जयपुर में ₹350 करोड़ का नया ट्रैफिक सिस्टम, पुराने 62 कैमरों का हिसाब कहां? रखरखाव के भी करोड़ों के टेंडर
Raghvendra Singh Rathore | Oct 31, 2026, 07:43 IST
जयपुर में JDA ने ₹350 करोड़ का नया AI ट्रैफिक सिस्टम प्रस्तावित किया है।
जयपुर में JDA ने ₹350 करोड़ का नया AI ट्रैफिक सिस्टम प्रस्तावित किया है। पुराने रिकॉर्ड में 25 चौराहों पर 62 कैमरे लगाने का जिक्र है। फरवरी 2026 में पुराने सिस्टम के मेंटेनेंस के लिए ₹4.70 करोड़ का टेंडर भी निकला। पुराने उपकरणों की उपयोगिता और नई खरीद के संभावित दोहराव पर सवाल हैं।
राजस्थान की राजधानी जयपुर में ट्रैफिक सुधारने के लिए एक बार फिर बड़े स्तर पर सरकारी निवेश की तैयारी है। जयपुर विकास प्राधिकरण ने 350 करोड़ रुपए की लागत से इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) और एडैप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम (ATCS) विकसित करने का टेंडर जारी किया है।
नए सिस्टम में AI कैमरे, स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल, सेंसर और सेंट्रल कंट्रोल रूम जैसी सुविधाएं प्रस्तावित हैं। दावा है कि इससे शहर में ट्रैफिक जाम कम होगा और यातायात नियम तोड़ने वाले वाहनों की पहचान आसान होगी। लेकिन इस नई परियोजना के साथ पुरानी व्यवस्था के खर्च और उसके उपयोग का सवाल भी जुड़ गया है। JDA के आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि शहर में करीब दो दशक पहले ही कैमरों और ट्रैफिक के दबाव के अनुसार सिग्नल संचालित करने वाले सिस्टम लगाने की शुरुआत हो चुकी थी।
अब सवाल है कि पुराने सिस्टम पर किए गए निवेश का कितना लाभ मिला, कितने कैमरे और सिग्नल अभी चालू हैं और नए प्रोजेक्ट में उनका इस्तेमाल होगा या उन्हें बदला जाएगा।
JDA के पुराने आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, वर्ष 2007 और 2008 में सी-डैक के माध्यम से शहर के 14 चौराहों पर 40 कैमरे लगाए गए थे। दोनों चरणों की परियोजना में कैमरों के साथ यूपीएस, कंट्रोल सिस्टम और अन्य जरूरी सुविधाओं को मिलाकर लगभग 3 करोड़ रुपए की लागत दर्ज है। इनमें पांच बत्ती, अजमेरी गेट, खासा कोठी, रामनिवास बाग, सांगानेरी गेट और ट्रांसपोर्ट नगर जैसे महत्वपूर्ण स्थान शामिल थे।
इसके बाद वर्ष 2013 में जेएलएन मार्ग के 11 चौराहों पर 22 कैमरों और एडैप्टिव ट्रैफिक सिस्टम की परियोजना पूरी की गई। इसकी लागत 2.70 करोड़ रुपए दर्ज है।जेडीए सर्किल, गांधी सर्किल, राजस्थान यूनिवर्सिटी, जवाहर सर्किल, बजाज नगर और एसएमएस अस्पताल के आसपास के चौराहे इस परियोजना में शामिल थे।
JDA के इसी पुराने दस्तावेज में वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान 13 स्थानों पर ट्रैफिक लाइट संबंधी कार्यों के लिए 12.55 करोड़ रुपए के व्यय का उल्लेख है। इसके अतिरिक्त अशोक मार्ग और टोंक रोड के चौराहों पर ATCS तथा कंट्रोल रूम के अपग्रेडेशन के लिए 3.90 करोड़ रुपए की वित्तीय स्वीकृति दर्ज थी।
JDA ने 2 फरवरी 2026 को जयपुर के ट्रैफिक सिग्नल और ATCS सिस्टम के रखरखाव के लिए 4 करोड़ 70 लाख 58 हजार रुपए का टेंडर जारी किया था। यह टेंडर अधिशासी अभियंता, विद्युत-तृतीय की ओर से 12 महीने की अवधि के लिए निकाला गया। इससे पहले अगस्त 2021 में भी इसी तरह के रखरखाव कार्य के लिए 3 करोड़ 37 लाख 76 हजार रुपए का टेंडर जारी हुआ था।
बड़ा सवाल है कि फरवरी 2026 के रखरखाव टेंडर में शामिल पुराने ट्रैफिक उपकरण क्या नए 350 करोड़ रुपए के सिस्टम में भी उपयोग किए जाएंगे? यदि कुछ उपकरण तकनीकी रूप से उपयोगी हैं, तो उन्हें नए सिस्टम से जोड़ने की क्या योजना है?
