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Photograph: (the sootr)
News In Short
- भिवाड़ी अग्निकांड की जांच में चाइना कनेक्शन आया सामने।
- पटाखा बनाने के लिए चीन से मंगवाया जाता था बारूद व कैमिकल।
- चीन से सामान मंगवाने के लिए दिल्ली नेटवर्क का होता था इस्तेमाल।
- पूरे मामले के पीछे पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत की आशंका।
- सवाल कि 34 विभागों की नाक के नीचे कैसे चलता रहा अवैध पटाखों का काम।
News In Detail
सुनील जैन@अलवर
राजस्थान में भिवाड़ी के खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड में अब एक चौंकाने वाला 'चाइना कनेक्शन' सामने आया है। पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ है कि इस अवैध फैक्ट्री में इस्तेमाल होने वाला मुख्य कच्चा माल, बारूद और प्रतिबंधित केमिकल सीधे चीन से इम्पोर्ट किया जा रहा था। खैरथल-तिजारा एसपी मनीष चौधरी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल का गठन किया है।
​चीन से आता था 'मौत' का सामान
​जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी हेमंत सचदेवा और हेमंत शर्मा अपनी अन्य वैध व्यावसायिक लाइसेंसों की आड़ में चीन से केमिकल मंगवाते थे। यह ऐसा केमिकल है, जो भारत में बिना कड़े लाइसेंस के उपलब्ध नहीं है। दिल्ली के बड़े नेटवर्क के जरिए इस रॉ मटेरियल को भिवाड़ी लाया जाता था। यहां रसूखदारों के संरक्षण में बंद पड़ी औद्योगिक इकाइयों को किराए पर लेकर उनमें 'स्टील फैब्रिकेशन' या 'गारमेंट' के नाम पर मौत का बारूद तैयार किया जा रहा था।
​रसूख और संरक्षण की ढाल
​इस पूरे काले साम्राज्य के पीछे पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत की बू आ रही है। आरोपी हेमंत शर्मा भिवाड़ी डीएसटी में तैनात योगेश शर्मा का भाई है। इसी रुतबे के चलते स्थानीय अधिकारी इन फैक्ट्रियों की जांच करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे। यह खुलासा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है कि कैसे 34 विभागों की नाक के नीचे बिना एनओसी के अवैध पटाखों का निर्माण साल भर चलता रहा। जहां पुलिसकर्मियों पर तो कार्रवाई हुई, लेकिन श्रम विभाग और रीको के बड़े अधिकारियों पर अब तक कोई गाज नहीं गिरी है।
​बिहार के मजदूरों का 'सस्ता' शिकार
फैक्ट्री का मैनेजर अभिनंदन तिवारी, जो खुद बिहार का रहने वाला है, इस अवैध धंधे के लिए बिहार के गरीब परिवारों को चारे के रूप में इस्तेमाल करता था। खुशखेड़ा में रहने वाले बिहारी श्रमिकों के पूरे-पूरे परिवार (बच्चों सहित) को इस खतरनाक काम में झोंक दिया जाता था। श्रमिकों को फैक्ट्री के भीतर ही रखा जाता था और राशन देकर उनसे बंधुआ मजदूरों की तरह काम लिया जाता था।
​डीएनए रिपोर्ट के बाद शवों की रवानगी
​16 फरवरी को हुए इस धमाके में सात श्रमिकों के शव इस कदर जल गए थे कि उनकी पहचान करना असंभव था। शनिवार को जयपुर एफएसल से डीएनए रिपोर्ट मैच होने के बाद पूर्वी चंपारण (बिहार) के रहने वाले इन सात श्रमिकों के शव उनके परिजनों को सौंप दिए गए। टपूकड़ा एसडीएम लाखन सिंह ने बताया कि प्रशासन ने सरकारी एंबुलेंस और बसों के जरिए शवों को उनके पैतृक गांव भेजने की व्यवस्था की है। इस बीच, एक और घायल श्रमिकों की मौत हो गई है। अब तक इस भीषण ​अग्निकांड में 8 लोगों ंकी मौत हो चुकी है।
अब आगे क्या?
​पुलिस ने तीनों मुख्य आरोपियों—हेमंत सचदेवा, हेमंत शर्मा और अभिनंदन तिवारी को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में दिल्ली और एनसीआर के कई अन्य साइट्स और प्लॉटों की जानकारी मिली है, जिनका फिजिकल वेरिफिकेशन किया जा रहा है।
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