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Photograph: (the sootr)
News In Short
- राजस्थान के भीलवाड़ा में फर्जी दस्तावेजों से हड़पी बेशकीमती जमीन।
- नामजद 11 आरोपियों में भास्कर के पत्रकार मनीष जैन का नाम भी।
- आरोपियों ने यूआईटी कर्मचारी से मिलकर मूल फाइलें चोरी करवाईं।
- आरोपियों ने खुद को प्रतिबंधित संगठन पीएफआई से जुड़ा होना बताया।
- एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस अब एक्शन मोड पर।
News In Detail
राजस्थान के भीलवाड़ा शहर में फर्जी दस्तावेजों के सहारे बेशकीमती जमीन हड़पने का बड़ा मामला सामने आया है। ​पुलिस ने यूआईटी कर्मचारी समेत 11 लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। गंभीर बात यह है कि आरोपियों में भास्कर डिजिटल के पत्रकार मनीष जैन का नाम भी है। इन पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर करोड़ों की जमीन हड़पने और विरोध करने पर प्रतिबंधित संगठन पीएफआई का डर दिखाकर जान से मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगा है।
सरकारी दफ्तर से फाइल चोरी कर रची गई साजिश
​शिकायतकर्ता सरफुद्दीन शेख और महेश सोनी की ओर से पुलिस अधीक्षक को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार यह पूरा खेल भीलवाड़ा में पंचवटी विस्तार स्थित आराजी संख्या 2412 और 2413 की पुश्तैनी जमीन को हथियाने के लिए रचा गया। आरोप है कि पत्रकार मनीष जैन (भास्कर डिजिटल) और रफीक पठान ने नगर विकास न्यास (यूआईटी) के कर्मचारी नरेश खटीक के साथ मिलकर जमीन की मूल फाइलें चोरी करवाईं। इसके बाद उन फाइलों के आधार पर जाली दस्तावेज तैयार किए गए, जिससे जमीन पर मालिकाना हक जताया जा सके।
​दिल्ली रैली का फायदा उठाकर बोला धावा
​रिपोर्ट के अनुसार 13 दिसंबर 2025 को जब प्रार्थी दिल्ली में एक रैली में शामिल होने गए थे, तब आरोपियों ने लाव-लश्कर और जेसीबी के साथ जमीन पर धावा बोल दिया। आरोपियों ने भूखंड की दीवार ढहा दी और वहां रखा कीमती सामान चोरी कर लिया। जब पीड़ितों के समर्थकों ने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने अपना रौब् दिखाया।
पीएफआई की धमकी से दहलाने की कोशिश
​पीड़ितों का आरोप है कि आरोपियों ने खुद को प्रतिबंधित संगठन पीएफआई (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) से जुड़ा होना बताया। उन्होंने धमकाते हुए कहा कि पीएफआई के स्लीपर सेल पूरे देश में फैले हैं। हम बाहर से शूटर बुलाकर तुम्हारी हत्या करवा देंगे।
मुख्य आरोपी पत्रकार मनीष जैन ने पीड़ित को सरेआम धमकाते हुए कहा कि वह किसी अस्पताल में अपने लिए बैड बुक कर ले, क्योंकि उसके हाथ-पैर तोड़ दिए जाएंगे।
​पत्रकारिता का 'मुखौटा' और सत्ता की 'धौंस'
​पीड़ितों का कहना है कि आरोपी खुलेआम कहते थे कि पुलिस और प्रशासन उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकते, क्योंकि उनकी पहुंच मंत्रियों तक है। जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह ने पहले भी डॉ. शशांक सोमानी जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तियों के भूखंडों के साथ इसी तरह की धोखाधड़ी को अंजाम दिया है।
इन पर दर्ज हुआ मुकदमा
​मनीष जैन (पत्रकार, भास्कर डिजिटल)
​रफीक मोहम्मद पठान
​अहमद अली उर्फ पप्पू कसाई
​दिनेश गोखरू
​उमर टोला
​सिराजुद्दीन
​इकबाल मोहम्मद
​विष्णु सोनी
​मोहम्मद नईम
​सुधांशु जैन उर्फ बॉस
​नरेश खटीक (यूआईटी कर्मचारी)
11 आरोपियों पर इन धाराओं में दर्ज हुआ केस
​मामले की संवेदनशीलता और पीएफआई जैसे संगठनों का नाम आने के बाद कोतवाली पुलिस एक्शन मोड में है। पुलिस ने बीएनएस की धारा 189(2), 329(4), 316(2), 318(4), 352, 351(2), 351(3), 308(5), 303(2), 338, 336(3) और 61(2) के तहत केस दर्ज किया है।
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​जांच के घेरे में सिंडिकेट
फिलहाल मामले की जांच उपनिरीक्षक उगमाराम को सौंपी गई है। पुलिस अब इस बात की तस्दीक कर रही है कि इस सिंडिकेट ने अब तक और कितने लोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाया है। क्या वाकई इनके तार किसी प्रतिबंधित संगठन से जुड़े हैं।
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