गोडावण संरक्षण को मिली कामयाबी, राज्य पक्षी पहली बार जंगल में, भूपेंद्र यादव रहे मौजूद
Ashish Bhardwaj | Oct 04, 2026, 18:23 IST
गोडावण को पहली बार जंगल में छोड़ा
गोडावण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, दो गोडावणों को रामदेवरा गोडावण ब्रीडिंग सेंटर से जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में आजाद किया गया। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत लगभग 10 साल पहले हुई थी, जिसमें गोडावणों को जंगल में जीवित रहने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। उनकी सेहत जानने के बाद उन्हें आजाद किया गया और जीपीएस टैग भी लगाया गया है।
राजस्थान राज्य पक्षी गोडावण को बचाने की मुहिम में बड़ी कामयाबी मिली है। रामदेवरा गोडावण ब्रीडिंग सेंटर के 2 गोडावण पहली बार जंगल में छोड़े गए हैं। रविवार को इन्हें जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में आजाद किया गया। बंद सेंटर में पले गोडावण पहली बार अपने प्राकृतिक घर लौटे हैं। इसे गोडावण संरक्षण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
रविवार को दोनों गोडावण सम क्षेत्र की सुदासरी रेंज में लाए गए। लाते समय इनकी आंखों पर काली पट्टी बांधी गई थी। मौके पर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव मौजूद थे। वन राज्य मंत्री संजय शर्मा भी वहां थे।
भूपेंद्र यादव जैसलमेर में इस खास पल के गवाह बने। जैसे ही पट्टी हटाई गई, दोनों गोडावण पहले हड़बड़ाए। फिर कुछ ही पल में दोनों खुले आसमान में उड़ गए। डेजर्ट नेशनल पार्क जैसलमेर का यही इलाका अब इनका नया घर होगा। यहां इन्हें बिना किसी मदद के अपने दम पर जीना है।
दोनों गोडावण की उम्र करीब 7 महीने है। इनकी ऊंचाई करीब 1 फीट है। दोनों का वजन लगभग 5 किलो है।
इन दोनों गोडावण की कहानी फरवरी 2026 से शुरू होती है। तब जंगल से गोडावण के दो अंडे ब्रीडिंग सेंटर लाए गए थे। इन्हीं अंडों से ये दोनों चूजे निकले।सेंटर में इनकी देखभाल हुई। फिर इन्हें जंगल में जीने लायक बनाने की तैयारी शुरू हुई। यह तैयारी एक खास टनल में हुई।
Godawan rewilding का मतलब है पक्षी को दोबारा जंगल में जीना सिखाना। रामदेवरा सेंटर में इसके लिए 9.25 करोड़ रुपए की री-वाइल्डिंग टनल बनी है। इसमें 10 गोडावण को 3 महीने तक ट्रेनिंग दी गई।
उन्हें अकेले रहना और शिकार करना सिखाया गया। टनल में उन्होंने खुले आसमान में उड़ने का अभ्यास किया। खुद भोजन तलाशना और प्राकृतिक माहौल में रहना भी सीखा। इन 10 में से अभी 2 को जंगल में छोड़ा गया है।
छोड़ने से पहले दोनों की सेहत की जांच की गई। उनके व्यवहार को भी बारीकी से परखा गया। जांच में दोनों पक्षी पूरी तरह स्वस्थ पाए गए। इसके बाद ही इन्हें जंगल में छोड़ने का फैसला लिया गया।
दोनों गोडावण की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। दोनों के शरीर पर GPS टैग लगाए गए हैं। वैज्ञानिक इनके जरिए दोनों पर लगातार नजर रखेंगे।देखा जाएगा कि गोडावण जंगल में किस तरह उड़ रहे हैं। वे भोजन की तलाश कैसे कर रहे हैं, यह भी परखा जाएगा। वे किस इलाके में घूम रहे हैं, इस पर भी नजर रहेगी। उनका सामान्य व्यवहार कैसा है, यह भी दर्ज होगा।
कोशिश होगी कि गोडावण बिजली की हाईटेंशन लाइनों के पास न जाएं। उन्हें शिकारियों के संपर्क से दूर रखने पर भी ध्यान रहेगा। ट्रैकिंग से मिलने वाले आंकड़ों का वैज्ञानिक अध्ययन करेंगे। इससे सेंटर में तैयार हो रहे दूसरे गोडावणों के लिए योजना बनेगी। उन्हें भी सुरक्षित तरीके से जंगल में छोड़ा जा सकेगा।यानी ये दो गोडावण आगे की पूरी मुहिम की राह तय करेंगे।
भारतीय वन्यजीव संस्थान और वन विभाग करीब 10 साल से इसमें जुटे हैं। काम पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से हो रहा है। 2016 में इंटीग्रेटेड जीआईबी (GIB – Great Indian Bustard) कंजर्वेशन प्रोजेक्ट की नींव रखी गई। 2019 में राजस्थान में बड़े स्तर पर गोडावण ब्रीडिंग प्रोग्राम शुरू हुआ। इसकी शुरुआत जैसलमेर के सम में एक अस्थायी ब्रीडिंग सेंटर से हुई।
इसके बाद रामदेवरा में आधुनिक ब्रीडिंग सेंटर तैयार किया गया। मार्च 2023 में यहां कैप्टिव ब्रीडिंग से पहला चूजा पैदा हुआ। कैप्टिव ब्रीडिंग यानी सेंटर में कृत्रिम तरीके से पक्षी पालना।2025 में पक्षियों को जंगल में रहने की ट्रेनिंग शुरू हुई। अब इसी कड़ी में पहली बार गोडावण जंगल में छोड़े गए हैं।
गोडावण थार का दुर्लभ और संकटग्रस्त पक्षी है। यह राजस्थान का राज्य पक्षी भी है। Great Indian Bustard release को इस मुहिम का अहम कदम माना जा रहा है। अब सबकी नजर इन दो गोडावण पर है। क्या ये अपने दम पर जंगल में टिक पाएंगे? इसका जवाब आने वाले महीनों की GPS ट्रैकिंग से मिलेगा।
डेजर्ट नेशनल पार्क में कैसे छोड़े गए?
भूपेंद्र यादव जैसलमेर में इस खास पल के गवाह बने। जैसे ही पट्टी हटाई गई, दोनों गोडावण पहले हड़बड़ाए। फिर कुछ ही पल में दोनों खुले आसमान में उड़ गए। डेजर्ट नेशनल पार्क जैसलमेर का यही इलाका अब इनका नया घर होगा। यहां इन्हें बिना किसी मदद के अपने दम पर जीना है।
कितने बड़े हैं दोनों गोडावण
अंडे से आसमान तक का सफर
री-वाइल्डिंग टनल में क्या सिखाया?
उन्हें अकेले रहना और शिकार करना सिखाया गया। टनल में उन्होंने खुले आसमान में उड़ने का अभ्यास किया। खुद भोजन तलाशना और प्राकृतिक माहौल में रहना भी सीखा। इन 10 में से अभी 2 को जंगल में छोड़ा गया है।
सेहत जांच में पास, तब मिली आजादी
GPS टैग से होगी लगातार निगरानी
हाईटेंशन लाइन और शिकारियों से बचाव
2016 से चल रही गोडावण संरक्षण मुहिम
रामदेवरा सेंटर में कब क्या हुआ
थार के लिए क्यों खास है यह कदम?
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