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Photograph: (the sootr)
News in Short
- जिला जज दिनेश गुप्ता के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का फिर आया फैसला
- सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिनेश गुप्ता की याचिका पर सुनवाई की
- अब दिनेश गुप्ता नहीं करेंगे जूनियर डीजे को रिपोर्ट
- प्रिंसिपल जिला जज के बराबर मिलेंगे वेतन-भत्ते
- दिनेश गुप्ता दूसरी बार सुप्रीम कोर्ट की शरण में गए
- पहले बार-बार के तबादलों को दी थी चुनौती
News in Detail
जयपुर। अड़ानी ग्रुप के खिलाफ आदेश देने वाले जिला जज दिनेश गुप्ता फिर चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट ने फिर उन्हें राहत दी है। शीर्ष कोर्ट के आदेश पर अब उन्हें अपने से जूनियर डीजे को रिपोर्ट नहीं करना पड़ेगा। साथ ही उन्हें लेबर कोर्ट में तैनाती के दौरान प्रिंसिपल जिला जज को मिलने वाले सभी वेतन-भत्ते मिलेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सीधे जयपुर के इंस्पेक्टिंग हाई कोर्ट जज को रिपोर्ट करने को कहा है।
सीजेआई ने की याचिका पर सुनवाई
सीजेआई सूर्यकांत की बैंच ने बुधवार को डीजे दिनेश गुप्ता की याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने उन्हें अपने से जूनियर डीजे को रिपोर्ट करने के स्थान पर जयपुर के इंस्पेक्टिंग हाई कोर्ट जज को रिपोर्ट करने को कहा है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें प्रिसिंपल डीजे को मिलने वाला वेतन व भत्ते देने को भी कहा है।
जयपुर से ब्यावर फिर जालौर तबादला
जिला जज कैडर के अधिकारी दिनेश गुप्ता जयपुर स्थित कर्मशियल कोर्ट में तैनात थे। उन्होंने एक मामले में 5 जुलाई,2025 को अडानी ग्रुप के राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम से 1400 करोड़ रुपए की अवैध वसूली करने का खुलासा किया था। उन्होंने अपने आदेश में अडानी की कंपनी पर 50 लाख रुपए जुर्माना भी लगाया था। ठीक इसी दिन हाई कोर्ट ने जिला जज गुप्ता का तबादला प्रिंसिपल डीजे ब्यावर के पद पर कर दिया था। इसके बाद दो दिसंबर,2025 को उनका तबादला ब्यावर से जालौर कर दिया था।
तबादले के खिलाफ पहुंचे सुप्रीम कोर्ट
जिला जज गुप्ता ने अपने तबादले को लेकर एक्टिंग सीजे एसपी शर्मा को एक प्रतिवेदन दिया। इसमें उन्होंने खुद के कैंसरग्रस्त होने, 10 महीने बाद रिटायर होने तथा पत्नी के ​जल्द ही रिटायर होने का हवाला दिया। इसके आधार पर उन्होंने
जयपुर में ही पोस्टिंग देने को कहा था। लेकिन, सुनवाई नहीं होने पर उन्होंने अपने तबादले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, प्रतिभाशाली जज है, विचार करो
सीजेआई सूर्यकांत,जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस विपुल एम.पंचोली की बैंच ने 19 दिसंबर, 2025 को जिला जज दिनेश गुप्ता की याचिका पर सुनवाई की। उन्होंने टिप्पणी की कि इस बात में कोई संदेह नहीं है दिनेश गुप्ता प्रतिभाशाली हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के एक्टिंग सीजे को गुप्ता के प्रतिवेदन पर दो सप्ताह में सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और नरम रुख अपनाने को कहा। इसके बाद हाई कोर्ट ने 30 दिसंबर को उनका तबादला जयपुर लेबर कोर्ट में कर दिया था।
फिर पहुंचे सुप्रीम कोर्ट
जिला जज दिनेश गुप्ता ने लेबर कोर्ट जयपुर मेट्रो दो में लगाए जाने को यह कहकर फिर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी कि वह प्रिंसिपल डीजे कैडर के अधिकारी हैं। जयपुर मेट्रो-दो की डीजे उनसे जूनियर हैं। लेबर कोर्ट में उन्हें अपने जूनियर के अधीन रहना होगा। उन्हें रिपोर्ट करना न्यायिक अनुशासन के सिद्वांत के विपरीत है। इसके अतिरिक्त उन्हें लेबर कोर्ट में तैनाती के कारण वेतन भी कम मिलेगा। सीजेआई सूर्यकांत ने इस मामले में बुधवार 28 जनवरी 2026 को सुनवाई की।
आदेश और फैसलों से रहें चर्चा में
- 2005 में एक रैली की रोकथाम व लाठीचार्ज के दौरान राष्ट्रीय ध्वज को पैंरो तले रौंदने पर तत्कालीन एसपी व दो आरएएस अफसरों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए।
- 2007 में सार्वजनिक मंच पर बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी को किस करने वाले हॉलीवुड एक्टर रिचर्ड गेर के खिलाफ वारंट जारी किया।
- आरसीए के तत्कालीन चेयरमैन व आईपीएल कमिश्नर रहे ललित मोदी के खिलाफ भी गिरफ्तारी वारंट जारी किया।
- सवाईमाधोपुर की पॉक्सो कोर्ट में तैनाती के दौरान राजस्थान के तत्कालीन डीजीपी कपिल गर्ग को उनकी कोर्ट में हाजिर होना पड़ा।
- 2008 के मुंबई हमले के बाद केंद्रीय मंत्री को नोटिस भेजने के लिए राष्ट्रपति से अनुमति मांगने, कॅमर्शियल कोर्ट में तैनाती के दौरान दो वरिष्ठ आइएएस अधिकारियों को अवमानना मामले में जेल भेजने का आदेश दिया। इसके अलावा सांगानेर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट मामले में कारखानों के खिलाफ आदेश दिए।
- बजरी चोरी व बीमा कंपनियों की मनमानी पर सख्ती दिखाने, शराब घोटाले में मुख्य सचिव को जांच का आदेश देने और जेडीए में निदेशक (विधि) रहते हुए अरबों रुपयों की सरकारी जमीन की बंदरबांट की जांच करने की सलाह देने को लेकर चर्चा में रहे हैं।
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