माधुरी दीक्षित के पति डॉ. श्रीराम नेने से लेकर नोबेल विजेता वैज्ञानिक तक, JLF में जुटेंगे खास चेहरे
Jageshwar Prasad | Oct 28, 2026, 17:35 IST
JLF का आयोजन 14 से 18 जनवरी 2027 तक जयपुर के होटल क्लार्क्स आमेर में होगा।
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के 20वें संस्करण की दूसरी स्पीकर लिस्ट जारी हो गई है। इसमें माधुरी दीक्षित के पति और हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रीराम नेने, नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक सर पॉल नर्स और शेफ रितु डालमिया का नाम शामिल है। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के 20वें संस्करण में इस बार साहित्य के साथ विज्ञान, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय और खानपान से जुड़े कई दिलचस्प चेहरे नजर आएंगे।
14 से 18 जनवरी 2027 तक जयपुर के होटल क्लार्क्स आमेर में होने वाले इस आयोजन में देश-दुनिया के लेखक, वैज्ञानिक, इतिहासकार और विचारक अपने अनुभव साझा करेंगे।
एआई के तेजी से बढ़ते दौर में विज्ञान और इंसानी जिंदगी के बदलते रिश्तों से लेकर जातिगत असमानता, खानपान की संस्कृति और स्वास्थ्य तक,कई ऐसे विषय चर्चा में रहेंगे जो सीधे आम लोगों की जिंदगी से जुड़े हैं। यही वजह है कि इस बार का फेस्टिवल साहित्य के शौकीनों के साथ विज्ञान,समाज और लाइफस्टाइल में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए भी खास हो सकता है।
इस बार की खासियत यह है कि पाठकों को सिर्फ साहित्यिक चर्चाएं ही नहीं सुनने को मिलेंगी, बल्कि वे विज्ञान की नई समझ, समाज में बराबरी, भोजन की संस्कृति और बदलती जीवनशैली जैसे मुद्दों पर भी विशेषज्ञों से सीधे रूबरू हो सकेंगे।
एआई के दौर में जब तकनीक हमारे काम करने, सोचने और जानकारी हासिल करने के तरीकों को बदल रही है, तब विज्ञान,इंसान और समाज के रिश्ते को समझने वाली चर्चाएं श्रोताओं के लिए खास दिलचस्प हो सकती हैं। हालांकि, फेस्टिवल की ओर से जारी सूची में इन विषयों पर अलग-अलग सत्रों का पूरा ब्योरा अभी सामने नहीं आया है।
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (Jaipur Literature Festival) में नोबेल पुरस्कार विजेता आनुवंशिकीविद् सर पॉल नर्स की मौजूदगी विज्ञान प्रेमियों के लिए खास आकर्षण होगी। कोशिका जीवविज्ञान के क्षेत्र में अपने काम के लिए पहचाने जाने वाले नर्स विज्ञान की बुनियादी समझ और उसकी बदलती दुनिया पर विचार साझा करेंगे। जबकि जीवविज्ञानी और प्रसारक एलिस रॉबर्ट्स मानव विकास और पुरातत्व से जुड़े विषयों पर चर्चा करेंगी।
एआई के दौर में वैज्ञानिक खोजों, तकनीक और मानव जीवन के भविष्य को लेकर दुनिया भर में बहस चल रही है। ऐसे में विज्ञान को आसान भाषा में समझने और वैज्ञानिक नजरिये से दुनिया को देखने का मौका इस आयोजन को साहित्य से आगे एक व्यापक बौद्धिक मंच बना सकता है।
सामाजिक न्याय (Social Justice) इस बार चर्चा का एक अहम विषय रहेगा। कास्ट मैटर्स के लेखक सूरज येंगडे जाति,नस्ल और सामाजिक असमानता जैसे सवालों को सामने रखेंगे। उनकी मौजूदगी ऐसे समय में महत्वपूर्ण है,जब समाज में बराबरी, पहचान और अवसरों को लेकर बहस लगातार जारी है।
