जल जीवन मिशन घोटाले पर हाईकोर्ट ने पूछा, सिर्फ दो फर्मों की ही जांच क्यों, बाकी का क्या

राजस्थान हाई कोर्ट ने जल जीवन मिशन घोटाले पर सवाल उठाया है। कोर्ट का कहना है कि हजारों—करोड़ के घोटाले में सिर्फ दो फर्मों के खिलाफ ही जांच क्यों।

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Mukesh Sharma
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Photograph: (the sootr)

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Jaipur. राजस्थान हाई कोर्ट ने जल जीवन मिशन योजना में सिर्फ दो फर्म के खिलाफ ही जांच करने पर सवाल उठाया है। कोर्ट ने इस संबंध में अन्य फर्म और व्यक्तियों के खिलाफ की गई शिकायतों के संबंध में ईडी और राजस्थान सरकार से तीन सप्ताह में जवाब देने को कहा है। एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा ने यह अंतरिम आदेश पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था की जनहित याचिका पर दिए। 

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घोटाला हजारों करोड़ का, जांच सिर्फ दो फर्म की ही क्यों ? 

एडवोकेट पीसी भंडारी ने हाई कोर्ट को बताया कि जल जीवन मिशन में हजारों करोड़ का घोटाला हुआ, लेकिन सरकार ने केवल दो फर्मों के मामलो में ही एफआईआर दर्ज की है। जबकि, शिकायतकर्ता ने जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी, मांगीलाल बिश्नोई,ओम इंफ्रा आदि बहुत से मामलो में शिकायतें की है। ये शिकायतें भी कोर्ट में भी पेश की हैं। लेकिन, सरकार ने केवल दो फर्मों के घोटालों की ही जांच की है। अन्य मामलों में न तो कोई जांच की है और ना ही एफआईआर दर्ज की है।

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बचा रहे हैं प्रभावशाली आरा​पियों को 

भंडारी ने कोर्ट को कहा कि प्रभावशाली अपराधियों को बचाया जा रहा है। ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल भरत व्यास ने कोर्ट को बताया कि ईडी ने कुछ लोगो को गिरफ़्तार भी किया है। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट टीएन शर्मा ने इसका विरोध करते हुए कहा कि मात्र दो मामलो में कार्यवाही की है। शिकायत के साथ दस्तावेज देने के बावजूद बड़ी मछलियों को बचाया जा रहा है। 

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ईडी कोर्ट भी मांग चुकी जानकारी 

गौरतलब है कि ईडी मामलों की विशेष अदालत ने भी जल जीवन मिशन घोटाला से जुड़े मामले में टेंडर प्रक्रिया से लेकर बजट आवंटन और अंतिम रूप से विशिष्ट अधिकारी व मंत्री तक पत्रावली भेजने की प्रक्रिया की जानकारी मांगी है। अदालत ने विभाग के संबंधित अधिकारी को जानकारी देने के लिए रिकॉर्ड सहित पेश होने को कहा है। 

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कुछ करें इससे पहले जानकारी तो हो

ईडी कोर्ट के पीठासीन अधिकारी खगेन्द्र कुमार शर्मा ने कहा है कि परिवाद और पूरक परिवाद पर अगली कार्रवाई करने से पहले जल जीवन मिशन योजना से संबंधित स्कीम की अवधारणा, प्रदेश को आवंटित बजट और इसमें से जिलेवार आवंटित होने वाले बजट की जानकारी लेना जरूरी है। 
 इसके साथ ही संबंधित जिलों के अधिकारियों का नियंत्रण,टेंडर प्रक्रिया, टेंडर को अंतिम रूप देने वाले अधिकारी और उसकी प्रक्रिया,तकनीकी और वित्तीय बिड स्वीकार करने वाले बोर्ड के सदस्यों की संख्या और अधिकारिता सहित अंतिम रूप से पत्रावली विशिष्ट अधिकारी व मंत्री को भेजने से जुड़ी प्रक्रिया का खुलासा होने की जरूरत है। 

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पूर्व मंत्री हो चुके है गिरफ्तार

राजस्थान में जल जीवन मिशन घोटाले को लेकर एसीबी ने मामला दर्ज किया था। इसी मामले में करोड़ों रुपए के लेन-देन को लेकर ईडी ने अलग से मामला दर्ज किया था। इस मामले में तत्कालीन जलदाय मंत्री महेश जोशी सहित टेंडर लेने वाले ठेकेदारों व अन्य लोगों को गिरफ्तार कर आरोप पत्र पेश हो चुका है।

जल जीवन मिशन क्या है?

जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत केंद्र सरकार की एक पहल,जल जीवन मिशन का उद्देश्य भारत के प्रत्येक घर में पाइप से पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। 
2019 में अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि देश के आधे घरों में पाइप से पानी की सुविधा नहीं है। जल जीवन मिशन के लिए 3.5 ट्रिलियन रुपये आवंटित करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें आने वाले वर्षों में इस दिशा में काम करेंगी। इस मिशन का लक्ष्य 2024 तक हर ग्रामीण घर तक नल से जल पहुँचाना था, लेकिन अब इसे 2028 तक बढ़ाया जा रहा है।

मुख्य बिंदू :

  • जल जीवन मिशन घोटाले पर हाईकोर्ट ने पूछा कि हजारों करोड़ के घोटाले में केवल दो फर्मों की जांच क्यों की जा रही है, बाकी के मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
  • ईडी ने कुछ लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन याचिकाकर्ता का आरोप है कि बड़ी मछलियों को बचाया जा रहा है और केवल दो मामलों में कार्रवाई की जा रही है।
  • इस घोटाले में टेंडर प्रक्रिया, बजट आवंटन, और अधिकारियों के पक्षपाती कार्यों पर गंभीर आरोप हैं। इसके अलावा, बड़े अधिकारियों और मंत्री की संलिप्तता भी संज्ञान में आई है।
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