भिवाड़ी अग्निकांड: फैक्ट्री में 'बारूद के ढेर' पर हो रहा था मौत का खेल, धमाके से पहले बन रहे थे 'मिसाइल' पटाखे

Ashish Bhardwaj | Feb 17, 2026, 14:35 IST
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bhiwadi
Photograph: (the sootr)

राजस्थान में भिवाड़ी के पास खुशखेड़ा में हुए भीषण अग्निकांड में नए तथ्य उजागर हुए हैं। घटना के समय वहां पटाखा बनाने का अवैध काम चल रहा था। बच्चों की पिस्टल में लगने वाली 'मिसाइल'

News In Short

—खुशखेड़ा में जिस फैक्ट्री में अग्निकांड हुआ, वहां होता था पटाखे बनाने का अवैध काम।
—अग्निकांड के समय फैक्ट्री में बन रही थी बच्चों की पिस्टल में लगने वाली 'मिसाइल'।
—घटना के समय फैक्ट्री में पटाखे बनाने के लिए मौजूद था करीब 200 किलो बारूद।
—यह फैक्ट्री गारमेंट के लिए रजिस्टर्ड थी, लेकिन वहां बनते थे चोेरी-छिपे पटाखे।
—अब सरकार इस औद्योगिक क्षेत्र में कराएगी सभी कारखानों का सुरक्षा ऑडिट।

News In Detail

सुनील जैन@अलवर

राजस्थान के भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र के खुशखेड़ा इलाके में हुए भीषण अग्निकांड को लेकर गंभीर खुलासे हुए हैं। यहां गारमेंट जोन की आड़ में चल रही अवैध पटाखा फैक्ट्री सोमवार सुबह अचानक 'मौत का टापू' बन गई। भीषण धमाकों के साथ लगी आग में 7 युवा श्रमिक जिंदा जलकर राख हो गए। बताया जाता है कि इस फैक्ट्री में घटना के समय दिवाली के समय बच्चों की पिस्टल में लगने वाली मिसाइल बन रही थी। जिस समय यह हादसा हुआ, उस समय करीब 200 किलोग्राम बारूद था। वहां काम करने वाले श्रमिकों के बयान और पुलिस जांच में इसका खुलासा हुआ है।

​शुरुआत में तीन धमाके और 200 मीटर दूर उड़ती छत

​चश्मदीदों के अनुसार, सोमवार सुबह जब काम अपनी रफ़्तार पर था, तभी अचानक फैक्ट्री के भीतर एक के बाद एक तीन गगनभेदी धमाके हुए। तीसरा धमाका इतना शक्तिशाली था कि फैक्ट्री के ऊपर लगी 1 टन से ज्यादा भारी लोहे की टीनशेड किसी सूखे पत्ते की तरह हवा में उड़ गई। करीब 200 मीटर दूर बगल वाली फैक्ट्री में जा गिरी।

पड़ोसी फैक्ट्री के गार्ड राकेश ने बताया कि धमाके इतने तेज थे कि उनकी फैक्ट्री के खिड़की-दरवाजों के कांच टूट गए। उन्होंने बदहवास होकर पहले अपने बच्चों और पत्नी को सुरक्षित बाहर निकाला और फिर खुद जान बचाकर भागे।

​200 किलो बारूद और 'किलर' मैनेजमेंट

​पुलिस जांच और जीवित बचे श्रमिक नितेश कुमार के बयान बताते हैं कि फैक्ट्री के भीतर सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। फैक्ट्री के एक हिस्से में 10 टेबल लगी थीं, जहां प्रत्येक टेबल पर 10 किलो से अधिक बारूद रखा रहता था। यहां श्रमिक छोटे प्लास्टिक पाइपों में बारूद भरने का काम करते थे। दूसरे हिस्से में मशीन के जरिए उस बारूद को दबाकर बच्चों की पिस्टल में चलने वाली 'मिसाइल' तैयार की जाती थी। फैक्ट्री का मुख्य दरवाजा हमेशा बंद रहता था और बाहरी व्यक्ति का प्रवेश वर्जित था। गारमेंट जोन में बारूद का यह खेल पूरी तरह अवैध तरीके से चल रहा था।

आपबीती: कांच तोड़कर भागा बाहर

​बिहार के मोतिहारी निवासी नितेश कुमार ने मौत को बेहद करीब से देखा। नितेश ने बताया कि वह मशीन वाले हिस्से में था, जैसे ही धमाका हुआ, चारों तरफ आग की लपटें उठने लगीं। कुछ समझ नहीं आया तो उसने फैक्ट्री का शीशा तोड़ा और बाहर की तरफ छलांग लगा दी। इस दौरान कांच का एक टुकड़ा उसके सिर में जा धंसा, लेकिन उसकी जान बच गई। उसने पुष्टि की कि अंदर भारी मात्रा में बारूद और तैयार माल का स्टॉक रखा था।

​मालिक फरार, पुलिस ने कसी नकेल

​पुलिस अधीक्षक मनीष चौधरी ने बताया कि फैक्ट्री का असली मालिक गाजियाबाद निवासी राजेंद्र कुमार है। वह फिलहाल अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर फरार है। पुलिस ने मृतक के परिजनों की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं (287, 288, 103A, 105 आदि) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत मालिक राजेंद्र कुमार, संचालक हेमंत कुमार शर्मा, सुपरवाइजर अभिनंदन तिवाड़ी और ठेकेदार अजीत सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।

​सरकार का एक्शन और आर्थिक सहायता

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मृतकों के परिजनों को 3-3 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। तिजारा विधायक महंत बालक नाथ ने भी इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पीड़ित परिवारों की मदद का आग्रह किया था।

अब होगी फैक्ट्रियों की कुंडली स्कैन

​इस हृदयविदारक घटना के बाद जिला प्रशासन जाग गया है। प्रशासन ने अगले 7 दिनों के भीतर खुशखेड़ा और आसपास के सभी औद्योगिक क्षेत्रों की जांच के आदेश दिए हैं। इस विशेष अभियान में

​अग्नि सुरक्षा की जांच होगी। साथ ही ​वैधानिक अनुमति और लाइसेंस की समीक्षा की जाएगी। इस दौरान ​श्रमिक सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाली इकाइयों को तुरंत सील कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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