भारतीय बौद्धिक इतिहास और राजनीतिक चिंतन पर काम करने वाली अनन्या वजपेयी,आदिवासी समाज और पहचान पर लिखने वाले हंसदा सौवेंद्र शेखर और प्रवासन तथा सांस्कृतिक पहचान से जुड़े विषयों पर लेखन करने वाले तबिश खैर भी इस सूची में शामिल हैं। इन वक्ताओं के जरिए साहित्य और समाज के बीच के रिश्ते को समझने का अवसर मिलेगा।
फेस्टिवल में खानपान को भी जगह दी गई है। शेफ और रेस्तरां व्यवसायी रितु डालमिया भोजन और पाक कला से जुड़े अपने अनुभव साझा करेंगी। यह विषय इसलिए भी दिलचस्प है, क्योंकि भोजन केवल स्वाद तक सीमित नहीं है। इसके साथ संस्कृति, परंपरा, पहचान और बदलती जीवनशैली के कई पहलू जुड़े हैं।
स्वास्थ्य के क्षेत्र से हृदय रोग विशेषज्ञ और फिल्म स्टार माधुरी दीक्षित के पति डॉ. श्रीराम नेने भी महोत्सव का हिस्सा होंगे। वहीं, व्यक्तिगत विकास पर लिखने वाली रॉक्सी नफूसी अपने विचार रखेंगी। इस तरह आयोजन में साहित्य के साथ सेहत और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी संवाद की गुंजाइश बनेगी।
दूसरी सूची में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित कई नाम भी शामिल हैं। फिलिस्तीनी लेखिका अदनिया शिबली, पुलित्जर पुरस्कार विजेता जीवनीकार बेंजामिन मोजर, हार्वर्ड विश्वविद्यालय की इतिहासकार कैरोलिन एल्किन्स और पुरातत्वविद् एरिक क्लाइन अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े विचार साझा करेंगे। कला इतिहासकार और ब्रिटिश म्यूजियम के पूर्व निदेशक नील मैकग्रेगर भी कला, संस्कृति और इतिहास पर चर्चा को समृद्ध करेंगे।
इसके अलावा, पूंजीवाद और वैश्विक अर्थव्यवस्था के इतिहास पर काम करने वाले हार्वर्ड के इतिहासकार स्वेन बेकेर्ट, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और संघर्ष समाधान की विशेषज्ञ गैब्रिएल रिफकिंड, पत्रकार एवं लेखिका मिशाल हुसैन और एशियाई कला की विशेषज्ञ विशाखा एन. देसाई भी फेस्टिवल में शामिल होंगी। भारतीय भाषाओं के साहित्यकारों और कलाकारों को भी इस संस्करण में प्रमुखता दी जाएगी।
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की सह-संस्थापक और सह-निदेशक नमिता गोखले के मुताबिक, 20वें संस्करण में भारतीय साहित्य की बहुभाषी परंपरा के साथ बदलते समय और नई तकनीक से जुड़े विचारों को भी जगह दी जाएगी। टीमवर्क आर्ट्स के प्रबंध निदेशक संजय के. रॉय ने कहा कि अलग-अलग विषयों और संस्कृतियों के लोगों को एक मंच पर लाना तथा खुले संवाद को बढ़ावा देना फेस्टिवल का प्रमुख उद्देश्य है।
फेस्टिवल के सह-निदेशक विलियम डेलरिम्पल ने भी दो दशक के सफर को भारतीय कहानी कहने की परंपरा, बौद्धिक आदान-प्रदान और सार्वजनिक बहस के लिए महत्वपूर्ण बताया।
14 से 18 जनवरी 2027 तक होने वाला यह आयोजन अपने 20वें वर्ष में साहित्य के साथ विज्ञान, समाज, स्वास्थ्य, भोजन और इतिहास के सवालों को एक मंच पर लाने की तैयारी में है। ऐसे समय में, जब एआई और नई तकनीक दुनिया को तेजी से बदल रहे हैं, इन विषयों पर विशेषज्ञों को सुनना और उनसे सवाल करना दर्शकों के लिए खास अनुभव साबित हो सकता है।
