राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर में अवैध निर्माण की जांच के लिए अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी
Raghvendra Singh Rathore | Oct 02, 2026, 19:13 IST
जयपुर के ऐतिहासिक परकोटे में अवैध निर्माण की घटनाएं काफी समय से चिंता का विषय बनी हुई हैं। हाल में, राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे अगले दो सप्ताह में एक रिपोर्ट पेश करें। साथ ही, पिछले पांच वर्षों में अवैध निर्माणों के खिलाफ की गई कार्रवाइयों का भी विवरण मांगा गया है।
समझें क्या है पूरा मामला
- कागजों में हेरिटेज सुरक्षित, जमीन पर हवेलियां ध्वस्त होती रहीं।
- जियो-टैगिंग और निगरानी के दावों के बीच परकोटे में अवैध निर्माण जारी रहे।
- पांच साल में कितने अवैध निर्माण हुए, हाईकोर्ट अब पूरा हिसाब मांगेगा।
- नोटिस के बाद भी निर्माण चलता रहा, अब हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट।
- UNESCO को निगरानी की जानकारी दी गई, फिर भी हवेलियां टूटती रहीं।
अब राजस्थान हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले पर स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने जेडीए और नगर निगम से परकोटे में हुए अवैध और नियम विरुद्ध निर्माण का सर्वे कर दो सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने को कहा है। साथ ही पिछले पांच साल में अवैध निर्माण के खिलाफ हुई सीलिंग, डिमोलिशन, प्रॉसिक्यूशन और पेनल्टी की कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड भी मांगा है।
UNESCO को दी गई थी जियो-टैगिंग की जानकारी
रिपोर्ट में करीब 600 प्रमुख हेरिटेज प्रॉपर्टीज की इन्वेंट्री तैयार होने और बाकी संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार किए जाने की जानकारी भी दी गई थी। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि जब निगरानी का सिस्टम मौजूद था, तो परकोटे में पुरानी हवेलियों को तोड़ने और नए निर्माण के मामले लगातार सामने कैसे आते रहे।
मई में कई जगह सामने आया निर्माण
लाड़ी वालों का रास्ता स्थित एक मकान में पुरानी हवेली तोड़कर नया निर्माण किए जाने के मामले में संपत्ति सील करने की कार्रवाई भी की गई। अधिकारियों के अनुसार इससे पहले नोटिस जारी किए जा चुके थे।
पुंडरिक जी की हवेली भी नहीं बच सकी
अधिकारियों ने मामले में जिम्मेदार लोगों की जांच की बात कही थी। यह मामला शिकायत मिलने और मौके पर कार्रवाई होने के बीच के अंतर पर भी सवाल खड़े करता है।
नोटिस के बाद भी पांचवीं मंजिल तक निर्माण
कमर्शियल निर्माण को लेकर भी शिकायतें
नगर निगम की ओर से कहा गया कि जरूरी अनुमति और एनओसी के बिना किए गए निर्माण के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। वहीं जर्जर या असुरक्षित इमारतों के पुनर्निर्माण के लिए भी संबंधित अनुमति लेना जरूरी बताया गया।
UNESCO की चिंता भी सामने आ चुकी
1 दिसंबर तक देनी है अपडेटेड रिपोर्ट
इसी बीच हाईकोर्ट ने भी पिछले पांच साल का रिकॉर्ड मांग लिया है। जेडीए और नगर निगम को बताना होगा कि कितने अवैध निर्माण सामने आए, कितनी संपत्तियां सील हुईं, कितने निर्माण हटाए गए और कितने मामलों में कानूनी कार्रवाई या जुर्माना लगाया गया।
अब पांच साल का रिकॉर्ड खोलेगा पूरी तस्वीर
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