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Photograph: (the sootr)
News In Short
- राजस्थान में खेजड़ी बचाओं आंदोलन अब और भी तेज हो गया।
- पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने खेजड़ी बचाओं आंदोलन का किया खुला समर्थन।
- गोविंदराम मेघवाल ने सरकार से ट्री प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग की।
- बीकानेर में महापड़ाव के बाद आंदोलनकारियों ने अनशन शुरू किया हैं।
- आंदोलन को मिल रहा है राजनीतिक समर्थन, सोमवार को हुई थी बड़ी महापंचायत
News In Detail
राजस्थान में खेजड़ी बचाओं आंदोलन को अब व्यापक जनसमर्थन देखने को मिल रहा है। अब इस आंदोलन को नया बल मिल गया है। क्योकि अब पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी इस आंदोलन का खुला समर्थन किया है। बीकानेर में मंगलवार को भी खेजड़ी वृक्ष को बचाने के लिए संतों का अनशन और धरना जारी है। आंदोलन में 363 संतों के साथ बड़ी संख्या में आम लोग भी शामिल हुए।
“सिर साँठे रूंख रहे तो भी सस्तो जाण"
— Vasundhara Raje (@VasundharaBJP) February 3, 2026
खेजड़ी साधारण पेड़ नहीं, यह हमारे लिए देववृक्ष है। जो हमारी आस्था और भावनाओं से जुड़ा है। हमारे यहाँ खेजड़ी की पूजा की जाती हैं। मैं स्वयं भी खेजड़ी की पूजा करती हूँ। जिसकी हम पूजा करें, उस देवता का संरक्षण हमारा दायित्व है।
राजनीति से ऊपर… pic.twitter.com/1ZyMVC8T5W
वसुंधरा राजे ने खेजड़ी आंदोलन का खुला समर्थन
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इस आंदोलन में खुलकर समर्थन किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर खेजड़ी वृक्ष की पूजा करते हुए अपनी तस्वीर साझा की और लिखा कि वह भी खेजड़ी की पूजा करती हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति से ऊपर उठकर खेजड़ी वृक्ष और ओरण (गोचर भूमि) के संरक्षण के लिए सभी को एकजुट होकर काम करना चाहिए। वसुंधरा राजे ने खुद को आंदोलनकारियों के साथ खड़ा बताया, जिससे इस आंदोलन को नया राजनीतिक समर्थन मिला।
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खेजड़ी वृक्ष के संरक्षण के लिए कानून की मांग
इस आंदोलन के दौरान पूर्व मंत्री गोविंदराम मेघवाल ने सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा यदि चाहें तो विधानसभा में तुरंत खेजड़ी वृक्ष के संरक्षण के लिए कानून बना सकते हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार दो दिन के भीतर ट्री प्रोटेक्शन एक्ट लागू करे, ताकि खेजड़ी और अन्य वृक्षों की अंधाधुंध कटाई को रोका जा सके।
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महापड़ाव और अनशन की शुरुआत
बीकानेर में सोमवार को आयोजित महापड़ाव में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इस महापड़ाव के बाद समाज के लोग कलेक्ट्रेट के पास स्थित बलने बिश्नोई धर्मशाला में पहुंचे और मंगलवार से अनशन की शुरुआत की। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।
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आंदोलन का मुख्य उद्देश्य
संत सच्चिदानंद ने बताया कि इस आंदोलन में पुरुषों के साथ-साथ बड़ी संख्या में महिलाएं भी भाग ले रही हैं। उनका कहना है कि आंदोलनकारियों की मुख्य मांग यह है कि जब तक ट्री प्रोटेक्शन एक्ट लागू नहीं हो जाता, तब तक प्रदेश में एक भी पेड़ न काटा जाए। संतों और समाज के लोगों का कहना है कि खेजड़ी केवल एक वृक्ष नहीं है, बल्कि यह राजस्थान की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय पहचान का प्रतीक है।
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राजनीतिक समर्थन और बढ़ता जनसमर्थन
खेजड़ी वृक्ष के संरक्षण को लेकर इस आंदोलन में अब राजनीतिक समर्थन भी मिल रहा है, जिसके कारण यह आंदोलन प्रदेशव्यापी चर्चा का विषय बन चुका है। इसके साथ ही यह मुद्दा अब ज्यादा लोगों के बीच जागरूकता और चर्चा का कारण बन गया है।
इसलिए हो रहा है यह आंदोलन
पश्चिम राजस्थान में सोलर प्लांट लगाने के लिए खेजड़ी वृक्ष की अंधाधुंध कटाई हो रही है। एक अनुमान के अनुसार अब तक 25 लाख से अधिक खेजड़ी की कटाई हो चुकी है, जबकि अगले पांच साल में यह संख्या 50 लाख से अधिक हो सकती है। खेजड़ी को राज्य वृक्ष का दर्जा प्राप्त है। लेकिन, कानून इतना लचर है कि खेजड़ी काटने वालों पर मामूली ही जुर्माना लग पाता है।
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