JDA ने नई परियोजना का टेंडर जारी किया था। इसका नंबर JDA-IT-10-2026-27 है। टेंडर में मास्टर सिस्टम इंटीग्रेटर का चयन कर नए सिस्टम की डिजाइनिंग, स्थापना, इंटीग्रेशन, संचालन और रखरखाव कराया जाना है। टेंडर के शीर्षक में संचालन और रखरखाव के लिए 10 साल की अवधि दी गई है। जबकि JDA के पोर्टल पर कुल कार्य अवधि 144 महीने यानी 12 साल दर्ज है।
JDA के सलाहकार आर.के. शर्मा ने बताया कि नई परियोजना पुराने प्रस्तावों की जगह लेगी। उनके अनुसार, शुरुआत में करीब 330 स्थानों को AI आधारित ट्रैफिक सिस्टम से जोड़ा जाएगा। आगे इस व्यवस्था को 500 स्थानों तक बढ़ाने की संभावना है।
उन्होंने बताया कि AI कैमरे वाहनों की आवाजाही और ट्रैफिक दबाव की निगरानी करेंगे। सेंसर से मिले आंकड़ों के आधार पर सिग्नल का समय अपने आप बदला जा सकेगा। नए सिस्टम से रेड लाइट जंपिंग, गलत दिशा में वाहन चलाने, तेज रफ्तार और लेन संबंधी उल्लंघनों की पहचान भी प्रस्तावित है।
इस परियोजना में चौराहों की संख्या को लेकर भी अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। जुलाई में सामने आई योजना में शहर के 423 प्रमुख चौराहों में से 253 स्थानों पर AI आधारित कैमरे लगाने की बात कही गई थी।
डीसीपी ट्रैफिक योगेश गोयल ने बताया था कि पुलिस ने करीब 352 स्थानों का सर्वे कर रिपोर्ट JDA को भेज दी है। इस रिपोर्ट में अलग-अलग स्थानों पर ट्रैफिक नियंत्रण, नियमों के उल्लंघन और सुरक्षा आवश्यकताओं के आधार पर कैमरों की जरूरत बताई गई है।
गोयल के अनुसार, JDA प्रस्ताव का परीक्षण कर आवश्यक बजट का आकलन कर रहा था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि ट्रैफिक पुलिस के पास इस तरह का बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए अलग बजट नहीं है और उसे JDA तथा अन्य एजेंसियों पर निर्भर रहना पड़ता है।
नई परियोजना में AI के आधार पर सिग्नल टाइमिंग बदलने को एक महत्वपूर्ण तकनीकी सुधार बताया जा रहा है। लेकिन JDA के पुराने आधिकारिक दस्तावेज में भी ATCS को ऐसा सिस्टम बताया गया था, जो वाहनों की संख्या के अनुसार सिग्नल टाइमिंग को नियंत्रित कर सकता है।
दस्तावेज में वाहनों की पहचान करने वाले कैमरे, ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क और सेंट्रल कंट्रोल रूम का भी उल्लेख है। इसका अर्थ यह नहीं कि पुराने ATCS और नए AI सिस्टम की तकनीकी क्षमता समान है। नए सिस्टम में निगरानी, डेटा विश्लेषण और अन्य सेवाओं का दायरा काफी व्यापक प्रस्तावित है।
नई परियोजना केवल ट्रैफिक सिग्नल संचालित करने तक सीमित नहीं है। इसमें नंबर प्लेट की पहचान, ई-चालान सिस्टम से जुड़ाव और केंद्रीय कमांड सेंटर के माध्यम से शहरभर के ट्रैफिक की निगरानी जैसी सुविधाएं प्रस्तावित हैं। AI आधारित कैमरों से सड़कों पर जलभराव और गड्ढों जैसी समस्याओं का पता लगाने की भी योजना है।
जयपुर की इस परियोजना से दो सवाल सीधे जुड़े हैं। पहला, नए सिस्टम से आम लोगों को ट्रैफिक जाम से कितनी राहत मिलेगी? दूसरा, पहले लगाए गए उपकरणों और नए निवेश का सही उपयोग कैसे सुनिश्चित होगा? पुरानी कैमरा परियोजनाओं, सिग्नल के रखरखाव और नए 350 करोड़ रुपए के प्रस्ताव के बीच उपकरणों तथा कार्यों के जांच आवश्यक है।
