आबरा का डाबरा गिली-गिली छू, 50 गार्डों के पहरे से नन्हा गोडावण चंपत
Jageshwar prasad | Apr 30, 2026, 10:32 IST
Photograph: (the sootr)
जैसलमेर से गुजरात के नलिया भेजे गए अंडे से जन्मा गोडावण चूजा 50 गार्डों की निगरानी के बावजूद 11 दिनों से लापता है। 26 मार्च को जन्मा यह चूजा सेरोगेसी तकनीक का हिस्सा था। सुरक्षा में चूक के कारण शिकारी जानवर द्वारा शिकार की आशंका जताई जा रही है।
News In Short
- गुजरात के कच्छ में जैसलमेर से लाए गए अंडे से जन्मा गोडावण चूजा रहस्यमयी ढंग से गायब।
- 50 गार्ड और वॉच टावरों की 24 घंटे निगरानी के बावजूद 18 अप्रैल से नहीं दिखा चूजा।
- वन विभाग को अंदेशा, सुरक्षा घेरा तोड़कर सियार या जंगली बिल्ली ने चूजे को शिकार बनाया।
- गुजरात में गोडावण की आबादी बढ़ाने के लिए जैसलमेर से अंडा भेजकर करवाई गई थी हैचिंग।
- वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट्स ने इतनी कड़ी सुरक्षा के बीच चूजे के लापता होने पर जांच की मांग की।
News In Detail
जैसलमेर से कच्छ का सफर
वैज्ञानिकों ने जैसलमेर के सम स्थित गोडावण ब्रीडिंग सेंटर से एक फर्टाइल अंडा चुना। 21 मार्च 2026 को इस अंडे को एक विशेष पोर्टेबल इनक्यूबेटर में रखकर करीब 770 किलोमीटर दूर गुजरात के नलिया ले जाया गया। यह सफर 19 घंटे तक बिना रुके तय किया गया ताकि अंडे का तापमान बना रहे। वहां, इस अंडे को एक जंगली मादा गोडावण के घोंसले में सफलतापूर्वक रख दिया गया। 26 मार्च को जब इस अंडे से चूजा बाहर निकला, तो इसे संरक्षण की दुनिया में एक जीत के रूप में देखा गया।
सुरक्षा का अभेद्य चक्र और उसकी नाकामी
इतनी मुस्तैदी के बावजूद, 18 अप्रैल 2026 के बाद से यह चूजा अपनी सेरोगेट मां (GPS टैग वाली मादा गोडावण) के साथ नहीं देखा गया। पिछले 11 दिनों से लगातार तलाशी अभियान जारी है, लेकिन अब तक चूजे का कोई सुराग नहीं मिला है।
शिकारी जानवरों का अंदेशा
गोडावण संरक्षण
हाईटेंशन लाइनें: बिजली के तारों से टकराकर इनकी सबसे ज्यादा मौतें होती हैं।
प्राकृतिक शिकार: जंगली कुत्ते और शिकारी जानवर इनके अंडों और बच्चों को नुकसान पहुंचाते हैं।
आवास का कम होना: चारागाहों की कमी और खेती के बढ़ते विस्तार से इनका घर छिन रहा है।
गुजरात का यह प्रयोग सफल होता तो यह गोडावण की आबादी बढ़ाने के लिए एक नई उम्मीद की किरण होती, लेकिन इस घटना ने विशेषज्ञों को फिर से अपनी सुरक्षा रणनीतियों पर विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। फिलहाल, अधिकारी इसकी आधिकारिक पुष्टि करने से कतरा रहे हैं, लेकिन 11 दिन का लंबा समय इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि चूजा अब इस दुनिया में नहीं है।
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