100 साल बाद पितृ पक्ष 2025 में दो ग्रहणों का दुर्लभ संयोग, जानें श्राद्ध और तर्पण के खास नियम
Kaushiki | Sept 01, 2025, 17:09 IST
pitru paksha 2025
इस साल पितृ पक्ष 2025 में 100 साल बाद दो ग्रहणों का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसमें 7 सितंबर को चंद्र ग्रहण और 21 सितंबर को सूर्य ग्रहण पड़ेगा। ज्योतिषियों के अनुसार, यह योग पितरों के मोक्ष के लिए एक शक्तिशाली समय है।
पितृ पक्ष 2025: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व होता है। यह वह समय है जब हम अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण करते हैं।
ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक, इस साल पितृ पक्ष 2025 बेहद खास रहने वाला है, क्योंकि लगभग 100 साल बाद एक ऐसा दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बन रहा है जब एक ही पखवाड़े में दो ग्रहण पड़ेंगे।
पंचांग के मुताबिक पितृ पक्ष 7 सितंबर, 2025 से शुरू होकर 21 सितंबर, 2025 तक चलेगा। इसी दौरान 7 सितंबर को चंद्र ग्रहण और 21 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या यानी पितृ पक्ष के आखिरी दिन सूर्य ग्रहण लगेगा। यह दोहरे ग्रहण का योग ज्योतिषीय दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आमतौर पर ग्रहण काल को अशुभ माना जाता है, जिसमें शुभ कार्य वर्जित होते हैं। लेकिन पितृ कार्य इससे अलग होते हैं। ज्योतिषियों का मानना है कि इस बार का ग्रहण पितरों के मोक्ष में बाधक नहीं बल्कि उनके लिए एक शक्तिशाली संयोग बनेगा। इसमें किए गए श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य सीधे पितरों तक पहुंचेंगे और उन्हें मुक्ति प्रदान करेंगे।
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ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक, ग्रहण काल में शुभ कार्यों की मनाही होती है लेकिन पितरों से जुड़े कार्य इसके अपवाद माने जाते हैं। यहां बताया गया है कि आप ग्रहण के दौरान कैसे पितृ कार्य कर सकते हैं:
![total lunar eclipse on the night of 7th September, significance of chandra grahan, lunar eclipse facts in hindi, religious facts about chandra grahan | 7 सितंबर की रात होगा पूर्ण चंद्र ग्रहण:]()
चंद्र ग्रहण (7 सितंबर):
ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक, चंद्र ग्रहण (lunar eclipse) के दौरान सूतक काल में श्राद्ध नहीं किया जाता है लेकिन सूतक से पहले और ग्रहण समाप्त होने के बाद आप श्राद्ध कर सकते हैं।
ग्रहण काल के दौरान पितरों (पितरों का श्राद्ध)के निमित्त दान देने और मंत्रों का जाप करने से विशेष लाभ मिलता है। इस समय किए गए दान का फल कई गुना बढ़ जाता है। ॐ पितृ देवाय नमः और अन्य पितृ मंत्रों का जाप करना अत्यंत लाभकारी होगा। भारत में चंद्र ग्रहण दिखाई देगा।
![Solar Eclipse: साल का आखिरी सूर्य ग्रहण 21 सितंबर को, भारत में नहीं दिखेगा असर | CGNN]()
सूर्य ग्रहण (21 सितंबर):
ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक, सर्वपितृ अमावस्या पर लगने वाले सूर्य ग्रहण (solar eclipse) का भी विशेष महत्व है। इस दौरान तर्पण और दान-पुण्य करना विशेष रूप से फलदायी होता है।
ग्रहण के बाद स्नान कर साफ वस्त्र पहनें और फिर पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध करें। जरूरतमंदों को अनाज, वस्त्र और भोजन का दान करना पितृ दोष को दूर करने में सहायक होता है।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, पितृ पक्ष (Pitru Paksha)के 15 दिनों के दौरान हमारे पितर किसी न किसी रूप में धरती पर आते हैं ताकि वे अपने वंशजों से श्राद्ध और भोजन ग्रहण कर सकें। ऐसा माना जाता है कि इन रूपों को पहचानना और उन्हें भोजन कराना अत्यंत शुभ होता है।
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, जब तक पितर तृप्त नहीं होते तब तक वे श्राप देते हैं, जिससे पितृ दोष लगता है। पितृ दोष के कारण व्यक्ति को जीवन में कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जैसे करियर में रुकावट, पारिवारिक कलह और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां। ऐसे में पितृ पक्ष में श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य करने से पितृ दोष को दूर किया जा सकता है।
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डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक, इस साल पितृ पक्ष 2025 बेहद खास रहने वाला है, क्योंकि लगभग 100 साल बाद एक ऐसा दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बन रहा है जब एक ही पखवाड़े में दो ग्रहण पड़ेंगे।
