979 करोड़ के जेजेएम घोटाले में सात अफसरों पर चलेगा मुकदमा, जानें ACB के पास क्या हैं सबूत
Ashish Bhardwaj | Sept 13, 2026, 14:15 IST
जल जीवन मिशन घोटाले
राजस्थान के 979 करोड़ रुपये के जल जीवन मिशन घोटाले में सात अफसरों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति मिल गई है। ACB पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान के जल जीवन मिशन घोटाले में सात अफसरों पर मुकदमा चलेगा।
- सरकार ने इन अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति दे दी है।
- ACB ने मामले में करीब 17,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है।
- जांच में 979.27 करोड़ रुपये के टेंडर सवालों में आए हैं।
- अब कोर्ट सबूतों के आधार पर आरोपों की सुनवाई करेगा।
979 करोड़ के टेंडर सवालों में
जांच एजेंसी का आरोप है कि दोनों कंपनियों ने अनुभव प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल किया। इन प्रमाण पत्रों को IRCON के नाम से तैयार किया गया था। IRCON रेलवे मंत्रालय के तहत काम करने वाली सरकारी कंपनी है।
ACB के अनुसार इन दस्तावेजों में काम पूरा होने से जुड़े प्रमाण भी शामिल थे। जांच में टेंडर प्रक्रिया की शर्तों पर भी सवाल उठे हैं। आरोप है कि कुछ शर्तों से प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई।
फर्जी प्रमाण पत्रों का खेल
मामले में सबसे अहम कड़ी IRCON की ओर से भेजा गया ई-मेल बताया गया है। रिपोर्टों के अनुसार IRCON ने 16 फरवरी 2023 को विभाग को प्रमाण पत्रों की जानकारी दी थी। कंपनी ने दस्तावेजों को फर्जी बताए जाने की बात सामने रखी थी। इसके बाद भी टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ने का आरोप है।
यही बिंदु जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सवाल यह है कि शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों ने क्या कदम उठाए। कोर्ट में इन्हीं घटनाक्रमों और दस्तावेजों की जांच होगी।
किन अफसरों पर कार्रवाई हुई
दिनेश गोयल तत्कालीन मुख्य अभियंता, विशिष्ट परियोजना थे। अरुण श्रीवास्तव तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य अभियंता, क्षेत्र प्रथम रहे। महेंद्र प्रकाश सोनी तत्कालीन अधीक्षण अभियंता रहे थे।
दिलीप कुमार गौड़ तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल जीवन मिशन रहे। विशाल सक्सेना तत्कालीन अधिशासी अभियंता, शाहपुरा खंड से जुड़े थे। इन पदों और आरोपों से संबंधित अंतिम जिम्मेदारी कोर्ट में तय होगी।
ACB की गिरफ्तारी सूची में इन अधिकारियों की भूमिकाएं और तत्कालीन पद भी दर्ज हैं। इससे जांच के दौरान उनकी प्रशासनिक जिम्मेदारियों का अंदाजा मिलता है।
17,500 पन्नों की चार्जशीट
ACB की जांच में अधिकारियों और निजी लोगों की कथित मिलीभगत की बात सामने आई। जांच एजेंसी ने फर्जी दस्तावेज और काम पूरा होने के प्रमाण पत्रों को अहम सबूत माना है। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत को करना है।
मामले में पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल भी आरोपी हैं। पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी के खिलाफ भी जांच और कानूनी कार्रवाई हुई है। अगस्त 2026 में राजस्थान हाईकोर्ट ने जोशी और अग्रवाल की जमानत याचिकाएं खारिज की थीं। कोर्ट ने आरोपों को गंभीर प्रकृति का बताया था।
अब आगे क्या होगा
अरुण श्रीवास्तव को जून 2026 में राजस्थान हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि जमानत पर की गई टिप्पणियां ट्रायल को प्रभावित नहीं करेंगी।
इस मामले में नौकरी और मुकदमे की प्रक्रिया अलग-अलग हैं। अभियोजन स्वीकृति मिलने का मतलब तत्काल नौकरी से बर्खास्तगी नहीं है। विभाग सेवा नियमों के अनुसार निलंबन या विभागीय जांच कर सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह रहेगा कि कोर्ट में ACB के आरोप कितने साबित होते हैं। फर्जी दस्तावेजों की भूमिका भी सुनवाई में महत्वपूर्ण होगी। इसके साथ अधिकारियों की कथित भूमिका भी अलग-अलग जांची जाएगी।
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