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Photograph: (the sootr)
News In Short
- राजस्थान विधानसभा में जबर्दस्त हंगामा,सभापति संदीप शर्मा व डोटासरा भिड़े ।
- विधानसभा की वेल में सत्तापक्ष और विपक्ष हुआ आमने सामने।
- कांग्रेस विधायक को समय पूरा होने पर बोलने से रोकने पर हुआ हंगामा।
- सभापति संदीप शर्मा ने खोया आपा, कांग्रे​सियों के लिए सड़क छाप जैसे शब्द बोले।
- जवाब में डोटासरा ने सभापाति की मानसिक जांच कराने की मांग कर डाली।
News In Detail
​Jaipur: राजस्थान विधानसभा गुरुवार को अखाड़े में तब्दील होता दिखा। राजस्थान दुकान और वाणिज्यिक अधिष्ठान संशोधन विधेयक-2026 पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच ऐसा हंगामा हुआ कि दोनों तरफ से मर्यादा की सीमाएं लांघ दी गईं। सभापति की कुर्सी पर बैठे संदीप शर्मा और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बीच हुई जमकर तीखी नोकझोंक हुई। मामला इतना बढ़ा कि सभापति ने कांग्रेस विधायकों को सड़क छाप कह दिया, तो बदले में डोटासरा ने उनकी मानसिक जांच कराने की मांग कर डाली।
​घंटी बजने पर शुरू हुआ विवाद
हंगामे की शुरुआत तब हुई जब कांग्रेस विधायक हरीमोहन शर्मा इस विधेयक पर अपनी बात रख रहे थे। निर्धारित 5 मिनट का समय पूरा होते ही सभापति संदीप शर्मा ने उन्हें रोकने के लिए घंटी बजा दी। इस पर कांग्रेस के गोविंद सिंह डोटासरा ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि बिल पर चर्चा के दौरान विधायक को बीच में रोकने की परंपरा नहीं है। डोटासरा के टोकते ही सभापति संदीप शर्मा अपना आपा खो बैठे और दोनों के बीच सीधी भिड़ंत शुरू हो गई।
​वेल में आमने-सामने हुए विधायक, हाथापाई की आई नौबत
डोटासरा के समर्थन में कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए वेल में आ गए। देखते ही देखते सत्ता पक्ष के विधायक भी संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल के समर्थन में वेल तक पहुंच गए। सदन में एक समय ऐसा लगा कि पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच हाथापाई हो जाएगी।
सत्ता पक्ष से मदन दिलावर, अविनाश गहलोत, और श्रीचंद कृपलानी सहित दर्जनों विधायक वेल में उतरे। मंत्री मदन दिलावर ने कांग्रेस की नारेबाजी को 'बदतमीजी' करार दिया, जिस पर कांग्रेस विधायक हाकम अली उनसे भिड़ गए। इधर, ​विपक्ष से नरेंद्र बुडानिया, रीटा चौधरी और मनीष यादव सहित अन्य विधायकों ने जमकर नारेबाजी की।
​सड़क छाप और नाथी का बाड़ा जैेसे बोल
​हंगामे के बीच सभापति संदीप शर्मा ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कांग्रेस विधायकों को 'सड़क छाप' बता दिया और कहा कि सदन उनकी 'दादागीरी' से नहीं चलेगा। इधर, भाजपा विधायक अविनाश गहलोत ने डोटासरा पर तंज कसते हुए कहा, यह कोई 'नाथी का बाड़ा' नहीं है, जो आपकी मनमर्जी चलेगी। बढ़ते शोर-शराबे के बीच अर्जुनलाल जीनगर ने आसन संभाला, लेकिन स्थिति नियंत्रण से बाहर होते देख सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
​स्पीकर के सामने भी नहीं थमा वाकयुद्ध
आधे घंटे बाद जब विधानसभा स्पीकर वासुदेव देवनानी ने सदन की कमान संभाली तो डोटासरा ने सभापति संदीप शर्मा के आचरण पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी मानसिक स्थिति की जांच करवानी चाहिए। इस पर स्पीकर ने कड़ी नाराजगी जताई और आसन का अपमान न करने की नसीहत दी। जवाब में संदीप शर्मा ने भी अपनी सफाई दी और डोटासरा की ही मानसिक स्थिति की जांच कराने की बात कह दी।
​हंगामे के बीच बिल पारित
स्पीकर देवनानी ने पूरे घटनाक्रम की रिकॉर्डिंग देखने और सुनने के बाद व्यवस्था देने का आश्वासन देकर मामले को शांत कराया। भारी शोर-शराबे और तनातनी के बीच ही सरकार ने अपने संशोधन विधेयक पारित करवा लिए। इसके बाद विधानसभा की कार्यवाही शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
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