खेजड़ी बचाने आंदोलन: 363 संत अनशन पर बैठे, आंखों पर बांधी पट्टी, खाना-पीना छोड़ा

Purshottam Kumar Joshi | Feb 03, 2026, 15:40 IST
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khejri
Photograph: (the sootr)

राजस्थान में खेजड़ी के पेड़ को बचाने के लिए बीकानेर में आंदोलन तेज हो गया है। 363 संतों और समाज के लोगों ने अनशन शुरू कर दिया है, और उन्होंने आंखों पर पट्टी बांधकर विरोध जताया है।

News in Short

  • बीकानेर में खेजड़ी बचाने के लिए 363 संतों और समाज के लोगों ने अनशन शुरू किया।
  • संतों ने अपनी मांगों को लेकर अन्न त्यागने की घोषणा की है।
  • आंदोलन का उद्देश्य ट्री प्रोटेक्शन एक्ट की मांग को लेकर है।
  • कलेक्टर और एसपी ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया, लेकिन वे मंच पर नहीं बोल सके।
  • पुलिस प्रशासन ने आंदोलन स्थल पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए एसटीएफ को तैनात किया है।

News in Detail

राजस्थान में खेजड़ी बचाने के लिए आंदोलन तेज हो गया है। बीकानेर में खेजड़ी बचाने के लिए अब संतों अनशन शुरू कर दिया है। करीब 363 संतों के साथ समाज के लोगों ने भी अनशन शुरू कर दिया है। इस आंदोलन का उद्देश्य ट्री प्रोटेक्शन एक्ट की मांग है ताकि खेजड़ी के पेड़ों को काटने से रोका जा सके। सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों के बावजूद आंदोलनकारी अपनी मांगों के समर्थन में मजबूती से खड़े हैं। सोमवार को आयोजित महापड़ाव के बाद समाज के लोग कलेक्ट्रेट के पास बलने बिश्नोई धर्मशाला पहुंचे और अनशन की घोषणा कर दी।

आंदोलन का नेतृत्व संतों के द्वारा

संत सच्चिदानंद ने बताया कि इस आंदोलन का नेतृत्व संतों द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक ट्री प्रोटेक्शन एक्ट लागू नहीं हो जाता, तब तक कोई भी पेड़ नहीं काटा जाना चाहिए। आंदोलन के पहले दिन से ही संतों और समाज के लोगों ने अपनी मांगों के प्रति दृढ़ संकल्प व्यक्त किया है।



khejri protest
khejri protest


प्रदर्शनकारियों का अन्न त्याग

इस आंदोलन में शामिल लोग अपनी आस्था और संकल्प को दिखाते हुए अन्न त्याग करने की बात कर रहे हैं। संतों ने सभी प्रदर्शनकारियों से अपील की है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती, वे अन्न का त्याग करते रहें। बड़ी संख्या में पुरुष और महिलाएं इस आंदोलन में शामिल हुई हैं। इन सभी का उद्देश्य खेजड़ी के पेड़ों की रक्षा करना है।

आंदोलन स्थल पर पुलिस का कड़ा बंदोबस्त

पुलिस प्रशासन भी इस आंदोलन पर पूरी तरह से नजर बनाए हुए है। कलेक्ट्रेट पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए एसटीएफ को तैनात किया गया है। वहीं, आंदोलन से जुड़े नेताओं के साथ पुलिस लगातार संपर्क बनाए हुए है।

कलेक्टर और एसपी का असफल प्रयास

सोमवार को बीकानेर के कलेक्टर नम्रता वृष्णि और एसपी कावेंद्र सागर ने महापड़ाव स्थल पर आकर प्रदर्शनकारियों से बात की और आश्वासन दिया कि खेजड़ी के पेड़ों को काटने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, जब उन्होंने मंच पर आकर धरना समाप्त करने की कोशिश की, तो उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया गया। इसके बाद ही संतों के नेतृत्व में आमरण अनशन की घोषणा की गई।

आंदोलन की बढ़ती ध्वनि

खेजड़ी बचाओआंदोलन एक सामाजिक संघर्ष बन गया है। इसमें लोग अपनी मांगों को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं। इस संघर्ष ने न केवल बीकानेर बल्कि पूरे राज्य में खेजड़ी के महत्व को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

कलेक्टर और पुलिस प्रशासन की चुप्पी

इस आंदोलन के दौरान कलेक्टर और पुलिस प्रशासन ने जनता को आश्वासन तो दिया, लेकिन कार्रवाई में देरी ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सरकार वाकई इस मुद्दे पर गंभीर है। संतों और समाज के लोग अब अपनी मांगों के समर्थन में खड़े हैं, और वे इसे एक बड़े सामाजिक आंदोलन के रूप में देख रहे हैं।

खेजड़ी (Prosopis cineraria), जिसे 'राजस्थान का कल्पवृक्ष' और 'मरुस्थल की जीवन रेखा' कहा जाता है, थार मरुस्थल के पारिस्थितिकी तंत्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है। इसके प्रमुख उपयोग निम्नलिखित हैं:

औषधीय उपयोग-खेजड़ी के हर हिस्से में औषधीय गुण होते हैं।

छाल: इसकी छाल का काढ़ा खांसी और फेफड़ों की सूजन में राहत देता है। छाल का लेप बिच्छू के डंक का जहर उतारने और चर्म रोगों (जैसे कुष्ठ, फोड़े-फुंसी) के इलाज में प्रभावी है।
पत्तियाँ: पत्तियों का लेप त्वचा रोगों और खुजली में उपयोग किया जाता है। पत्तियों को चबाने से मुंह के छालों में आराम मिलता है।
फल (सांगरी): इसका सेवन पाचन तंत्र को मजबूत करता है और पेट दर्द व कब्ज में राहत देता है।

पोषण और आहार

सांगरी: खेजड़ी की फलियों को 'सांगरी' कहा जाता है, जिसका उपयोग स्वादिष्ट और पौष्टिक सब्जी बनाने में होता है। सूखी सांगरी का बाजार भाव 300 रुपए प्रति किलो तक हो सकता है।
अकाल का सहारा: 1869 के राजपूताना अकाल के दौरान, इसकी छाल को पीसकर आटे के रूप में इस्तेमाल किया गया था, जिससे हजारों जानें बची थीं।

पशु आहार और कृषि

लूंग (Loom): इसकी पत्तियों को 'लूंग' कहा जाता है। यह ऊंट, बकरी और अन्य पशुओं के लिए प्रोटीन युक्त पौष्टिक चारा है।
मिट्टी की उर्वरता: यह एक नाइट्रोजन-फिक्सिंग पेड़ है जो मिट्टी में पोषक तत्वों को बढ़ाता है और फसल की पैदावार में सुधार करता है। इसकी गहरी जड़ें मृदा अपरदन को रोकने में सहायक हैं।

सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व

विजयदशमी (दशहरा): दशहरा पर शमी वृक्ष की पूजा (खेजड़ी) की विशेष पूजा की जाती है। माना जाता है कि भगवान राम ने रावण पर विजय से पहले इसकी पूजा की थी और पांडवों ने अपने हथियार इसी पेड़ में छिपाए थे।

पर्यावरण संरक्षण: यह वृक्ष बिश्नोई समुदाय के लिए अत्यंत पूजनीय है। 1730 में खेजड़ली गांव में अमृता देवी के नेतृत्व में 363 लोगों ने खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिए अपना बलिदान दिया था।

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