पंचांग के मुताबिक पितृ पक्ष 7 सितंबर, 2025 से शुरू होकर 21 सितंबर, 2025 तक चलेगा। इसी दौरान 7 सितंबर को चंद्र ग्रहण और 21 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या यानी पितृ पक्ष के आखिरी दिन सूर्य ग्रहण लगेगा। यह दोहरे ग्रहण का योग ज्योतिषीय दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आमतौर पर ग्रहण काल को अशुभ माना जाता है, जिसमें शुभ कार्य वर्जित होते हैं। लेकिन पितृ कार्य इससे अलग होते हैं। ज्योतिषियों का मानना है कि इस बार का ग्रहण पितरों के मोक्ष में बाधक नहीं बल्कि उनके लिए एक शक्तिशाली संयोग बनेगा। इसमें किए गए श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य सीधे पितरों तक पहुंचेंगे और उन्हें मुक्ति प्रदान करेंगे।
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ग्रहण काल में श्राद्ध और तर्पण के नियम
total lunar eclipse on the night of 7th September, significance of chandra grahan, lunar eclipse facts in hindi, religious facts about chandra grahan | 7 सितंबर की रात होगा पूर्ण चंद्र ग्रहण:
चंद्र ग्रहण (7 सितंबर):
ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक, चंद्र ग्रहण (lunar eclipse) के दौरान सूतक काल में श्राद्ध नहीं किया जाता है लेकिन सूतक से पहले और ग्रहण समाप्त होने के बाद आप श्राद्ध कर सकते हैं।
ग्रहण काल के दौरान पितरों (पितरों का श्राद्ध)के निमित्त दान देने और मंत्रों का जाप करने से विशेष लाभ मिलता है। इस समय किए गए दान का फल कई गुना बढ़ जाता है। ॐ पितृ देवाय नमः और अन्य पितृ मंत्रों का जाप करना अत्यंत लाभकारी होगा। भारत में चंद्र ग्रहण दिखाई देगा।
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सूर्य ग्रहण (21 सितंबर):
ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक, सर्वपितृ अमावस्या पर लगने वाले सूर्य ग्रहण (solar eclipse) का भी विशेष महत्व है। इस दौरान तर्पण और दान-पुण्य करना विशेष रूप से फलदायी होता है।
ग्रहण के बाद स्नान कर साफ वस्त्र पहनें और फिर पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध करें। जरूरतमंदों को अनाज, वस्त्र और भोजन का दान करना पितृ दोष को दूर करने में सहायक होता है।
पितृ पक्ष में पितर किस रूप में आते हैं
- कौए: धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, कौए को पितरों का दूत माना जाता है। पितृ पक्ष में कौओं को भोजन कराना पितरों को भोजन कराने के समान है। यदि कौए आपके द्वारा रखे गए भोजन को ग्रहण कर लें, तो यह माना जाता है कि पितर तृप्त हो गए हैं।
- चींटियां: धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, यदि पितृ पक्ष के दौरान आपके घर में लाल चींटियों की संख्या बढ़ जाए, तो इसे भी पितरों के आगमन का संकेत माना जाता है। उन्हें आटा या चीनी खिलाना शुभ होता है।
- गाय और कुत्ता: धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, गाय और कुत्ते को खाना खिलाने से भी पितर प्रसन्न होते हैं। माना जाता है कि गाय में सभी देवी-देवता निवास करते हैं और कुत्तों को यमराज का दूत माना जाता है। इन जीवों को भोजन कराने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है।
पितृ दोष और पितरों को तृप्त करने का महत्व
- श्राद्ध और पिंडदान: ये कर्मकांड पितरों को अन्न-जल प्रदान करने के लिए किए जाते हैं।
- तर्पण: तर्पण में जल, दूध और तिल से पितरों को जल अर्पित किया जाता है।
- दान: इस दौरान गरीबों और जरूरतमंदों को दान-पुण्य करने से पितर प्रसन्न होते हैं।
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डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQ
- पितृ पक्ष 2025 में चंद्र और सूर्य ग्रहण कब पड़ेंगे?
साल 2025 में पितृ पक्ष के दौरान दो ग्रहण पड़ेंगे। पहला, चंद्र ग्रहण 7 सितंबर, 2025 को पितृ पक्ष की शुरुआत में पड़ेगा। दूसरा, सूर्य ग्रहण 21 सितंबर, 2025 को सर्वपितृ अमावस्या के दिन, यानी पितृ पक्ष के समापन पर पड़ेगा। - क्या ग्रहण काल में श्राद्ध और तर्पण करना शुभ है?
धर्म शास्त्रों में ग्रहण काल को अशुभ माना गया है, लेकिन पितृ कार्य इससे अलग हैं। इस दौरान श्राद्ध और तर्पण जैसे कार्य किए जा सकते हैं। ज्योतिषियों के मुताबिक, ग्रहण के दौरान दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है, और इस बार पितृ पक्ष में पड़ने वाले ये ग्रहण पितरों के लिए मोक्ष के शक्तिशाली द्वार खोलेंगे। - पितृ पक्ष के दौरान पितर किन-किन रूपों में घर आते हैं?
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, पितृ पक्ष में पितर विभिन्न जीवों के रूप में धरती पर आते हैं ताकि वे अपने वंशजों से भोजन और जल ग्रहण कर सकें। इन जीवों में मुख्य रूप से कौए, चींटियां, गाय और कुत्ते शामिल हैं। इन जीवों को भोजन कराने से पितरों को तृप्ति मिलती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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