GIB के पुनर्वास कार्यक्रम को लगा झटका, डेजर्ट नेशनल पार्क में छोड़े गए गोडावण का लोमड़ी ने किया शिकार

Jageshwar prasad | Oct 21, 2026, 13:29 IST
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जैसलमेर में डेजर्ट नेशनल पार्क में छोड़े गए छह महीने के नर गोडावण को रेगिस्तानी लोमड़ी ने मार डाला।
जैसलमेर में डेजर्ट नेशनल पार्क में छोड़े गए छह महीने के नर गोडावण को रेगिस्तानी लोमड़ी ने मार डाला।

जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में दुर्लभ पक्षी गोडावण के संरक्षण के लिए चलाए जा रहे प्रयोगात्मक पुनर्वास कार्यक्रम को रविवार को बड़ा झटका लगा। जंगल में छोड़े गए छह माह के एक नर गोडावण को रेगिस्तानी लोमड़ी ने मार डाला। इस गोडावण को गत बुधवार को खुले जंगल में छोड़ा गया था।

जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क (Desert National Park) में दुर्लभ पक्षी गोडावण (Great Indian Bustard) के संरक्षण के लिए चलाए जा रहे प्रयोगात्मक पुनर्वास कार्यक्रम को रविवार को बड़ा झटका लगा। जंगल में छोड़े गए छह माह के एक नर गोडावण को रेगिस्तानी लोमड़ी ने मार डाला।

इस गोडावण को गत बुधवार को खुले जंगल में छोड़ा गया था। घटना के बाद भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों और वन विभाग के अधिकारियों ने गोडावणों को जंगल में छोड़ने की प्रक्रिया और सुरक्षा उपायों की समीक्षा करने का निर्णय लिया है।

सैटेलाइट ट्रैकिंग से मिली गोडावण की जानकारी

गोडावण की गतिविधियों पर सैटेलाइट ट्रैकिंग से नजर रखी जा रही थी। सम स्थित प्रजनन केंद्र के कंट्रोल रूम में वैज्ञानिक और वन विभाग की टीम निगरानी कर रही थी। जैसे ही सैटेलाइट सिग्नल रुका, टीम को घटना का संदेह हुआ।

फील्ड स्टाफ मौके पर पहुंचा, लेकिन तब तक लोमड़ी वहां से जा चुकी थी। घटनास्थल पर गोडावण के पंख और अवशेष मिले। टीम ने सैटेलाइट ट्रैकिंग डिवाइस बरामद कर लिया। खून के नमूने जांच के लिए लैब भेजे गए हैं।

गोडावण संरक्षण में बड़ी कामयाबी: 7 महीने के दो पक्षी पहली बार जंगल में छोड़े गए, भूपेंद्र यादव रहे मौजूद | Major Success in Godawan Conservation: Two 7-month-old birds released into the wild for the first time, Bhupender Yadav present
गोडावण संरक्षण को मिली कामयाबी, राज्य पक्षी पहली बार जंगल में, भूपेंद्र यादव रहे मौजूद
04 Oct 2026 ,
By Ashish Bhardwaj
गोडावण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, दो गोडावणों को रामदेवरा गोडावण ब्रीडिंग सेंटर से जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में आजाद किया गया। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत लगभग 10 साल पहले हुई थी, जिसमें गोडावणों को जंगल में जीवित रहने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। उनकी सेहत जानने के बाद उन्हें आजाद किया गया और जीपीएस टैग भी लगाया गया है।
गोडावण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, दो गोडावणों को रामदेवरा गोडावण ब्रीडिंग सेंटर से जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में आजाद किया गया। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत लगभग 10 साल पहले हुई थी, जिसमें गोडावणों को जंगल में जीवित रहने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। उनकी सेहत जानने के बाद उन्हें आजाद किया गया और जीपीएस टैग भी लगाया गया है।

शेष गोडावणों को छोड़ने से पहले होगी समीक्षा

घटना के बाद जंगल में गोडावणों को दोबारा स्थापित करने की योजना के सुरक्षा उपायों की समीक्षा की जा रही है। कार्यक्रम के तहत आगे छोड़े जाने वाले सात गोडावणों को अब सुरक्षा व्यवस्था और संरक्षण संबंधी प्रोटोकॉल की विस्तृत समीक्षा के बाद ही जंगल में छोड़ा जाएगा।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नियमित गश्त और सुरक्षा उपायों के बावजूद यह घटना हुई। रेगिस्तानी लोमड़ी डेजर्ट नेशनल पार्क के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है और जंगल में शिकारी जीवों से खतरा बना रहता है।


पहले चरण में 11 गोडावणों को जंगल में छोड़ने की योजना

गोडावणों की संख्या बढ़ाने और उन्हें प्राकृतिक आवास में फिर से स्थापित करने के उद्देश्य से प्रयोगात्मक पुनर्वास कार्यक्रम का पहला चरण शुरू किया गया है। इसके तहत लगभग छह माह की उम्र के 11 कैप्टिव ब्रीड यानी कैद में प्रजनन के जरिए जन्मे गोडावणों को जंगल में छोड़ने के लिए चिह्नित किया गया था।

चार अक्टूबर को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने जैसलमेर के सम क्षेत्र स्थित सुदासरी रिलीज साइट पर सैटेलाइट टैग लगाए गए दो नर गोडावणों को जंगल में छोड़ने की शुरुआत की थी। दोनों पक्षियों का जन्म डब्ल्यूआईआई के सम स्थित प्रजनन केंद्र में हुआ था। इसके बाद गत बुधवार को इसी स्थल पर दो और नर गोडावण छोड़े गए थे। इनमें से एक की रविवार को रेगिस्तानी लोमड़ी के हमले में मौत हो गई।


शेष पक्षियों की गतिविधियों पर रखी जा रही नजर

वन विभाग के अनुसार, जंगल में छोड़े गए अन्य तीन गोडावण सुरक्षित हैं और डेजर्ट नेशनल पार्क में अलग-अलग स्थानों पर विचरण कर रहे हैं। सैटेलाइट ट्रैकिंग के जरिए उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

यह घटना स्पष्ट करती है कि कैद में पले गोडावणों को प्राकृतिक वातावरण में स्थापित करना चुनौतीपूर्ण कार्य है। गंभीर रूप से संकटग्रस्त इस प्रजाति की आबादी बढ़ाने के प्रयासों में अब सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।


WII निदेशक ने क्या कहा?

भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक गोबिंद सागर भारद्वाज ने कहा कि जंगल में शिकार होना प्राकृतिक प्रक्रिया है। रेगिस्तानी लोमड़ी इस पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि फील्ड टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। यह घटना गोडावण संरक्षण अभियान का मनोबल कमजोर नहीं करेगी। बल्कि टीम को और मजबूती से आगे बढ़ाएगी।
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