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Photograph: (the sootr)
News In Short
- राजस्थान के खाटू श्याम मंदिर में फाल्गुन एकादशी पर भव्य रथ यात्रा निकली।
- रथ को बीकानेर से डेढ़ करोड़ लागत में किया गया था तैयार
- बाबा श्याम 125 किलो चांदी के रथ पर नगर भ्रमण के लिए निकले।
- रथ यात्रा में लाखों श्रद्धालुओं ने बाबा श्याम के दर्शन किए।
- 3 मार्च को चंद्रग्रहण के कारण मंदिर में दर्शन बंद रहेंगे।
News In Detail
राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटूश्यामजी मंदिर में फाल्गुन मेले पर श्याम बाबा की यात्रा निकली गई। यह यात्रा करीब 350 साल पुरानी परंपरा का हिस्सा है। इन दिनों श्याम बाबा का फाल्गुन मेला चल रहा है। मेले की शुरुआत 21 फरवरी से हुई थी। इसका समापन 28 फरवरी को होगा।
डेढ़ करोड़ की लागत से तैयार हुआ रथ
श्याम बाबा का यह रथ पिछले वर्ष नोखा (बीकानेर) में लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया था। रथ निर्माण में एक महीने से अधिक समय लगा। इस रथ को बनाने में प्रतिदिन करीब आठ मजदूरों ने कार्य किया। इसकी राशि गुप्तदान में मिली थी।
रथ को इस तरह डिजाइन किया गया है कि उसे धक्का न लगाना पड़े, इसके लिए इसे जीप की बॉडी पर तैयार किया गया है। भव्य रथ, पारंपरिक रीति-रिवाज और श्रद्धालुओं की आस्था के संग यह आयोजन खाटू धाम में भक्ति और उल्लास का विशेष माहौल बना रहा है।
125 किलो चांदी से बना है रथ
बाबा श्याम की सवारी के लिए तैयार हुआ यह रथ 125 किलो चांदी से बना है। यह रथ बीकानेर जिले के नोखा में तैयार हुआ था। इसे विशेष रूप से यात्रा के दौरान कोई असुविधा न हो, इस उद्देश्य से डिज़ाइन किया गया है।
रथ यात्रा का आयोजन
इस साल यह रथ यात्रा सुबह 11:15 बजे मंदिर के प्रांगण से शुरू हुई। बाबा श्याम नीले घोड़े पर विराजमान थे और उन्होंने भक्तों को दर्शन देते हुए नगर के प्रमुख मार्गों से यात्रा की। रथ यात्रा में भक्तों का भारी जमावड़ा था और लोग बाबा के दर्शन के लिए उमड़े थे। रथ में फूलों की वर्षा की गई।
3 मार्च को दर्शन बंद रहेंगे
फाल्गुन मेले की शुरुआत 21 फरवरी से हुई थी और समापन 28 फरवरी को होगा। चंद्रग्रहण के कारण 3 मार्च को मंदिर में पूरे दिन दर्शन बंद रहेंगे। 4 मार्च की रात 10 बजे से भी दर्शन बंद रहेंगे। इसके बाद 5 मार्च को तिलक और विशेष सेवा-पूजा के बाद शाम 5 बजे से दर्शन फिर से शुरू होंगे।
रथ यात्रा का महत्व
फाल्गुनी एकादशी के अवसर पर खाटूश्यामजी मंदिर में निकली यह रथ यात्रा खाटू नगरी को भक्ति और उत्साह से भर देती है। यह यात्रा न केवल धार्मिक विश्वास को प्रगाढ़ करती है, बल्कि भक्तों के बीच एकता और प्रेम का संदेश भी देती है।
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