MLA रविंद्र सिंह भाटी ने अमित शाह को खून से लिखा लेटर, बीकानेर दौरे के दौरान सौंपा जाएगा
Jageshwar prasad | May 24, 2026, 20:49 IST
Photograph: (the sootr)
बाड़मेर विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने मजदूरों के खून में अपना खून मिलाकर गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। गिरल लिग्नाइट माइंस के मजदूर 45 दिन से धरने पर हैं। उनकी मांग है कि 8 घंटे की ड्यूटी लागू की जाए, स्थानीय लोगों को नौकरी में प्राथमिकता मिले।
News In Short
- विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने मजदूरों के खून में अपना खून मिलाकर अमित शाह को लिखा पत्र।
- गिरल लिग्नाइट माइंस के मजदूर 45 दिन से 50 डिग्री के तपते रेगिस्तान में धरने पर बैठे हैं।
- मजदूरों का आरोप- 8 घंटे की जगह 12 घंटे काम करवाया जा रहा है, नौकरी से निकाला जा रहा है।
- मजदूर 1994 में खनन के लिए जमीन दे चुके हैं, अब खुद बेरोजगार हो गए हैं।
- 25-26 मई को बीकानेर दौरे पर आ रहे अमित शाह को यह पत्र सौंपा जाएगा।
News In Detail
यह पत्र उन मजदूरों की व्यथा को बयान करता है जो पिछले 45 दिनों से लगभग 50 डिग्री के तपते रेगिस्तान में धरने पर बैठे हैं। 25 और 26 मई को अमित शाह बीकानेर के दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान उन्हें यह खून से लिखा पत्र सौंपा जाएगा।
45 दिन से तपते रेगिस्तान में धरना
उन्होंने कहा कि मजदूरों की 23 सूत्री मांगें हैं, जिन्हें प्रशासन के सामने रख दिया गया है। 40 दिनों तक मजदूरों की सुध लेने कोई नहीं आया। जब छत्तीस कौम के लोगों ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया तब सबको पता चला कि मजदूर धरने पर बैठे हैं।
जमीन देने वाले मजदूर बन गए
पत्र में यह बताया गया है कि मजदूरों को निर्धारित 8 घंटे की बजाय 12 घंटे तक काम कराया जा रहा है। जिम्मेदार अधिकारी इन मजदूरों की समस्याओं को सुनने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
हाईकोर्ट को भ्रमित करने का आरोप
भाटी ने कहा कि मजदूरों की ही जमीनें थीं, वह चीजें हाईकोर्ट के सामने नहीं रखी गईं। असत्य को सत्य बताकर कोर्ट के सामने पेश किया गया। उन्होंने कहा कि इसका जवाब आने वाले दिनों में दिया जाएगा।
जाति-धर्म पर मजदूरों को तोड़ने का आरोप
अंग्रेजों की फूट डालो, राज करो वाली नीति को अपनाया जा रहा है। उनकी पीड़ा को सुनने और समझने की जरूरत है। मजदूर अपनी मेहनत से जीवनयापन कर रहे हैं और अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं।
आंदोलन जारी रहेगा
मजदूरों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
- मजदूरों के लिए 8 घंटे की ड्यूटी लागू की जाए।
- स्थानीय व्यक्तियों को नौकरी में प्राथमिकता दी जाए।
- मजदूरों को उचित सैलरी दी जाए।
- धरने पर बैठे मजदूरों का बकाया वेतन दिया जाए।
- बोनस एक्ट 1965 के हिसाब से बोनस दिया जाए।
- मजदूरों के लिए चाय-नाश्ते की व्यवस्था की जाए।
क्या है RSMML और गिरल माइंस?
यह कंपनी मुख्य रूप से लिग्नाइट का उत्पादन करती है, जो गिरल लिग्नाइट पावर प्लांट को ईंधन देती है। पहले स्थानीय लोगों को रोजगार देने का वादा किया गया था, लेकिन अब युवाओं को नौकरी से हटा दिया गया है। इसी वजह से किसान और गांव के युवा 9 अप्रैल से गिरल गांव में धरने पर बैठे हैं।
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