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Photograph: (the sootr)
News In Short
- अमायरा मौत मामले में जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल को राहत।
- स्कूल प्रबंधन के खेद जताने पर सीबीएसई ने दिखाया नरम रुख।
- नीरजा मोदी स्कूल की 9वीं और 10वीं कक्षा की मान्यता बहाल।
- अब स्कूल की 11वीं व 12वीं की संबद्धता दो साल रहेगी निलंबित।
- स्कूल प्रबंधन ने माना कि वह बुलिंग रोकने में रहा नाकाम।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान में जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल में छात्रा अमायरा की मौत के मामले में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएससी) ने नरम रुख अपनाया है। बोर्ड ने 30 दिसंबर के अपने सख्त आदेश में संशोधन करते हुए स्कूल प्रबंधन द्वारा 'खेद' जताने के आधार पर उनकी 9वीं और 10वीं कक्षा की मान्यता को बहाल कर दिया है। हालांकि, स्कूल के लिए मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं, क्योंकि 11वीं और 12वीं की संबद्धता अगले दो साल के लिए निलंबित रहेगी।
​मासूम की जान और प्रबंधन की चूक
​नवंबर 2025 में नीरजा मोदी स्कूल की छात्रा अमायरा की मौत ने पूरे जयपुर शहर को झकझोर कर रख दिया था। इस मामले में स्कूल प्रबंधन पर बुलिंग और छात्रों की सुरक्षा में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप लगे थे। शुरुआती जांच के बाद सीबीएसई ने कड़ा कदम उठाते हुए स्कूल की 9वीं से 12वीं तक की मान्यता रद्द करने का आदेश दिया था। लेकिन हालिया 'व्यक्तिगत सुनवाई' के बाद बोर्ड के सुर बदलते नजर आ रहे हैं।
विद्यार्थियों को राहत या प्रबंधन को माफी
सीबीएसई ने अपने ताजा आदेश में कहा है कि स्कूल अध्यक्ष सौरभ मोदी और प्रिंसिपल इंदु दुबे ने बोर्ड के समक्ष स्वीकार किया है कि वे स्कूल में बुलिंग और उत्पीड़न रोकने में विफल रहे। प्रबंधन ने इस पूरी घटना पर गहरा दुख प्रकट किया है। ​
इसी खेद और विद्यार्थियों के भविष्य का हवाला देते हुए बोर्ड ने निम्नलिखित रियायतें दी हैं:
​कक्षा 9 और 10: इनकी मान्यता तत्काल प्रभाव से बहाल कर दी गई है। वर्तमान में जो छात्र कक्षा 8 में हैं, वे अब कक्षा 9 में प्रवेश ले सकेंगे और 9वीं के छात्र 10वीं की बोर्ड परीक्षा इसी स्कूल से दे पाएंगे।
​छात्रों का भविष्य: बोर्ड ने स्पष्ट किया कि जो छात्र वर्तमान में कक्षा 11 में हैं, वे 2027 में इसी स्कूल से अपनी 12वीं की परीक्षा दे सकेंगे ताकि उनका साल खराब न हो।
​सजा का दूसरा पक्ष: 11वीं और 12वीं पर दो साल का प्रतिबंध रहेगा।
बोर्ड की सख्ती बरकरार
नीरजा मोदी स्कूल की ​सत्र 2026-27 और 2027-28 के लिए 11वीं और 12वीं की संबद्धता निरस्त रहेगी। ​इस अवधि के दौरान स्कूल कक्षा 11 में कोई नया दाखिला नहीं ले पाएगा, न ही अपने स्कूल के 10वीं के छात्रों को 11वीं में प्रमोट कर सकेगा।
​दोबारा मान्यता के लिए स्कूल को सत्र 2028-29 के लिए नए सिरे से ऑनलाइन आवेदन करना होगा। सीबीएसई की रिपोर्ट के अनुसार प्रबंधन ने माना कि कक्षा अध्यापक ने इस बारे में जानकारी नहीं दी थी, जिसे अब हटा दिया गया है। बोर्ड ने माना कि कड़ी कार्रवाई से छात्र और शिक्षक प्रभावित होंगे, इसलिए आदेश में संशोधन किया गया है।
क्या एक 'सॉरी' काफी है
सीबीएसई के इस कदम के बाद शहर के अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच बहस छिड़ गई है। सवाल यह है कि क्या एक मासूम की जान की कीमत केवल एक माफीनामा है? क्या शैक्षणिक संस्थानों में बुलिंग जैसे गंभीर मुद्दों पर इतनी नरमी दिखाना भविष्य के लिए गलत मिसाल पेश नहीं करेगा
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