बिना कोर्स शुरू हुए ही मेडिकल शिक्षकों की भर्ती की तैयारी, छुट्टी के दिन ही निपटाई गई पूरी प्रक्रिया

राजस्थान में जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज में बिना कोर्स शुरू ही शिक्षकों की भर्ती हो रही है। यह मामला रेडियोथेरेपी टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा कोर्स के लिए शिक्षकों की भर्ती का है।

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Ashish Bhardwaj
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Photograph: (the sootr)

News In Short

  • जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज में बिना कोर्स शुरू ही शिक्षकों की भर्ती की तैयारी।
  • मामला रेडियोथेरेपी टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा कोर्स के लिए शिक्षकों की भर्ती का।
  • एक ही दिन में आवेदन, स्क्रूटनी और सिफारिश की फाइल दौड़ गई।
  • फिलहाल किसी भी मेडिकल कॉलेज में रेडियोथेरेपी टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा कोर्स नहीं।
  • शिक्षकों की भर्ती के लिए अभी तक कोई आधिकारिक अनुमति प्राप्त नहीं हुई 

News In Detail

Jaipur: राजस्थान में जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज में भर्ती को लेकर बड़ा खेल सामने आया है। मामला रेडियोथेरेपी टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा कोर्स के लिए शिक्षकों की भर्ती से जुड़ा है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस कोर्स का अस्तित्व अभी कागजों से बाहर नहीं आया है और जिसके संचालन की अनुमति तक नहीं मिली है, उसके लिए आनन-फानन में शिक्षकों की नियुक्ति की सिफारिश भी कर दी गई है।

​एक ही दिन में आवेदन, स्क्रूटनी और सिफारिश

​इस पूरी प्रक्रिया में सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात इसकी रफ्तार है। सरकारी तंत्र आमतौर पर फाइलों को महीनों लटकाने के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां सुपरफास्ट मोड में नजर आया। 31 जनवरी को सरकारी छुट्टी होने के बावजूद तीन पदों के लिए भर्ती निकाली गई और उसी दिन आवेदन भी स्वीकार कर लिए गए।

इतना ही नहीं, रेडियो डायग्नोसिस विभागाध्यक्ष ने उसी दिन नोडल अधिकारी को निर्देश दिए। इसके तुरंत बाद नोडल अधिकारी ने भर्ती के लिए तीन नामों की सिफारिश एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को भेज दी। कॉलेज प्रशासन ने बिना देरी किए इन रेडियोथेरेपी टेक्नोलॉजी डिप्लोमा पदों के लिए तीन शिक्षकों के नामों पर अपनी मुहर लगा दी।

​कोर्स का नामोनिशान नहीं, पर शिक्षक तैयार!

​सूत्रों के अनुसार प्रदेश के किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज में फिलहाल रेडियोथेरेपी टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा कोर्स संचालित नहीं हो रहा है। नियमों के मुताबिक किसी भी नए कोर्स को शुरू करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, बजट और नेशनल मेडिकल कमीशन या संबंधित निदेशालय की गाइडलाइंस का पालन करना होता है, जिसमें कम से कम एक साल का समय लगता है। सवाल यह है कि जब कोर्स ही नहीं है, तो शिक्षकों की भर्ती की इतनी जल्दबाजी क्यों? क्या यह किसी चहेते को लाभ पहुंचाने की कोशिश है?

भर्ती के लिए अनुमति नहीं

बताया जा रहा है कि सिफारिश किए गए नामों में एक नाम मेडिकल शिक्षा निदेशालय में पदस्थापित रेडियोग्राफर का भी है, जो पहले से ही संबंधित कार्य देख रहा है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि नोडल अधिकारी की सिफारिश वाला पत्र 31 जनवरी को शिक्षा निदेशालय भेजा गया था, लेकिन वहां से शिक्षकों की भर्ती के लिए अभी तक कोई आधिकारिक अनुमति प्राप्त नहीं हुई है। इस मामले पर एसएमएस मेडिकल कॉलेज की एडिशनल प्रिंसिपल डॉ. रीमा मीणा का कहना है कि प्रक्रिया अभी जारी है और रूल्स-रेगुलेशन बनाने के लिए फाइल वापस भेजी गई है।

​उठ रहे हैं गंभीर सवाल

​इस पूरी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर कई सवालिया निशान लग गए हैं। आवेदन, सिफारिश और फाइल के निपटारे की पूरी प्रक्रिया को महज 24 घंटे (वह भी छुट्टी के दिन) में ही क्यों पूरा किया गया? क्या चयन के लिए बनाई गई समिति में उन सदस्यों के नाम भी शामिल हैं, जो खुद इस कोर्स के विशेषज्ञ नहीं हैं

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