एआई के तेजी से बढ़ते दौर में विज्ञान और इंसानी जिंदगी के बदलते रिश्तों से लेकर जातिगत असमानता, खानपान की संस्कृति और स्वास्थ्य तक,कई ऐसे विषय चर्चा में रहेंगे जो सीधे आम लोगों की जिंदगी से जुड़े हैं। यही वजह है कि इस बार का फेस्टिवल साहित्य के शौकीनों के साथ विज्ञान,समाज और लाइफस्टाइल में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए भी खास हो सकता है।
इस बार की खासियत यह है कि पाठकों को सिर्फ साहित्यिक चर्चाएं ही नहीं सुनने को मिलेंगी, बल्कि वे विज्ञान की नई समझ, समाज में बराबरी, भोजन की संस्कृति और बदलती जीवनशैली जैसे मुद्दों पर भी विशेषज्ञों से सीधे रूबरू हो सकेंगे।
एआई के दौर में जब तकनीक हमारे काम करने, सोचने और जानकारी हासिल करने के तरीकों को बदल रही है, तब विज्ञान,इंसान और समाज के रिश्ते को समझने वाली चर्चाएं श्रोताओं के लिए खास दिलचस्प हो सकती हैं। हालांकि, फेस्टिवल की ओर से जारी सूची में इन विषयों पर अलग-अलग सत्रों का पूरा ब्योरा अभी सामने नहीं आया है।
नोबेल विजेता वैज्ञानिक बताएंगे विज्ञान की दुनिया
एआई के दौर में वैज्ञानिक खोजों, तकनीक और मानव जीवन के भविष्य को लेकर दुनिया भर में बहस चल रही है। ऐसे में विज्ञान को आसान भाषा में समझने और वैज्ञानिक नजरिये से दुनिया को देखने का मौका इस आयोजन को साहित्य से आगे एक व्यापक बौद्धिक मंच बना सकता है।
जाति और सामाजिक न्याय पर भी होगी बात
भारतीय बौद्धिक इतिहास और राजनीतिक चिंतन पर काम करने वाली अनन्या वजपेयी,आदिवासी समाज और पहचान पर लिखने वाले हंसदा सौवेंद्र शेखर और प्रवासन तथा सांस्कृतिक पहचान से जुड़े विषयों पर लेखन करने वाले तबिश खैर भी इस सूची में शामिल हैं। इन वक्ताओं के जरिए साहित्य और समाज के बीच के रिश्ते को समझने का अवसर मिलेगा।
खानपान भी साहित्यिक चर्चा का हिस्सा
स्वास्थ्य के क्षेत्र से हृदय रोग विशेषज्ञ और फिल्म स्टार माधुरी दीक्षित के पति डॉ. श्रीराम नेने भी महोत्सव का हिस्सा होंगे। वहीं, व्यक्तिगत विकास पर लिखने वाली रॉक्सी नफूसी अपने विचार रखेंगी। इस तरह आयोजन में साहित्य के साथ सेहत और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी संवाद की गुंजाइश बनेगी।
इतिहास, राजनीति और दुनिया के बदलते सवाल
इसके अलावा, पूंजीवाद और वैश्विक अर्थव्यवस्था के इतिहास पर काम करने वाले हार्वर्ड के इतिहासकार स्वेन बेकेर्ट, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और संघर्ष समाधान की विशेषज्ञ गैब्रिएल रिफकिंड, पत्रकार एवं लेखिका मिशाल हुसैन और एशियाई कला की विशेषज्ञ विशाखा एन. देसाई भी फेस्टिवल में शामिल होंगी। भारतीय भाषाओं के साहित्यकारों और कलाकारों को भी इस संस्करण में प्रमुखता दी जाएगी।
दो दशक पूरे होने पर खास आयोजन
फेस्टिवल के सह-निदेशक विलियम डेलरिम्पल ने भी दो दशक के सफर को भारतीय कहानी कहने की परंपरा, बौद्धिक आदान-प्रदान और सार्वजनिक बहस के लिए महत्वपूर्ण बताया।
14 से 18 जनवरी 2027 तक होने वाला यह आयोजन अपने 20वें वर्ष में साहित्य के साथ विज्ञान, समाज, स्वास्थ्य, भोजन और इतिहास के सवालों को एक मंच पर लाने की तैयारी में है। ऐसे समय में, जब एआई और नई तकनीक दुनिया को तेजी से बदल रहे हैं, इन विषयों पर विशेषज्ञों को सुनना और उनसे सवाल करना दर्शकों के लिए खास अनुभव साबित हो सकता है।
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