नए सिस्टम में AI कैमरे, स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल, सेंसर और सेंट्रल कंट्रोल रूम जैसी सुविधाएं प्रस्तावित हैं। दावा है कि इससे शहर में ट्रैफिक जाम कम होगा और यातायात नियम तोड़ने वाले वाहनों की पहचान आसान होगी। लेकिन इस नई परियोजना के साथ पुरानी व्यवस्था के खर्च और उसके उपयोग का सवाल भी जुड़ गया है। JDA के आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि शहर में करीब दो दशक पहले ही कैमरों और ट्रैफिक के दबाव के अनुसार सिग्नल संचालित करने वाले सिस्टम लगाने की शुरुआत हो चुकी थी।
अब सवाल है कि पुराने सिस्टम पर किए गए निवेश का कितना लाभ मिला, कितने कैमरे और सिग्नल अभी चालू हैं और नए प्रोजेक्ट में उनका इस्तेमाल होगा या उन्हें बदला जाएगा।
JDA के पुराने रिकॉर्ड में 62 कैमरे, परियोजना लागत 5.70 करोड़
इसके बाद वर्ष 2013 में जेएलएन मार्ग के 11 चौराहों पर 22 कैमरों और एडैप्टिव ट्रैफिक सिस्टम की परियोजना पूरी की गई। इसकी लागत 2.70 करोड़ रुपए दर्ज है।जेडीए सर्किल, गांधी सर्किल, राजस्थान यूनिवर्सिटी, जवाहर सर्किल, बजाज नगर और एसएमएस अस्पताल के आसपास के चौराहे इस परियोजना में शामिल थे।
JDA के इसी पुराने दस्तावेज में वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान 13 स्थानों पर ट्रैफिक लाइट संबंधी कार्यों के लिए 12.55 करोड़ रुपए के व्यय का उल्लेख है। इसके अतिरिक्त अशोक मार्ग और टोंक रोड के चौराहों पर ATCS तथा कंट्रोल रूम के अपग्रेडेशन के लिए 3.90 करोड़ रुपए की वित्तीय स्वीकृति दर्ज थी।
फरवरी में पुराने सिस्टम के लिए 4.70 करोड़ का टेंडर
बड़ा सवाल है कि फरवरी 2026 के रखरखाव टेंडर में शामिल पुराने ट्रैफिक उपकरण क्या नए 350 करोड़ रुपए के सिस्टम में भी उपयोग किए जाएंगे? यदि कुछ उपकरण तकनीकी रूप से उपयोगी हैं, तो उन्हें नए सिस्टम से जोड़ने की क्या योजना है?
₹350 करोड़ के टेंडर में 10 साल की सेवा, रिकॉर्ड में 12 साल की अवधि
JDA सलाहकार बोले थे—330 स्थानों से शुरुआत, 500 तक विस्तार
उन्होंने बताया कि AI कैमरे वाहनों की आवाजाही और ट्रैफिक दबाव की निगरानी करेंगे। सेंसर से मिले आंकड़ों के आधार पर सिग्नल का समय अपने आप बदला जा सकेगा। नए सिस्टम से रेड लाइट जंपिंग, गलत दिशा में वाहन चलाने, तेज रफ्तार और लेन संबंधी उल्लंघनों की पहचान भी प्रस्तावित है।
ट्रैफिक पुलिस ने 352 स्थानों का सर्वे किया, पहले 253 चौराहों का प्रस्ताव था
डीसीपी ट्रैफिक योगेश गोयल ने बताया था कि पुलिस ने करीब 352 स्थानों का सर्वे कर रिपोर्ट JDA को भेज दी है। इस रिपोर्ट में अलग-अलग स्थानों पर ट्रैफिक नियंत्रण, नियमों के उल्लंघन और सुरक्षा आवश्यकताओं के आधार पर कैमरों की जरूरत बताई गई है।
गोयल के अनुसार, JDA प्रस्ताव का परीक्षण कर आवश्यक बजट का आकलन कर रहा था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि ट्रैफिक पुलिस के पास इस तरह का बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए अलग बजट नहीं है और उसे JDA तथा अन्य एजेंसियों पर निर्भर रहना पड़ता है।
पुराने सिस्टम में भी सिग्नल अपने आप बदलने की व्यवस्था थी
दस्तावेज में वाहनों की पहचान करने वाले कैमरे, ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क और सेंट्रल कंट्रोल रूम का भी उल्लेख है। इसका अर्थ यह नहीं कि पुराने ATCS और नए AI सिस्टम की तकनीकी क्षमता समान है। नए सिस्टम में निगरानी, डेटा विश्लेषण और अन्य सेवाओं का दायरा काफी व्यापक प्रस्तावित है।
नया सिस्टम गड्ढों और जलभराव की जानकारी भी देगा
पुराने कैमरों का रिकॉर्ड और नई खरीद का हिसाब जरूरी
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