जयपुर से अमेरिका पहुंचे परिवार की बेटी पिया डांडिया ने जीता US कांग्रेस चुनाव, फ्लोरिडा से बनीं सांसद
Ashish Bhardwaj | Nov 04, 2026, 20:43 IST
पिया डांडिया बनीं फ्लोरिडा से सांसद
राजस्थान के जयपुर से अमेरिका जाकर बसे एक परिवार की बेटी पिया डांडिया ने अमेरिकी राजनीति में बड़ी कामयाबी हासिल की है। पिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स का चुनाव जीत लिया है। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार केसी असकर को हराया। इस जीत के साथ पिया फ्लोरिडा से अमेरिकी कांग्रेस पहुंचने वाली पहली दक्षिण एशियाई प्रतिनिधि बन गई हैं।
3 नवंबर को हुए चुनाव में पिया को करीब 51.9 प्रतिशत वोट मिले, जबकि केसी असकर को 48.1 प्रतिशत मत हासिल हुए। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुकाबला आखिरी समय तक कड़ा रहा। चुनावी नतीजों के बाद पिया की जीत को अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के लोगों की बढ़ती भागीदारी के लिहाज से अहम माना जा रहा है। वह जनवरी 2027 में नया अमेरिकी कांग्रेस सत्र शुरू होने पर अपना कार्यभार संभालेंगी।
पिया डांडिया का परिवार मूल रूप से जयपुर का रहने वाला है। उनके माता-पिता 1980 के दशक में भारत से अमेरिका जाकर बस गए थे। पिया का जन्म और पालन-पोषण अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित पाम बीच काउंटी में हुआ। उनका बचपन जुपिटर शहर में बीता। उनके पिता डॉ. रोहित डांडिया पेशे से डॉक्टर हैं, जबकि उनकी मां ने जुपिटर में मोंटेसरी स्कूल शुरू किया था।
अमेरिका में रहने के बावजूद पिया का भारत से जुड़ाव बना रहा। उनके माता-पिता उन्हें बचपन में रिश्तेदारों से मिलने भारत भेजते थे। पिया ने एक इंटरव्यू में बताया था कि भारत की यात्राओं ने उन्हें अलग-अलग समाजों और लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को समझने का मौका दिया। कॉलेज के दौरान भी उन्होंने भारत में वंचित बच्चों के साथ काम किया।
पिया ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से गवर्नमेंट विषय में पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में करियर शुरू किया। वह टीच फॉर अमेरिका से जुड़ीं और बोस्टन में कम आय वाले परिवारों के बच्चों को पढ़ाया। बाद में न्यूयॉर्क के हार्लेम में उन्होंने डेमोक्रेसी प्रेप एंड्योरेंस हाई स्कूल की स्थापना की। महज 28 साल की उम्र में वह इस स्कूल की फाउंडिंग प्रिंसिपल बन गईं।
उनके स्कूल में पढ़ने वाले करीब 86 प्रतिशत बच्चे कम आय वाले परिवारों से आते थे। पिया के चुनाव अभियान की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, स्कूल से पढ़ाई पूरी करने वाले सभी विद्यार्थियों को कॉलेज में दाखिला मिला। शिक्षा के क्षेत्र में उनके काम ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
पिया को 2020 में व्हाइट हाउस फेलो चुना गया था। इस दौरान उन्होंने व्हाइट हाउस की डोमेस्टिक पॉलिसी काउंसिल और अमेरिकी शिक्षा विभाग के साथ काम किया। इसके बाद वह Apple से जुड़ीं। वहां उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी सेवाओं से जुड़े पब्लिक सेक्टर प्रोजेक्ट्स पर काम किया।
राजनीति में आने के बाद पिया ने डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ अपनी पारी शुरू की। पहले उन्होंने फ्लोरिडा की 21वीं सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी की थी, लेकिन बाद में बदले हुए चुनावी नक्शे के तहत 22वें डिस्ट्रिक्ट से मैदान में उतरीं। यहां उनका मुकाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी असकर से हुआ।
पिया की जीत सिर्फ एक चुनावी नतीजा नहीं है। वह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा पहुंचने वाली दूसरी भारतीय-अमेरिकी महिला बनी हैं। उनसे पहले प्रमिला जयपाल यह उपलब्धि हासिल कर चुकी हैं। वहीं, फ्लोरिडा से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पहुंचने वाली वह पहली दक्षिण एशियाई प्रतिनिधि हैं।
जयपुर से अमेरिका पहुंचे परिवार की अगली पीढ़ी की यह कामयाबी अब शहर में भी चर्चा का विषय है। शिक्षा के क्षेत्र से व्हाइट हाउस और Apple तक का सफर तय करने के बाद पिया ने चुनावी राजनीति में भी अपनी जगह बना ली है। जनवरी में अमेरिकी कांग्रेस की नई पारी शुरू होने के साथ उनसे फ्लोरिडा के 22वें डिस्ट्रिक्ट के मुद्दों को प्रतिनिधि सभा में उठाने की उम्मीद होगी।
जयपुर से 1980 के दशक में अमेरिका गया परिवार
अमेरिका में रहने के बावजूद पिया का भारत से जुड़ाव बना रहा। उनके माता-पिता उन्हें बचपन में रिश्तेदारों से मिलने भारत भेजते थे। पिया ने एक इंटरव्यू में बताया था कि भारत की यात्राओं ने उन्हें अलग-अलग समाजों और लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को समझने का मौका दिया। कॉलेज के दौरान भी उन्होंने भारत में वंचित बच्चों के साथ काम किया।
28 साल की उम्र में बनीं स्कूल की फाउंडिंग प्रिंसिपल
उनके स्कूल में पढ़ने वाले करीब 86 प्रतिशत बच्चे कम आय वाले परिवारों से आते थे। पिया के चुनाव अभियान की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, स्कूल से पढ़ाई पूरी करने वाले सभी विद्यार्थियों को कॉलेज में दाखिला मिला। शिक्षा के क्षेत्र में उनके काम ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
व्हाइट हाउस से Apple तक का सफर
राजनीति में आने के बाद पिया ने डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ अपनी पारी शुरू की। पहले उन्होंने फ्लोरिडा की 21वीं सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी की थी, लेकिन बाद में बदले हुए चुनावी नक्शे के तहत 22वें डिस्ट्रिक्ट से मैदान में उतरीं। यहां उनका मुकाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी असकर से हुआ।
भारतीय मूल की महिलाओं के लिए भी अहम जीत
जयपुर से अमेरिका पहुंचे परिवार की अगली पीढ़ी की यह कामयाबी अब शहर में भी चर्चा का विषय है। शिक्षा के क्षेत्र से व्हाइट हाउस और Apple तक का सफर तय करने के बाद पिया ने चुनावी राजनीति में भी अपनी जगह बना ली है। जनवरी में अमेरिकी कांग्रेस की नई पारी शुरू होने के साथ उनसे फ्लोरिडा के 22वें डिस्ट्रिक्ट के मुद्दों को प्रतिनिधि सभा में उठाने की उम्मीद होगी।
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