी मेडिकल कॉलेजों की एडमिशन प्रक्रिया पर भी पड़ता है।
सरकारी कॉलेजों की सीटों के लिए ज्यादा प्रतिस्पर्धा
राजस्थान में भी सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीटों की संख्या निजी संस्थानों की तुलना में सीमित है। इसलिए अच्छी रैंक वाले उम्मीदवार सरकारी कॉलेजों को प्राथमिकता देते हैं, जबकि बाद की रैंक वाले उम्मीदवारों के सामने निजी कॉलेजों के विकल्प रहते हैं।
आगे क्या होगा?
हालांकि, किसी भी सीट को लेकर अंतिम निर्णय लेने से पहले उम्मीदवारों को संबंधित काउंसलिंग बोर्ड की आधिकारिक सीट मैट्रिक्स, फीस, पात्रता और रिपोर्टिंग नियम जरूर जांचने चाहिए। सीटों की संख्या और उपलब्धता काउंसलिंग के दौरान बदल सकती है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी NEET UG 2026 काउंसलिंग के तीसरे राउंड की प्रक्रिया सितंबर में आगे बढ़ी थी और राजस्थान के लिए अलग से राज्य स्तरीय सीट मैट्रिक्स जारी की गई थी।
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