क्या खत्म हो जाएगा 'खेजड़ी बचाओ आंदोलन', सरकार लिखित आश्वासन देने को तैयार, जानें पूरा मामला

Ashish Bhardwaj | Feb 05, 2026, 15:46 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के बीकानेर में खेजड़ी बचाओ आंदोलन में राज्य सरकार आंदोलनकारियों को लिखित आश्वासन देने को तैयार हो गई हैं। खेजड़ी वृक्षों के संरक्षण के लिए सरकार ने सकारात्मक कदम उठाने की वादा किया है।

News In Short

  • बीकानेर में खेजड़ी बचाओ आंदोलन पर सरकार ने आंदोलनकारियों को लिखित आश्वासन देने का किया वादा।
  • मंत्री केके विश्नोई ने कहा कि खेजड़ी संरक्षण को लेकर सरकार पूरी तरह से गंभीर है।
  • आंदोलनकारियों ने खेजड़ी की अवैध कटाई को 'गैर-जमानती अपराध' बनाने की मांग की।
  • मंत्री ने किया अमृता देवी बिश्नोई सहित 363 शहीदों को याद।
  • खेजड़ी को 'धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर' घोषित करने की गई मांग।

News In Detail

राजस्थान के बीकानेर में खेजड़ी बचाओ आंदोलन चार दिन से जारी है । अच्छी खबर यह है कि अब सरकार इस आंदोलन को लेकर सकारात्मक कदम उठाने जा रही है। मंत्री केके विश्नोई ने आंदोलन के मंच से कहां कि सरकार खेजड़ी वृक्षों के संरक्षण को लेकर गंभीर है। आंदोलनकारियों की मांगों को लेकर लिखित आश्वासन दिया जाएगा।



लिखित आश्वासन देंगे

मंत्री केके विश्नोई ने मंच से कहा, "हम खेजड़ी के संरक्षण को लेकर पूरी तरह से गंभीर हैं और इसके लिए हम लिखित आश्वासन देंगे।" यह घोषणा आंदोलनकारियों के लिए एक बड़ी नैतिक जीत मानी जा रही है, क्योंकि उन्होंने 'ट्री एक्ट' जैसी सख्त मांगों को लेकर अनशन पर बैठकर सरकार को दबाव में डाला था।



अमृता देवी बिश्नोई के बलिदान को किया याद

केके विश्नोई ने बिश्नोई समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए कहा कि केंद्र सरकार से लेकर प्रदेश सरकार तक अमृता देवी बिश्नोई के बलिदान को याद करती है। उन्होंने यह भी कहा, "हम उनकी विरासत और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को झुकने नहीं देंगे।"



सोलर पावर प्रोजेक्ट्स की भूमिका

आंदोलन की जड़ पश्चिमी राजस्थान के सोलर पावर प्रोजेक्ट्स में है। खेजड़ी को 'मरुस्थल की जीवनरेखा' कहा जाता है, लेकिन आंदोलनकारियों का आरोप है कि इन परियोजनाओं के तहत हजारों खेजड़ी वृक्षों की अवैध और बेरहमी से कटाई की जा रही है। कई बार इन वृक्षों को रात में काटकर मिटाने के लिए जमीन में गाड़ दिया जाता है। इससे प्रमाण को मिटाया जा सके।



1000 रुपये का मामूली जुर्माना

आंदोलनकारियों ने खेजड़ी की अवैध कटाई पर केवल 1000 रुपये के जुर्माने की व्यवस्था को नाकाफी बताया। उनकी प्रमुख मांग है कि इस जुर्माने को खत्म कर इसे 'गैर-जमानती अपराध' की श्रेणी में डाला जाए। इसके साथ ही, खेजड़ी को धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर घोषित कर एक कड़ा 'ट्री एक्ट' लागू किया जाए ताकि सोलर प्लांट कंपनियां मनमानी न कर सकें।



363 शहीदों को किया याद

यह आंदोलन महज एक धरना नहीं है, बल्कि यह बिश्नोई समाज के ऐतिहासिक 'खेजड़ली बलिदान' (1730 ई.) की याद दिलाता है, जहां अमृता देवी बिश्नोई और 363 अन्य लोगों ने पेड़ों के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। इस आंदोलन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 3 फरवरी से करीब 480 लोग (जिनमें 29 संत और 60 महिलाएं शामिल हैं) अनशन पर बैठे हैं। संतों ने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। इसके बाद ही मंत्रियों का प्रतिनिधिमंडल वार्ता के लिए पहुंचा।



ये भी पढे़:-

राजस्थान बोर्ड परीक्षा: आंसरशीट में होंगे 4-4 पेज कम, पहली बार कॉपी में होगा बार कोड



एमपी, सीजी और राजस्थान में बदल रहा मौसम: घना कोहरा, ठंड और बारिश का अलर्ट जारी



भारत-अमेरिका ट्रेड राजस्थान के लिए होगा गेम चेंजर, देश अब आर्थिक शक्ति के रूप में बना रहा है पहचान - भजन लाल शर्मा



विश्वेन्द्र सिंह की बढ़ती भगवा निकटता, क्या बदलने वाले हैं राजस्थान के सियासी समीकरण?



Tags:
  • सरकार
  • आंदोलन
  • मंत्री
  • बिश्नोई समाज
  • खेजड़ी बचाओ