कमलेश प्रजापति एनकाउंटर में IPS आनंद शर्मा को राहत, रद्द किया हत्या का संज्ञान

Ashish Bhardwaj | Jun 19, 2026, 20:21 IST
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आईपीएस आनंद शर्मा को राहत
Photograph: (the sootr)

जोधपुर की सेशन कोर्ट ने कमलेश प्रजापति एनकाउंटर मामले में फैसला सुना दिया है। ट्रायल कोर्ट ने हत्या संज्ञान रद्द कर दिया। इससे तत्कालीन बाड़मेर एसपी आनंद शर्मा सहित 24 पुलिसकर्मियों को राहत मिल गई है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • जोधपुर सेशन कोर्ट ने बाड़मेर एनकाउंटर मामले में बड़ा फैसला सुनाया।
  • कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के हत्या का संज्ञान लेने वाला आदेश रद्द किया।
  • पुलिस की कार्रवाई को आत्मरक्षा में हुई फायरिंग माना गया।
  • CBI की क्लोजर रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्यों को सही ठहराया गया।
  • 24 पुलिसकर्मियों को इस फैसले से बड़ी कानूनी राहत मिली।

बाड़मेर के बहुचर्चित कमलेश प्रजापति एनकाउंटर मामले में जोधपुर की सेशन कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें हत्या का संज्ञान लिया गया था।

कोर्ट ने माना कि पुलिस की फायरिंग आत्मरक्षा में हुई थी। उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर इसे फर्जी एनकाउंटर नहीं कहा जा सकता। तत्कालीन बाड़मेर एसपी IPS आनंद शर्मा सहित 24 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को इस फैसले से बड़ी राहत मिली है।

क्या था बाड़मेर एनकाउंटर

22 अप्रैल 2021 को बाड़मेर जिले के सदर थाना क्षेत्र में कमलेश प्रजापति का पुलिस एनकाउंटर हुआ था। इसके बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक विरोध शुरू हो गया।

तत्कालीन पचपदरा विधायक मदन प्रजापत और प्रजापति समाज के लोगों ने जांच की मांग उठाई। इस पर राज्य सरकार ने मामला CBI ( केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) को सौंप दिया।

CBI ने दी थी क्लीन चिट

CBI ने अपनी जांच में पुलिस की कार्रवाई को सही पाया और क्लोजर रिपोर्ट पेश की। लेकिन कमलेश प्रजापति की पत्नी ने इस क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती दी।

उनकी आपत्ति पर ट्रायल कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर दी। साथ ही उसने हत्या का संज्ञान ले लिया।

ट्रायल कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ IPS आनंद शर्मा और अन्य पुलिसकर्मियों ने जोधपुर महानगर सेशन कोर्ट में निगरानी याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूरे मामले की समीक्षा की।

कोर्ट ने क्या कहा

सेशन कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि घटना के दौरान कमलेश प्रजापति ने भागने की कोशिश की। कमलेश ने पुलिस टीम पर वाहन चढ़ाने का प्रयास किया था।

कोर्ट ने माना कि पुलिस की फायरिंग आत्मरक्षा में और एक हेड कांस्टेबल की जान बचाने के उद्देश्य से की गई जवाबी कार्रवाई थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि उपलब्ध तथ्यों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर इस घटना को फर्जी एनकाउंटर नहीं माना जा सकता। इसके साथ ही ट्रायल कोर्ट का आदेश निरस्त कर दिया गया।

पुलिस पक्ष की बड़ी कानूनी जीत

इस फैसले को बाड़मेर एनकाउंटर मामले में पुलिस पक्ष के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है। चार साल से अधिक समय से इस मामले में कानूनी लड़ाई चल रही थी।

तत्कालीन बाड़मेर एसपी आनंद शर्मा सहित 24 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों पर हत्या का संज्ञान लटका हुआ था। सेशन कोर्ट के इस फैसले से उन्हें बड़ी राहत मिली है।

FAQ

  1. कमलेश प्रजापति एनकाउंटर क्या था?
    22 अप्रैल 2021 को बाड़मेर सदर थाना क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ में कमलेश प्रजापति की मौत हुई थी। इसके बाद परिवार और प्रजापति समाज ने फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगाया। विरोध के बाद सरकार ने CBI जांच का आदेश दिया था।
  2. कमलेश प्रजापति एनकाउंटर मामले में CBI ने अपनी जांच में क्या पाया था?
    CBI ने अपनी जांच में पुलिस की कार्रवाई को सही ठहराया और क्लोजर रिपोर्ट पेश की। कमलेश की पत्नी ने इसे चुनौती दी जिसके बाद ट्रायल कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर हत्या का संज्ञान लिया था।
  3. कमलेश प्रजापति एनकाउंटर मामले में सेशन कोर्ट का फैसला क्या रहा?
    जोधपुर सेशन कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का हत्या संज्ञान रद्द कर दिया। कोर्ट ने माना कि पुलिस ने आत्मरक्षा में फायरिंग की थी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर यह फर्जी एनकाउंटर नहीं था।

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