कोटा के 233 फीट ऊंचे रावण ने बनाया कीर्तिमान, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में शामिल, CM को सौंपा प्रमाण-पत्र
Kota. राजस्थान के कोटा जिले में एक विशेष रिकॉर्ड स्थापित किया गया है, जहां 233 फीट ऊंचे रावण के पुतले ने एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान बनाया है। कलाकारों ने अपनी कड़ी मेहनत और उत्कृष्ट कला के माध्यम से इस रावण के पुतले को आकार दिया, जिससे इसने न केवल कोटा, बल्कि पूरे राजस्थान का नाम रोशन किया।
मुख्यमंत्री को सौंपा प्रमाण-पत्र
कोटा में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को इस शानदार पुतले के लिए संस्था के प्रतिनिधि भुवनेश मथुरिया ने रिकॉर्ड का प्रमाण-पत्र सौंपा। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि यह सिर्फ एक पुतला नहीं, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर और कला के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कलाकारों की मेहनत की सराहना की और भविष्य में ऐसे और रिकॉर्ड स्थापित करने की उम्मीद जताई।
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सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक
कोटा का यह रावण न केवल अपनी ऊंचाई के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह राजस्थान की संस्कृति और परंपराओं का भी एक बेहतरीन उदाहरण है। इस पुतले के निर्माण में पारंपरिक कला के साथ आधुनिक तकनीकों का मिश्रण देखने को मिलता है। इसके निर्माण में स्थानीय कारीगरों ने अपनी कला का अद्भुत प्रदर्शन किया, जिससे यह पुतला कला का अद्वितीय उदाहरण बन गया।
कला और संस्कृति की ओर
इस रिकॉर्ड से यह स्पष्ट हो जाता है कि राजस्थान में कला और संस्कृति के क्षेत्र में न केवल उत्साह है, बल्कि इसे बढ़ावा देने के लिए सरकार और नागरिक दोनों ही मिलकर काम कर रहे हैं। यह भविष्य में और भी बड़े रिकॉर्ड स्थापित करने की प्रेरणा देगा। इस पुतले को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक आए। इसके साथ ही उन्होंने कोटा और राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर को समझने का प्रयास किया।
FAQ
- 1. कोटा में बनाई गई 233 फीट ऊंची रावण मूर्ति का उद्देश्य क्या था?
यह मूर्ति राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर और कला के प्रति समर्पण का प्रतीक है। इस मूर्ति को एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान मिला है। - 2. मुख्यमंत्री ने इस मूर्ति के निर्माण के लिए क्या किया?
मुख्यमंत्री ने इस शानदार मूर्ति के निर्माण के लिए मूर्तिकार को प्रमाण पत्र सौंपा और उसकी मेहनत की सराहना की। - 3. इस मूर्ति के निर्माण में किस प्रकार की कला का उपयोग किया गया?
इस मूर्ति के निर्माण में पारंपरिक कला और आधुनिक तकनीकों का मिश्रण किया गया है, जिससे यह मूर्ति कला का अद्भुत उदाहरण बन गई है।