राजस्थान में कौवों का गांव हिंगोटी, पक्षी प्रेमी करते हैं हर मौसम में भोजन-पानी की व्यवस्था

Amit Baijnath Garg | Sept 11, 2025, 13:44 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के जयपुर के हिंगोटी गांव में दस हजार से अधिक कौवे हर दिन एकत्र होते हैं। ग्रामीणों की मदद से यहां बनाया गया ग्राम्य वन कौवों और अन्य पक्षियों का सुरक्षित आवास बन चुका है।

आम दिनों में घर की मुंडेर पर कौवों की कांव-कांव लोगों को भले ही पसंद न आए, लेकिन श्राद्ध पक्ष में इन्हीं कौवों की प्रतीक्षा हर कोई करता है, लेकिन राजस्थान के जयपुर के हिंगोटी गांव के लोगों को कौवे सहज उपलब्ध होते हैं।



तूंगा-महादेवपुरा मार्ग स्थित हिंगोटी ग्राम्य वन में हजारों कौवे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि यहां दस हजार से अधिक कौवे हर दिन एकत्र होते हैं। पर्यावरण प्रेमियों के अथक प्रयासों से हिंगोटी ग्राम्य वन कौवों और अन्य पक्षियों का सुरक्षित आवास बन चुका है।



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पूरा प्रबंधन जनसहयोग से

पर्यावरण प्रेमी शिवशंकर प्रजापति ने बताया कि यहां का पूरा प्रबंधन जनसहयोग से चलता है। स्थानीय लोग चुग्गा और पानी लेकर आते हैं, चरुण्डियों की सफाई करते हैं और पक्षियों की देखभाल करते हैं। वहीं रामभजन गुर्जर पेड़ों की रखवाली नि:शुल्क करते हैं। श्राद्ध पक्ष और अमावस्या तिथिपर यहां मेले जैसा माहौल बन जाता है।



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सुबह चार बजे से सेवा शुरू

प्रवीण और उनकी पत्नी दुर्गा पंवार सुबह चार बजे उठकर कौवों के लिए आटा गूंथ कर रोटी बनाते हैं, उसको दूध में भिगोते हैं और अलग-अलग थाली में रखते हैं। 70 वर्षीय प्रवीण पंवार बताते हैं कि करीब 15 साल पहले वे मसूरिया से मरुधर केसरी नगर अपने नए घर में आए थे। श्राद्ध के दौरान पितरों के प्रति श्रद्धा में घर के बाहर छत पर खाना रखा तो शुरू में आठ-दस कौवे आए। बाद में धीरे-धीरे यह संख्या सैंकडों में पहुंच गई।



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दिनभर लगा रहता है आना-जाना

इसके बाद कौवों की भूख को देखकर प्रवीण पंवार ने इस क्रम को नियमित करने का ठान लिया। प्रवीण पंवार के घर के बाहर रोजाना सुबह 6 बजे कौवों को भोजन देने का सिलसिला शुरू होता है। कौवे सुबह 5 बजे ही आस-पास के बिजली तार और घरों की छतों पर आकर बैठ जाते हैं। इसी तरह से शाम को साढ़े पांच से छह बजे के बीच इनको दोबारा भोजन दिया जाता है। वहीं दिनभर इनका खाने के लिए आना-जाना लगा रहता है।



FAQ

  1. Q1: हिंगोटी गांव में कौवों को भोजन क्यों दिया जाता है?
    हिंगोटी गांव में कौवों को भोजन और पानी दिया जाता है क्योंकि यह धार्मिक आस्था और पर्यावरणीय संरक्षण का हिस्सा है। विशेष रूप से श्राद्ध पक्ष और अमावस्या पर यह परंपरा निभाई जाती है।
  2. Q2: इस प्रक्रिया को कौन प्रबंधित करता है?
    हिंगोटी ग्राम्य वन का प्रबंधन मुख्य रूप से पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय समुदाय द्वारा किया जाता है, जो मिलकर पक्षियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था करते हैं।
  3. Q3: यह परंपरा कब से चल रही है?
    यह परंपरा पिछले 15 वर्षों से चल रही है, जब प्रवीण पंवार ने श्राद्ध के समय पितरों के सम्मान में यह प्रक्रिया शुरू की थी।


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